मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना ने भी रफ्तार पकड़ ली है. इसमें लखनऊ से वाराणसी की यात्रा 1 घंटा 20 मिनट और वाराणसी से पटना की यात्रा 50 मिनट में होगी. लखनऊ से वाराणसी का सफर एक्सप्रेस ट्रेनों के जरिये पूरा करने में अभी 4 से 6 घंटे लगते हैं. लखनऊ से बनारस के बीच रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज होते हुए वाराणसी के मंडुआडीह स्टेशन पहुंचेंगे. प्रयागराज से वाराणसी की यात्रा सिर्फ 30 मिनट और प्रयागराज से लखनऊ सिर्फ 55 मिनट का रह जाएगा. ये दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की डीपीआर तैयार कर अंतिम मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा गया है. डीपीआर फाइनल होते ही भूमि अधिग्रहण का काम तेज होगा.
- 1.21 लाख करोड़ रुपये की लागत का अनुमान
- 865 किमी रूट दिल्ली से वाराणसी का
वाराणसी से पटना बुलेट ट्रेन रूट
बिहार और पूर्वांचल को जोड़ने के लिए दिल्ली-वाराणसी से आगे पटना-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर तक विस्तार करने की तैयारी है. बिहार में बक्सर, आरा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार में स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है.इससे वाराणसी से पटना 4-5 घंटे की जगह एक घंटे से भी कम वक्त में होगी. जबकि वाराणसी से दिल्ली की पूरी यात्रा बुलेट ट्रेन से 3 घंटे 50 मिनट में हो जाएगी. अभी दिल्ली से वाराणसी जाने में 11 से 12 घंटे लगते हैं. दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर 865 किलोमीटर लंबा होगा.इस रूट पर बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड 350 किमी प्रति घंटा और ऑपरेशनल स्पीड 320 किमी प्रति घंटा होगी.
लखनऊ और अयोध्या तक बुलेट ट्रेन कनेक्टिविटी
दिल्ली से लखनऊ की बुलेट ट्रेन यात्रा करीब 2 घंटे 10 मिनट में होगी. लखनऊ से अयोध्या के लिए 135 किलोमीटर लंबा लिंक भी प्रस्तावित है.इससे दिल्ली से अयोध्या की यात्रा बुलेट से ट्रेन सिर्फ 3 घंटे में पहुंच सकेंगे. यानी सुबह दिल्ली से अयोध्या जाकर राम मंदिर दर्शन कर शाम को वापस भी लौटा जा सकता है.
बुलेट ट्रेन का प्रस्तावित रूट
दिल्ली: हजरत निजामुद्दीन
नोएडा सेक्टर 146
जेवर एयरपोर्ट नोएडा
मथुरा
आगरा
फिरोजाबाद
इटावा
कन्नौज
लखनऊ
रायबरेली
प्रयागराज
भदोही
वाराणसी: मंडुआडीह
नोएडा-यमुना एक्सप्रेसवे पर 3 स्टेशन पर विचार
नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में कुल तीन स्टेशन बनाने की योजना पर मंथन हो रहा है.इसमें नोएडा एयरपोर्ट के पास भूमिगत स्टेशन होगा.इसके लिए करीब 8.8 किमी का ट्रैक अंडरग्राउंड होगा. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने डीपीआर तैयार करके समीक्षा और आखिरी मंजूरी के लिए रेल मंत्रालय को भेजा गया है.इस हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का ग्राउंड और एरियल LiDAR सर्वे हो चुका है. भूमि अधिग्रहण के तौर-तरीके और तकनीकी समीक्षा पर काम चल रहा है.
बुलेट ट्रेन का एलिवेटेड कॉरिडोर
बुलेट ट्रेन का ये कॉरिडोर ज्यादातर एलिवेटेड रहेगा ताकि जमीन की जरूरत कम से कम हो और सुरक्षा भी पुख्ता रहे. केंद्र सरकार से मंजूरी और भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से होता है तो 2027-28 तक निर्माण शुरू होने की उम्मीद है. इस कॉरिडोर को 2031 तक शुरू करने का लक्ष्य है. हालांकि यूपी के सघन आबादी वाले इलाकों से गुजरने के कारण भूमि अधिग्रहण में देरी हो सकती है. लेकिन मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की तरह यहां नदियों पर ज्यादा पुल, सुरंगे आदि बनाने की जरूरत शायद न पड़े.