देश भर में डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के बीच सरकार इस पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है. जालसाज बड़े पैमाने पर बुजुर्गों, पूर्व अफसरों, कारोबारियों को डरा-धमकाकर करोड़ों रुपये ऐंठ रहे हैं. बैंक अकाउंट में पैसा आते ही कुछ घंटों में इतने अकाउंट में घुमाते हैं कि जांच एजेंसियां जब तक आरोपियों तक पहुंचती हैं, तब तक देर हो जाती है. लिहाजा सरकार ने सु्प्रीम कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें बायोमेट्रिक सिम वेरिफिकेशन से लेकर संदिग्ध बैंक खातों पर अस्थायी रोक तक के उपाय शामिल हैं.
इसमें फोकस साइबर धोखाधड़ी में सिम कार्ड के दुरुपयोग को रोकना है. सिम जारी करते वक्त टेलीकॉम यूजर की पहचान के सख्त नियमों और बायोमेट्रिक पहचान और सत्यापन सिस्टम को लागू कराने की वकालत है. साइबर अपराध में इस्तेमाल संदिग्ध या फर्जी सिम कार्डों को तुरंत ब्लॉक करने की सिफारिश है.
सिम खरीदने वालों की पहचान स्पष्ट हो
अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की है. हितधारकों से बात कर AG आर वेंकटरमनी ने कई ठोस कदम सुझाए हैं. अटॉर्नी जनरल ने अदालत से इन सिफारिशों को लागू कराने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की है.सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत:संज्ञान लिया है. अपनी रिपोर्ट में AG वेंकटरमनी ने कहा है कि अदालत दूरसंचार विभाग (DoT) को निर्देश दे कि वह टेलीकॉम कंपनियों के जरिए कुछ कदम जल्द से जल्द लागू कराए. सिम खरीदने वालों की पहचान के लिए टेलीकॉम यूजर पहचान नियम और बायोमेट्रिक आइडेंटिटी वेरिफिकेशन सिस्टम को तेजी से लागू किया जाए. ताकि सिम जारी करने की राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी हो सके.
सिम कार्ड एक्टिवेशन में जवाबदेही हो
सिम एक्टिवेशन के लिए पॉइंट ऑफ सेल वेंडर्स की जवाबदेही और वेरिफिकेशन मजबूत किया जाए. साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध सिम कार्ड को तुरंत ब्लॉक करने का तंत्र विकसित किया जाए.जांच के दौरान टेलीकॉम कंपनियां रियल-टाइम डेटा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा करें. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंफोरमेशन टेक्नॉलाजी मंत्रालय को सलाह दी गई है कि वह वाट्सएप से निम्न सुरक्षा उपाय लागू करवाए.
डिजिटल अरेस्ट रोकने को बड़े सुझाव
- सिम बाइंडिंग मैकेनिज्म लागू करना
- लंबे समय तक चलने वाले स्कैम कॉल को पहचानने, रोकने के उपाय
- स्काईप जैसे अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स अपनाने पर विचार
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों और I4C के साथ सक्रिय सहयोग
- ऐसे डिवाइस IDs की पहचान और ब्लॉकिंग, जो बार-बार फ्रॉड में इस्तेमाल होते हैं
- डिलीट किए गए अकाउंट्स का डेटा कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखा जाए
गाइडलाइन को मंजूरी देने की मांग
डिजिटल अरेस्ट पर RBI द्वारा तैयार गाइडलाइन (SOP) को मंजूरी देने की मांग की गई है, जिसमें संदिग्ध बैंक खातों पर अस्थायी तौर पर धन निकासी रोकना, साइबर फ्रॉड मामलों में एक समान प्रक्रिया लागू करना शामिल है. डिजिटल अरेस्ट पर अलग-अलग हाई कोर्ट के विरोधाभासी आदेशों से बचाव की बात कही गई है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंफोरमेशन टेक्नॉलाजी मंत्रालय को IT एक्ट के तहत शिकायत निवारण (Section 43) के लिए ऑनलाइन पोर्टल तेजी से विकसित करने का सुझाव दिया गया है. डिजिटल इंटरमीडियरी (जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स) पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में सिविल जिम्मेदारी तय करने के लिए कानून को और सख्त बनाने की सिफारिश भी की गई है.














