क्या ईरान की चाल में उलझ रहा है अमेरिका, क्या कह रहे हैं ये सात संकेत

ईरान के साथ जारी युद्ध पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को जो बयान दिए हैं, वो क्या इस युद्ध को लेकर उलझनों का प्रतीक हैं या उनकी रणनीति. ईरान इस युद्ध को काफी लंबे समय तक क्यों चलाना चाहता है और उसने अपनी रणनीति क्यों बदल ली है, जानिए इस कहानी में.

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नई दिल्ली:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान को पूरी तरह और निर्णायक रूप से पराजित नहीं हो जाता. उन्होंने यह बात रिपब्लिकन सांसदों से बात करते हुए की. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा.उन्होंने कहा था कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से उनके लक्ष्य हासिल हो चुके हैं.  ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने कड़ा जवाब दिया. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, ये हम तय करेंगे, अमेरिका नहीं. ईरान के साथ युद्ध में क्या अमेरिका दबाव महसूस कर रहा है. आइए बताते हैं कि क्या हैं इसके संकेत.

डोनाल्ड ट्रंप के दावों का क्या हुआ

ट्रंप ने सोमवार को युद्ध को लेकर अलग-अलग बयान दिए. इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि आखिर ट्रंप कहना क्या चाहते हैं. उन्होंने सीबीसी न्यूज से कहा था युद्ध लगभग पूरी तरह खत्म होने की स्थिति में है. उनका कहना था कि अमेरिका निर्धारित समय से काफी आगे चल रहा है. जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि अभियान जल्द खत्म हो सकता है, तो उन्होंने कहा,''मुझे नहीं पता, यह निर्भर करता है. इसे खत्म करना मेरे दिमाग में है, किसी और के नहीं.'' ट्रंप अपनी बातों को लेकर स्पष्ट नजर नहीं आए. 

कई विश्लेषक ट्रंप के इन अस्पष्ट बयानों को उनकी घबराहट का प्रतीक बता रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसा लगता है कि अमेरिका इस युद्ध में फंस गया है. वहीं ईरान अमेरिका को इस युद्ध में लंबे समय तक उलझा कर रखने की योजना पर आगे बढ़ता हुआ नजर  रहा है. वह अमेरिका और इजरायल को थकाना चाहता है. इसी रणनीति के तहत उसने अपने ड्रोन और मिसाइलों में कमी लाई है. वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर रहा है और खाड़ी के तेल उत्पादक देशों पर हमला कर दुनिया के तेल बाजार में उथल-पुथल मचा रहा है. वह चाहता है कि अमेरिका घबराकर इस युद्ध से पीछे हट जाए. वहीं ट्रंप ने कुछ ही दिन पहले ही कहा था कि युद्ध तब तक नहीं रुकेगा जब तक ईरान 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' नहीं कर देता है.

ईरान से बातचीत के संकेत क्यों दे रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार ईरान से बातचीत के संकेत दिए हैं. मंगलार को फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह ईरान के साथ बातचीत की संभावना से इनकार नहीं करते, लेकिन यह वार्ता पूरी तरह से शर्तों पर निर्भर करेगी. ट्रंप के इस बयान से पहले ईरान ने किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया था. ट्रंप ने कहा कि उन्हें खबरें मिली हैं कि ईरान बातचीत के लिए काफी उत्सुक है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो ईरानी नेताओं से बात करने के इच्छुक हैं, तो ट्रंप का कहना था- ये संभव है, लेकिन निर्भर करता है कि शर्तें क्या होंगी. ये महज एक संभावना है, सिर्फ संभावना. 

कुवैत में ईरान के ड्रोन हमले में मारे गए अमेरिकी सैनिक का शव

तेल के केंद्रों पर हमले का क्या हो रहा है असर 

ईरान खाड़ी के देशों को निशाना बना रहा है. उसका कहना है कि इन देशों में वह अमेरिकी-इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. वह कतर से लेकर सऊदी अरब तक उनके तेल और गैस संयंत्रों पर निशाना साध रहा है. इन देशों पर ईरान की मिसाइलें और ड्रोन लगातार हमले कर रहे हैं. इसके जरिए वह आर्थिक अव्यवस्था पैदा करना चाहता है. वह चाहता है कि यूरोप, अमेरिका और दूसरे देशों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हो जाए. ईरान अपने इस लक्ष्य में कामयाब होता भी दिखा. सोमवार को क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. इससे पूरी दुनिया में खलबली मच गई. भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया समते कई देशों ने ईंधन की राशनिंग की है. इसी के बाद ट्रंप को यह बयान देना पड़ा कि युद्ध जल्दी ही खत्म हो सकता है. इसके बाद ही बाजार में गिरावट थमी. इसके साथ ही उन्होंने रूस से तेल की खरीद को लेकर कुछ रियायतों की भी घोषणा की. इससे लगा कि ईरान अपने उद्देश्य में कामयाब होता दिख रहा है.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव 

