'डीजीपी से त्रुटि हुई' : फोन पर पैरवी मामले में नीतीश कुमार बोले- दो माह में होने वाले हैं रिटायर

गया के पूर्व एसएसपी और वर्तमान में पुलिस मुख्यालय में एआईजी (आई) के पद पर तैनात आदित्य कुमार के एक कथित दोस्त ने खुद को हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बताकर डीजीपी को फोन किया और शराबबंदी मामले में आदित्य कुमार को क्लीन चिट देने का दबाव डाला था.

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फोन पर पैरवी मामले में नीतीश कुमार ने माना है कि बिहार डीजीपी से त्रुटि हुई है. (फाइल फोटो)

एक दलाल के फ़ोन पर बिहार डीजीपी के आईपीएस अधिकारी को क्लीन चिट देने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने माना है कि डीजीपी से त्रुटि हुई है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि डीजीपी का बाकी काम ठीक है. कानून-व्यवस्था को वह सही से संभाल रहे हैं. पटना में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए नीतीश कुमार ने यह कहकर डीजीपी का बचाव किया कि मात्र दो महीने डीजीपी को रिटायर होने में बचे हुए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही डीजीपी को एहसास हुआ कि दूसरी तरफ फर्जी आदमी है तो उन्होंने जांच का आदेश दे दिया.  

आपको बता दें कि गया के पूर्व एसएसपी और वर्तमान में पुलिस मुख्यालय में एआईजी (आई) के पद पर तैनात आदित्य कुमार के एक कथित दोस्त ने खुद को हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बताकर डीजीपी को फोन किया और शराबबंदी मामले में आदित्य कुमार को क्लीन चिट देने का दबाव डाला. इसके साथ ही उन्हें दोबारा जिले में पद देने का दबाव भी बनाया था.

 मामले में जांच के बाद इओयू ने उस फर्जी जज को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार व्यक्ति का नाम अभिषेक अग्रवाल है. अभिषेक के साथ तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है. अभिषेक अलग-अलग लोगों को अलग-अलग आदमी बनकर फोन करके काम निकलवाता था. अभिषेक कई बार गृह मंत्री का पीएस बनकर भी अफसरों को फोन करता था. अभिषेक की पहुंच बड़े-बड़े नेताओं के साथ-साथ कई अधिकारियों तक भी है.

2018 में भी पुलिस ने अभिषेक को  गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा था. इसके पहले 2014 में उसने बिहार के एक पुलिस अधीक्षक को भी ब्लैकमेल किया था. उस समय पुलिस अधीक्षक के पिता से मोटी रकम की भी वसूली की थी. इसके अलावे एक अन्य आईपीएस अफसर से भी दो लाख की ठगी में इसका नाम आया था. अभिषेक अग्रवाल पर बिहार में जालसाजी के कई मामले दर्ज है. भागलपुर में भी अभिषेक पर मामला दर्ज है.

आपको बता दें कि अभिषेक बड़े-बड़े अधिकारियों नेताओं के साथ फोटो खिंचाकर सोशल मीडिया पोस्ट करता था ताकि लोगों के बीच उसका रुतबा बना रहे. इस बार इसने फ्रॉड करने के लिए हाईकोर्ट के एक सीनियर जज के साथ तस्वीर खिंचाकर व्हाट्सऐप डीपी में लगाई थी. ताकि यह लगे कि वह भी कोई जज है. साथ ही फेसबुक पर बड़े नेता और अफसरों के साथ वह तस्वीरें लगाता था. जिस आईपीएस अफसर को बचाने के लिए वह डीजीपी को फोन किया करता था, उसे क्लीनचिट भी मिल गई है. उस आईपीएस अफसर के खिलाफ शराब के एक मामले में थाने में केस दर्ज हुआ था. 

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