'सुरक्षा से समझौता किया तो खैर नहीं', DGCA की एयरलाइंस को दोटूक, सेफ्टी के लिए उठाए ये 7 कदम

DGCA Safety Guidelines: सुरक्षा सुधार के लिए DGCA ने 7 कड़े नियम लागू किए हैं. अब पायलट का फैसला अंतिम होगा और सुरक्षा में चूक होने पर एयरलाइन प्रबंधन पर सीधी कार्रवाई की जाएगी.

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DGCA Safety Guidelines: देश में बढ़ती एविएशन घटनाओं और हादसों को देखते हुए डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने सख्त रुख अपनाया है. डीजीसीए ने सभी गैर-नियमित विमान संचालकों  के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग कर साफ कर दिया है कि सुरक्षा सबसे ऊपर रहनी चाहिए. साथ ही सेफ्टी स्टैंडर्ड पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति लागू करते हुए 7 नए बड़े कदम उठाए हैं.

डीजीसीए ने पिछले 10 सालों के विमान हादसों की स्टडी के बारे में बताया. रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर दुर्घटनाएं तकनीकी खराबी से ज्यादा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के उल्लंघन, उड़ान की खराब योजना और पायलटों की कम ट्रेनिंग की वजह से हुईं हैं.

अब तक चार्टर और VIP उड़ानों में अक्सर पायलटों पर समय पर पहुंचने का व्यावसायिक दबाव रहता था. लेकिन अब डीजीसीए ने साफ कहा कि अगर पायलट सुरक्षा कारणों से उड़ान रद्द करता है या मोड़ता है, तो उसका फैसला अंतिम होगा. ऐसे फैसले के लिए पायलट पर कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी.

सेफ्टी के लिए बनाएं 7 एसओपी

  • 1. सार्वजनिक जानकारी देना अनिवार्य

अब NSOP ऑपरेटरों को अपनी वेबसाइट पर विमान की उम्र, मेंटेनेंस हिस्ट्री और पायलटों के अनुभव का ब्योरा सार्वजनिक करना होगा.

  • 2. सभी गैर-नियमित ऑपरेटरों की सुरक्षा रैंकिंग होगी

अब आपकी एयरलाइन कितनी सेफ है, यह दुनिया देखेगी. DGCA सभी ऑपरेटरों की सेफ्टी रैंकिंग जारी करेगा.

  • 3. सघन और अचानक ऑडिट होगा 

कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर की रैंडम जांच होगी. फर्जी रिकॉर्ड उड़ानों पर लगाम कसने के लिए ईंधन और तकनीकी लॉग का मिलान किया जाएगा.

  • 4. प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी होगी 

सुरक्षा में चूक होने पर अब सिर्फ पायलट पर गाज नहीं गिरेगी, बल्कि कंपनी के टॉप अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

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  • 5. कड़ी सजा का प्रावधान होगा 

फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट  तोड़ने पर, सुरक्षित सीमा से नीचे लैंडिंग की कोशिश पर, पायलट का लाइसेंस 5 साल तक निलंबित हो सकता है

  • 6. विमान रखरखाव पर सख्त निगरानी होगी 

पुराने और मालिकाना हक बदलने वाले विमानों की खास जांच होगी. जिन कंपनियों के पास अपनी मेंटेनेंस सुविधा है, उनकी सख्ती से जांच होगी.

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  • 7. मौसम और प्रशिक्षण पर खास ज़ोर

डीजीसीए के अनुसार ज्यादातर मौसम से जुड़े हादसे मौसम की वजह से नहीं बल्कि गलत फैसलों की वजह से होते हैं. इसलिए ऑपरेटरों को रियल-टाइम मौसम जानकारी सिस्टम लगाना होगा.

'आसमान में लापरवाही की कोई जगह नहीं'

डीजीसीए ने बताया कि 2 मार्च से विशेष सुरक्षा ऑडिट का दूसरा चरण शुरू होगा. इसके बाद सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए एक वर्कशॉप भी आयोजित की जाएगी.डीजीसीए का संदेश साफ है, आसमान में लापरवाही की कोई जगह नहीं है.

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