'देवेगौड़ा जी ने मोहब्बत हमसे की और शादी मोदी जी के साथ कर ली', राज्यसभा में बोले खड़गे, PM भी न रोक सके हंसी

राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने विदाई भाषण में कहा कि विदाई का पल भावुक करने वाला होता है और सार्वजनिक जीवन में कोई भी नेता कभी रिटायर नहीं होता. उन्होंने वरिष्ठ सांसदों के अनुभव, 54 साल की अपनी सीख, देवगौड़ा, अठावले और साथियों के योगदान का जिक्र किया और कहा कि सदन में सहयोग और सभ्यता ही संसदीय व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं.

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  • खड़गे ने राज्यसभा में विदाई भाषण के दौरान 54 वर्षों के संसदीय अनुभव के बावजूद सीखने की आवश्यकता बताई.
  • खड़गे ने पूर्व PM एच.डी. देवेगौड़ा का उल्लेख करते हुए हल्के अंदाज में उनके राजनीतिक संबंधों का जिक्र किया.
  • उन्होंने रामदास अट्ठावले, शक्ति सिंह गोहिल, नीरज डांगी और फूलोदेवी नेताम सहित कई सहयोगियों की प्रशंसा की.
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नई दिल्ली:

राज्यसभा में विदाई भाषण के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भावुक हुए. उन्होंने कहा कि विदाई का जिक्र आते ही मन भारी हो जाता है और समझ नहीं आता कि बात कहां से शुरू करें. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाला व्यक्ति कभी रिटायर नहीं होता, न ही टायर्ड होता है.

'54 साल बाद भी सीखने की जरूरत महसूस होती है'

खड़गे ने बताया कि 54 साल के संसदीय अनुभव के बावजूद उन्हें आज भी सीखने की जरूरत महसूस होती है. उन्होंने कहा, 'हर आदमी संपूर्ण ज्ञानी नहीं होता. संसदीय जीवन में खट्टे-मीठे दोनों तरह के अनुभव होते हैं. जो साथी जा रहे हैं, उनमें से कई फिर लौटकर आएंगे और सदन को बेहतर बनाने में योगदान देंगे.'

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'देवगौड़ा जी ने मोहब्बत हमारे साथ की और शादी मोदी जी से कर ली'

खड़गे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का जिक्र करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, 'मैं 54 साल से देवगौड़ा जी को जानता हूं. पहले वे हमारे साथ थे, फिर पता नहीं क्या हुआ कि हमसे दूर हो गए. मोहब्बत हमारे साथ की और शादी मोदी जी से कर ली.' उनके इस भाषण पर सदन में हल्की मुस्कान देखने को मिली. पीएम मोदी भी इस दौरान हंसते नजर आए. 

अठावले से लेकर शक्ति सिंह गोहिल तक सभी का जिक्र

खड़गे ने कहा कि रामदास अट्ठावले अपनी खास शैली के लिए जाने जाते हैं और उनकी कविताएं अक्सर प्रधानमंत्री मोदी पर ही केंद्रित होती हैं. उन्होंने अपने सहयोगी शक्ति सिंह गोहिल और नीरज डांगी की भी भावुक होकर प्रशंसा की. खड़गे ने कहा, 'ज्वलंत मुद्दों पर उन्होंने पूरी तैयारी के साथ अपनी बात रखी. उनके जाने से सदन में एक खालीपन महसूस होगा.' उन्होंने फूलोदेवी नेताम पर भी भरोसा जताते हुए कहा कि वह कमजोर तबके की आवाज को आगे भी मजबूती से उठाती रहेंगी.

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'सदन में सभ्यता और सहयोग जरूरी'

खड़गे ने सदन की कार्यप्रणाली पर जोर देते हुए कहा, 'सदन को ऐसा सभापति मिले जो अच्छा व्यवहार और संयम बनाए रखे. हम जितना मिलकर काम करेंगे, उतना बेहतर होगा. दूरी बढ़ेगी तो गलतफहमी भी बढ़ेगी, और यह संसदीय प्रणाली के लिए अच्छा नहीं है.'

37 सांसदों का कार्यकाल समाप्त

बता दें कि राज्यसभा के 37 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है/ खड़गे ने उम्मीद जताई कि जाने वाले सदस्य भविष्य में भी संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे.

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