- भारत का बेशकीमती खनिज सेल कंपनियों के जरिए चीन को कौड़ियों के भाव में बेचने वाली कंपनी ED ने एक्शन लिया है.
- लौह अयस्क माइनिंग से जुड़े इस केस में एजेंसी ने 1023 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति सीज की है.
- ईडी के इस एक्शन की धमक भारत ही नहीं सिंगापुर तक में महसूस की गई है.
Goa Illegal Iron Ore Mining Case: भारत का बेशकीमती खनिज सेल कंपनियों के जरिए चीन को कौड़ियों के भाव में बेचने वाली कंपनी पर केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन लिया है. लौह अयस्क माइनिंग से जुड़े इस केस में एजेंसी ने 1023 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति सीज की है. ईडी के इस एक्शन की धमक भारत ही नहीं सिंगापुर तक में महसूस की गई है. सिंगापुर में भी प्रवर्तन निदेशालय ने 471 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की है. ईडी की यह कार्रवाई गोवा की एक लौह अयस्क खनन मामले से जुड़ी है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार को कहा कि उसने गोवा में कथित तौर पर गैर-कानूनी लौह अयस्क माइनिंग मामले में 1,023 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त की है, जिसमें सिंगापुर में मौजूद संपत्ति भी शामिल हैं.
गोवा के सलगांवकर ग्रुप पर बड़ा एक्शन
केंद्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि सलगांवकर ग्रुप और उससे जुड़े लोगों (AVS ग्रुप) द्वारा बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी आयरन ओर माइनिंग के मामले में 19 जून को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एक प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया गया है. ED के अनुसार जब्त की गई संपत्तियों में भारत में मौजूद 99 अचल संपत्तियां (459.10 करोड़ रुपए), सिंगापुर में 31 अचल संपत्तियां (471.32 करोड़ रुपए) और भारतीय कंपनियों में इक्विटी शेयर (93.42 करोड़ रुपए) शामिल हैं.
कुल 1023.85 करोड़ की संपत्ति सीज की गई
ये संपत्तियां स्वर्गीय अनिल सलगांवकर की एस्टेट (उनकी एडमिनिस्ट्रेटर लक्ष्मी अनिल सलगांवकर के जरिए), सलगांवकर माइनिंग इंडस्ट्रीज़, शांतिलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स, एस कांतिलाल एंड कंपनी, सालिथो ओर्स, वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स और सुवर्णरेखा पोर्ट के नाम पर थीं. इन संपत्तियों की कुल कीमत 1,023.85 करोड़ रुपये है.
गोवा पुलिस CID की FIR से शुरू हुई कार्रवाई
मिली जानकारी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच गोवा पुलिस CID की FIR से शुरू हुई है. ED ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 और 2018 के अपने फैसलों में यह माना है कि 22.11.2007 के बाद (नए माइनिंग लीज जारी होने तक) गोवा में की गई सभी माइनिंग गैर-कानूनी थी.
एजेंसी का आरोप है कि उसकी जांच में पाया गया कि AVS ग्रुप ने 2007-12 के दौरान दस माइनिंग लीज का संचालन किया और लौह अयस्क की गैर-कानूनी निकासी, बिक्री और निर्यात से 2,492.95 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) की.
ब्रिटिश वर्जिन शेल कंपनियों के जरिए चीन को बेचा जाता था भारत का खनिज
गैर-कानूनी तरीके से निकाले गए लौह अयस्क को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में बनी शेल कंपनियों (स्पेशल पर्पस व्हीकल्स) को बहुत कम कीमत पर निर्यात किया गया. ये कंपनियां सिर्फ कागजी तौर पर काम करती थीं. फिर इसे चीन को दोबारा बेच देती थीं, जिससे 2,744.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुनाफा कमाया जाता था.
5237 करोड़ की कमाई का निकला हिसाब
एजेंसी के अनुसार, अपराध से हुई कुल कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) का हिसाब 5,237.84 करोड़ रुपये लगाया गया है. ED का आरोप है कि इन फंड्स को BVI और सिंगापुर स्थित SPV के जरिए घुमाया गया, इनका इस्तेमाल विदेश में बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया, और कुछ हिस्सा शेयर कैपिटल के तौर पर वापस भारत लाया गया. इनमें से 99 संपत्तियां भारत में हैं और 31 संपत्तियां सिंगापुर की हैं, जिन्हें जब्त किया गया है.
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