युद्ध के बाद से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं.अमेरिकी अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट'की एक खबर के मुताबिक युद्ध के पहले दो दिन में ही अमेरिका ने 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल कर लिए थे. अमेरिका के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिक्स के मुताबिक फरवरी में अमेरिका में 92 हजार नौकरियां कम हो गईं. वहीं बेरोजगारी की दर 4.4 फीसदी तक पहुंच गई. यह दिसंबर 2021 के बाद सबसे कम है. अमेरिकी मतदाताओं के लिए महंगाई और जीवनयापन की लागत बहुत बड़ा मुद्दा हैं. अमेरिका में हुए सर्वेक्षणों के मुताबिक ईरान के साथ युद्ध के को लेकर लोगों में नाराजगी है. यह स्थिति ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से जोखिम भरी हो सकती है, क्योंकि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव तय करेंगे कि अमेरिकी कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा.

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इस युद्ध का लंबा खिंचना डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलों से भरा हो सकता है. ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान में वादा किया था कि वो अमेरिकी करदाताओं का पैसा बचाएंगे और उन्हें जनहित के काम में खर्च करेंगे. इसके अलावा उन्होंने यह भी वादा किया था कि वो विदेशी युद्धों की फंडिंग नहीं करेंगे. लेकिन उनके दोनों वादे ईरान के खिलाफ जारी युद्ध से पूरे होते हुए नहीं दिख रहे हैं.अमेरिकी अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट' के मुताबिक युद्ध के पहले दो दिन में ही अमेरिका ने 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल कर लिए थे. इससे पता चलता है कि यह युद्ध कितना खर्चीला है.   

खाड़ी में अमेरिका को अंधा कर रहा है ईरान

ईरान चुपचाप और योजनाबद्ध तरीके से अमेरिका के उन रडार सिस्टमों को नष्ट कर रहा है, जो पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका की मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आंख और कान हैं. जैसे जॉर्डन में मुवफ्फाक साल्टी में अमेरिका का एयर बेस है. यह क्षेत्र में अमेरिका का एक बेहद महत्वपूर्ण ठिकाना है और यहां कई अमेरिकी फाइटर जेट तैनात हैं. यहां अमेरिका का टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम यानी THAAD का एक रडार भी मौजूद था. उसे ईरान ने अब नष्ट कर दिया है. यह रडार पूर्वी भूमध्य सागर और लेवांत क्षेत्र के आसमान पर नजर रखता था ताकि लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को पकड़ा जा सके. अभी यह रडार पूरी तरह जलकर मलबे में बदल चुका है. इसी तरह से कतर में एक बहुत बड़ा तीन-तरफा फेज्ड एरे रडार, जो पूरे खाड़ी क्षेत्र पर 360 डिग्री निगरानी रखता था और अमेरिकी मिसाइल रक्षा के लिए बेहद अहम था, उस पर ईरान की एक मिसाइल सीधे आकर लगी थी.

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ईरान के सस्ते हथियारों पर अमेरिका के महंगे हथियारों का हमला 

ईरान अपने सस्ती मिसाइलों और ड्रोन से उस पर हमले करता है. इन हमलों को नाकाम करने के लिए अमेरिका अपनी इन रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल करता है. इस तरह अमेरिका अपने महंगे हथियारों से सस्ते हमलों से निपट रहा है. ईरान की इस रणनीति से अमेरिकी रक्षा प्रणाली पर दबाव है. माना जा रहा है कि युद्ध के मैदान में करीब 800 पैट्रियट मिसाइलें तैनात हैं. ईरान की ओर से दागी गई एक मिसाइल के लिए चार से छह तक इंटरसेप्टर फायर किए जा रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक अब तक करीब 200 इंटरसेप्टर फायर किए जा चुके हैं. वहीं ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोन की कोई कमी नहीं है. उसके पास अलग-अलग रेंज की 20 हजार से 50 हजार मिसाइलें हैं. उसके पास हजारों की संख्या में ड्रोन भी मौजूद हैं. 

अमेरिका का ईरान में अब तक का हासिल क्या है

इतना करने के बाद भी अमेरिका इस युद्ध में अभी तक कुछ हासिल नहीं कर पाया है, सिवाय ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई समेत वहां के कुछ प्रमुख नेताओं की हत्या के अलावा. आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने मोजतबा खामेनेई को अपना नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है. इससे अमेरिका की ईरान में सत्ता परिवर्तन की योजना भी अभी परवान नहीं चढ़ पाई है. 

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