जानिए क्या है वह ऐप जिस पर साहिल-मुस्कान का हर वीडियो अपलोड कर रही पुलिस

अदालत में भी यह ई-साक्ष्य ऐप उपलब्‍ध होता है. ऐसे में मुकदमे में ट्रायल के दौरान जज यह देख सकता है कि उस समय केस से जुड़े लोगों के बयान क्या थे, जो अब बदल चुके हैं.

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साफ्टवेयर पर अपलोड हुए ई साक्ष्य ऐप, अब छेड़छाड़ संभव नहीं
नई दिल्‍ली:

यूपी के मेरठ में सौरभ हत्याकांड की पूरी कहानी और जुर्म के एक-एक सबूत को पुलिस बेहद बारीकी से जांचकर एक साफ्टवेयर 'ई साक्ष्य ऐप' में सुरक्षित कर रही है. कोर्ट में केस की सुनवाई के दौरान ये पुलिस का ऐसा बह्मास्‍त्र होगा, जिसका कोई जवाब कातिलों के पास नहीं होगा. अगर पीड़ित और आरोपित पक्ष 'आउट ऑफ कोर्ट' समझौता भी कर लेते हैं, तो भी दोषी बच नहीं पाएंगे. यानि अगर साहिल और मुस्‍कान अगर अपना बयान बदलते भी हैं, तो भी उन्‍हें सलाखों के पीछे जाना ही होगा. बता दें कि बीएनएस (भारतीय दंड संहिता) कानून के आने के बाद ई-साक्ष्य ऐप पर पुलिस को मुकदमे के सभी सबूत अपलोड करने पड़ते हैं. आइए आपको बताते हैं कि 'ई साक्ष्य ऐप' कैसे काम करता है और पुलिस के लिए ये कैसे एक मजबूत हथियार बना रहे है.  

ई साक्ष्य ऐप, पुलिस और अदालत के बीच की कड़ी

नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई मामला बीएनएस के तहत दर्ज होता है, तो केस की छानबीन करने वाला पुलिस अधिकारी ई साक्ष्य ऐप पर अपना अकाउंट खोलता है. फिर वह केस से जुड़े सभी सबूत इस ऐप पर अपलोड करता रहता है. इसके फोटो, वीडियो आदि सभी कुछ शामिल हो सकते हैं. इसके साथ ही जांचकर्ता अधिकारी को एक यूनिक नंबर मिलता है. यह इस केस का खास नंबर होता है, जिसके जरिए इस मामले से जुड़े साक्ष्‍य फिर अपलोड किये जा सकते हैं. अदालत में भी यह ई-साक्ष्य ऐप उपलब्‍ध होता है. ऐसे में मुकदमे में ट्रायल के दौरान जज यह देख सकता है कि उस समय केस से जुड़े लोगों के बयान क्या थे, जो अब बदल चुके हैं. तकनीकी साक्ष्य के आधार पर अदालत आरोपित को सजा सुना सकती है. इस तरह ई-साक्ष्य ऐप, पुलिस और अदालत के बीच की कड़ी का काम भी करता है.

ई-साक्ष्य ऐप ऐसे करता है मदद

  • ई-साक्ष्य ऐप का इस्‍तेमाल करके किसी अदालत के न्यायाधीश और अदालती अधिकारी साक्ष्यों को डिजिटल रूप में संग्रहीत कर सकते हैं.
  • ऐप में सबूतों की प्रमाणिकता की जांच करने के लिए विशेष सुविधाएं भी दी गई हैं.
  • ऐप में साक्ष्यों को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने के लिए विशेष सुविधाएं हैं, जिससे काफी लंबे समय तक सबूत सुरक्षित रहते हैं.
  • ई-साक्ष्य ऐप के इस्‍तेमाल से न्यायिक प्रक्रिया में काफी सुधार देखने को मिल रहा है. इसकी वजह से मामलों का निपटान तेजी से किया जा सकता है.

बता दें कि मुस्‍कान और साहिल पुलिस की गिरफ्त में हैं और उन्‍होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. पुलिस अब इस मामले में सबूत जुटा रही है, ताकि दोनों के खिलाफ स्‍ट्रॉन्‍ग केस तैयार हो सके. मुस्‍कान और साहिल ने माना है कि उन्‍होंने पूरी प्‍लानिंग के साथ सौरभ राजपूत का कत्‍ल किया था. कत्‍ल करने के बाद सौरभ की बॉडी के टुकड़े कर एक ड्रम में भर दिया था और उसे सीमेंट से सील भी कर दिया, ताकि कोई उन्‍हें पकड़ न पाए. पुलिस हर एक सबूत और घटना की बारीकी से जांच कर रही है.  

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