शेख हसीना के देश छोड़ने से कट्टरपंथियों को मिले अवसर... बांग्‍लादेश को लेकर बोले माइकल कुगेलमैन

दक्षिण एशिया मामलों के जानकार माइकल कुगेलमैन ने बांग्‍लादेश को लेकर कहा कि शेख हसीना के देश छोड़ने से कट्टरपंथियों को अवसर मिले हैं. साथ ही उन्‍होंने कहा कि संभव है कि भारत अगले चुनावों के बाद संबंधों को सुधारने के लिए ठोस प्रयास करेगा.

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  • भारत और बांग्लादेश के बीच शेख हसीना की उपस्थिति और कट्टरपंथियों के बढ़ते प्रभाव से तनाव बना हुआ है.
  • माइकल कुगेलमैन ने कहा कि शेख हसीना के देश छोड़ने से बांग्‍लादेश में कट्टरपंथियों को अधिक अवसर मिले हैं.
  • बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसे लेकर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है.
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वाशिंगटन:

दक्षिण एशिया मामलों के जानकार माइकल कुगेलमैन ने कहा कि भारत में शेख हसीना की उपस्थिति और पड़ोसी देश में कट्टरपंथियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंता के के कारण भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बना हुआ है. उन्होंने कहा कि शेख हसीना के देश छोड़ने से ऐसे राजनीतिक बदलाव हुए हैं, जिनसे कट्टरपंथियों को और अधिक अवसर मिले हैं. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ दिया था. साथ ही उन्होंने कहा कि संभव है कि भारत अगले चुनावों के बाद संबंधों को सुधारने के लिए ठोस प्रयास करेगा.

एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में कुगेलमैन ने कहा, "शेख हसीना की भारत में उपस्थिति बांग्लादेश की जनता और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के लिए बेहद चिंताजनक है. शेख हसीना के जाने से राजनीतिक बदलाव हुए हैं, जिससे कट्टरपंथियों को और अधिक अवसर मिले हैं. सबसे अच्‍छी स्थिति में इनमें से कई भारत की सरकार के प्रति आलोचनात्मक रुख रखते हैं और सबसे खराब हालत में शत्रुतापूर्ण रवैया रखते हैं. इन दो संवेदनशील मुद्दों पर वास्तव में ध्यान नहीं दिया गया है, जो दोनों सरकारों के बीच महत्वपूर्ण तनाव का एक मुख्य कारण रहा है, हालांकि बातचीत के प्रयास किए गए हैं."

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पूरी तरह से ठप नहीं हुए हैं संबंध: कुगेलमैन 

उन्होंने आगे कहा, "संबंध पूरी तरह से ठप नहीं हुए हैं. यह भारत-पाकिस्तान जैसे नहीं है, लेकिन भारतीय पक्ष में यह भावना है कि बांग्लादेश में चुनाव के बाद ही संबंधों को सुधारने के लिए स्पष्ट प्रयास करना बेहतर होगा."

हाल ही में बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं. ड्यूटी के दौरान एक हिंदू गारमेंट फैक्‍ट्री के सुरक्षा गार्ड 42 साल के बाजेंद्र बिस्वास की उसके सहकर्मी द्वारा हत्या कर दी. वहीं 27 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मयमनसिंह में बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिससे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.

दास को कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और बाद में 18 दिसंबर को उसके शव को जला दिया गया.

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अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ हिंसा से भारत चिंतित 

भारत ने बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई और बौद्ध सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बार-बार हो रही घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. सरकार ने कहा कि वह पड़ोसी देश में स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है.

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नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ जारी शत्रुता से भारत सरकार चिंतित है.

जायसवाल ने कहा, "ज्यादातर घटनाक्रमों पर भारत नजर रख रहा है और हिंदू, ईसाई और बौद्ध सहित अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी शत्रुता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं. हम मयमनसिंह में हाल ही में एक हिंदू युवक की हत्या की निंदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इस अपराध के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा."

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