- महिला आरक्षण कानून और डीलिमिटेशन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक लोकसभा में विपक्ष के विरोध से गिर गया था
- प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर महिलाओं के सपनों को टूटने देने और स्वार्थी राजनीति करने का आरोप लगाया
- मोदी ने महिला आरक्षण बिल को महिलाओं को सशक्त बनाने और समाज में समावेशिता बढ़ाने वाला बताया
महिला आरक्षण कानून और डीलिमिटेशन से जुड़ा 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में गिर गया. विपक्ष इसे अपनी जीत बताने लगा. कांग्रेस-टीएमसी-डीएमके-सपा ने इस बिल को गिराने में श्रेय लेने की पूरी कोशिश की. बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव है तो तमिलनाडु में भी 23 अप्रैल को चुनाव है. ऐसे में विपक्ष को लगा कि विधेयक गिराकर वो बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को कमजोर साबित कर देंगे. मगर आज पीएम मोदी ने इन दोनों विधेयकों के फायदे गिनाकर विपक्ष के मंसूबों पर पानी फेर दिया.
पीएम मोदी ने क्या कहा
राष्ट्र के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी ने महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन बिल के फायदे गिनाए. उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों का एक ही तरीका रहा है कि जब भी देश के लिए जरूरी फैसला होता है तो उसे कारपेट के नीचे डाल देते हैं. भारत की आजाद के समय आजाद हुए कई देश हमसे आगे निकल गए. इसका सबसे बड़ा कारण था कि कांग्रेस रिफॉर्म को लेकर बैठ जाती थी. कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के सीमा विवाद को लटकाया. पानी के विवाद को लटकाया. सैनिकों की पेंशन को लटकाया. कांग्रेस के हर छल प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है.
महिला आरक्षण बिल पर
महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी ने कहा कि कुछ लोग देश की बेटियों के सपने को टूटने को अपनी कामयाबी बता रहे हैं. मगर ये कामयाबी और नाकामयाबी का मामला है ही नहीं. भारत का प्रत्येक नागरिक देख रहा है कि किस प्रकार हमारी महिलाओं के सपनों को चकनाचूर किया जा रहा है. मगर, मैं देश की सभी महिलाओं से क्षमा मांगता हूं. विपक्षी दलों की स्वार्थ भरी राजनीति के कारण भारत की महिलाओं को सशक्त बनाने का संघर्ष रुका हुआ है. भारत की महिलाओं ने देखा कि कैसे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक जैसे दलों ने हमारी नारी शक्ति के खिलाफ अपनी स्वार्थ भरी राजनीति का जश्न मनाया. विपक्ष ने महिला आरक्षण का विरोध करके पाप किया है और इसके लिए उसे निश्चित रूप से दंड मिलेगा. विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को विफल करके हमारे संविधान का अपमान किया है. मगर हमारे इरादे मजबूत हैं. कल हमारे पास संख्या बल नहीं था, मगर हमारा प्रयास रुकेगा नहीं. हमारे पास मौके फिर आएंगे.
गिनाए फायदे
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन' संशोधन को एक महान प्रयास बताते हुए इसकी तुलना एक पवित्र “महा यज्ञ” से की, जो पूरी निष्ठा और स्पष्ट इरादे से संपन्न किया जाता है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य न केवल 21वीं सदी के भारत की महिलाओं को नए अवसर प्रदान करना है, बल्कि उनके मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करके उन्हें स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने में सक्षम बनाना भी है. प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह संशोधन महिलाओं को राष्ट्र के विकास पथ में सच्चे भागीदार के रूप में एकीकृत करेगा और समाज के सभी वर्गों के लिए अधिक समावेशिता को बढ़ावा देगा. उन्होंने आगे कहा कि यह संशोधन उत्तर, दक्षिण, पूर्व या पश्चिम में स्थित प्रत्येक राज्य की संख्या और प्रतिनिधित्व में आनुपातिक वृद्धि सुनिश्चित करके समय की आवश्यकता को पूरा करता है, चाहे उनका आकार या जनसंख्या घनत्व कुछ भी हो. उन्होंने कहा कि इससे संसद में सभी राज्यों की आवाज बुलंद होगी और देश की संघीय भावना मजबूत होगी. एक महिला सब कुछ भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान नहीं भूलती. कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा किया गया यह अपमान हर महिला के दिल में हमेशा अंकित रहेगा.
डीलिमिटेशन पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल परिसीमन (डीलिमिटेशन) पर लगातार झूठ बोल रहे हैं. ये लोग विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं, क्योंकि बांटो और राज करो ये राजनीति कांग्रेस अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है और कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है. सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है कि परिसीमन से न किसी राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा और न किसी की भागीदारी कम होगी. सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी. फिर भी कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए. मैं जानता हूं कि आज मेरे देश की माताएं, बहनें, बेटियां... आप सभी दुखी हैं. मैं भी आपके इस दुख में दुखी हूं. लेकिन हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं, हमारा आत्मबल अजेय है. हमारे पास आगे भी और मौके आएंगे. हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए इस संकल्प को पूरा करना ही है.
बंगाल-तमिलनाडु चुनाव में कया असर पड़ेगा?
जाहिर है प्रधानमंत्री के इस संबोधन को सुनने के बाद बंगाल और तमिलनाडु चुनावों में ये अब मुद्दा बनेगा. बीजेपी इन दोनों बिलों को रोकना का ठिकरा टीएमसी और डीएमके पर फोड़ेगी और उनके लिए ये समझाना बहुत मुश्किल होगा कि आखिर उन्होंने इन दोनों बिलों को रोकने में क्यों मदद दी? महिला आरक्षण का मुद्दा तो हर महिला से जुड़ा हुआ है, यही कारण है कि पीएम मोदी के भाषण का अधिकांश हिस्सा इसी पर था. पर पीएम मोदी ने डीलिमिटेशन के मु्द्दे को भी खास तौर पर अपने भाषण रखा. डीएमके और टीएमसी इसके बहाने बीजेपी पर आरोप लगा रही थीं कि वो इन राज्यों के साथ भेद-भाव करना चाह रही थी, लेकिन पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि सभी राज्य की भागीदारी उसके अनुपात में होने वाला विधेयक संसद में पेश किया गया था. अगर ये बिल पास हो जाता तो कई और लोग विधायक और सांसद बन सकते थे. जाहिर है, आम जनता के साथ इन दलों के कैडर में भी अपने नेतृत्व के फैसले पर बेचैनी हो सकती है. हालांकि, रिजल्ट ही बताएगा कि दोनों बिलों को पास नहीं होने से रोकने का टीएमसी और डीएमके को नुकसान हुआ या नहीं.
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