- डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि इतिहास से सीख लेते हुए हमें महिलाओं की ताकत को पहचानना होगा
- अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को कैसे सशक्त बनाने का काम हो रहा है
- उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए महिलाओं को विकास यात्रा का मुख्य वास्तुकार मानना होगा
अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने गुरुवार को कहा कि इतिहास में कोई भी देश आधी आबादी को आर्थिक गतिविधियों से बाहर रखकर सतत विकास हासिल नहीं कर पाया है. भारत के समृद्ध इतिहास से सीख लेते हुए हमें महिलाओं की उस ताकत को पहचानना होगा, जो अभी भी पूरी तरह सामने नहीं आ पाई है. उनका कहना था कि साल 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए महिलाओं को इस विकास यात्रा का मुख्य वास्तुकार मानना जरूरी है.
सशक्तिकरण की शुरुआत संसाधनों से
राजधानी दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की तरफ से आयोजित 'सशक्त नारी, विकसित भारत' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि सशक्तिकरण की शुरुआत संसाधनों तक पहुंच से होती है. उन्होंने बताया कि किस तरह अदाणी फाउंडेशन ग्रामीण इलाकों में महिला किसानों की मदद कर रहा है. फाउंडेशन द्वारा इन महिलाओं को कृषि आधारित मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा रही है. इससे वह खुद ही सिंचाई, उर्वरक का चयन और मंडी भाव जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करके अपनी आय और आत्मविश्वास बढ़ा रही हैं.
डेयरी सेक्टर का दिया उदाहरण
डेयरी सेक्टर का उदाहरण देते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने बताया कि फाउंडेशन की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को संगठित कर डेयरी समूह बनाए गए हैं. आज 3,500 से अधिक ग्रामीण महिलाएं इन डेयरी समितियों से जुड़ी हुई हैं और हर साल लगभग 75 लाख लीटर दूध का संग्रह करती हैं. इससे उनकी आय स्थिर हुई है, मोलभाव की ताकत बढ़ी है और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि उनका आत्मविश्वास बढ़ा है.
महिला सशक्तिकरण समग्र होना चाहिए
उन्होंने कहा कि देश में कई दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में जहां अदाणी फाउंडेशन काम कर रही है, वहां लड़कियों की शिक्षा का स्तर बहुत कम है. कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने कभी स्कूल तक का मुंह नहीं देखा और कॉलेज जाना तो उनके लिए दूर की बात है. ऐसे में शिक्षा और कौशल विकास बेहद जरूरी है. प्रीति अदाणी ने जोर देते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समग्र होना चाहिए. इसमें लड़कियों की शिक्षा, युवतियों के लिए स्किल ट्रेनिंग, महिलाओं को वित्तीय सहायता, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य सुरक्षा, लीडरशिप ट्रेनिंग और महिला उद्यमों के लिए बाजार से जुड़ाव शामिल होना चाहिए. स्वास्थ्य सेवा, कृषि, डिजिटल सेवाएं, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवतियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं.
केंद्र सरकार की योजनाओं की सराहना की
उन्होंने कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी का स्वागत करते हुए महिलाओं को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियों की सराहना की. उन्होंने केंद्रीय बजट में 'स्वयं सहायता उद्यमी' पहल की तारीफ करते हुए कहा कि यह महिलाओं को आगे बढ़ाकर बड़े उद्यम की मालकिन बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. अदाणी फाउंडेशन की प्रेसिडेंट ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जरिए छोटे उद्यमियों को लोन उपलब्ध हुआ है. 'डिजिटल इंडिया' अभियान ने देश के दूरस्थ इलाकों तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचाई हैं. वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने स्वच्छ ईंधन देकर लाखों महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान में सुधार किया है.
महिलाओं को बस मौका चाहिए, वो कर दिखाएंगी
प्रीति अदाणी ने आगे कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए केवल लोन पर्याप्त नहीं है. उन्हें कौशल, डिजिटल ज्ञान, बाजार तक पहुंच, बुनियादी ढांचा, मार्गदर्शन और एक सहयोगी माहौल की भी जरूरत होती है. उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की अगली विकास गाथा स्कूलों, प्रशिक्षण केंद्रों, गांवों के उद्यमों और डिजिटल बाजारों में आत्मविश्वास से भरी महिलाओं द्वारा लिखी जाएगी. बस उन्हें काम करने का अवसर दें और वह करके दिखाएंगी.
(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)














