- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार युवकों को गिरफ्तार किया, जो महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से जुड़े थे
- आरोपी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और गजवा-ए-हिंद जैसे खतरनाक नैरेटिव को बढ़ावा दे रहे थे
- सोशल मीडिया के क्लोज्ड ग्रुप्स के जरिए जिहाद और हथियारों से जुड़ी चर्चाएं और भड़काने का काम किया जाता था
Delhi Terror Module Bust: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकी साजिश का नाकाम किया है. चार युवकों को गिरफ्तार किया है, जो आरोपी महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार जैसे अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं.
कट्टरपंथी सोच और खतरनाक एजेंडा
दिल्ली पुलिस के अनुसार, ये युवक कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और नफरत फैलाने के मकसद से काम कर रहे थे. ये ‘गजवा-ए-हिंद' जैसे खतरनाक नैरेटिव को बढ़ावा दे रहे थे और अन्य लोगों को भी इसके लिए उकसा रहे थे.
सोशल मीडिया के गुप्त ग्रुप्स से जुड़ा नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया के क्लोज्ड ग्रुप्स के जरिए जुड़े हुए थे. इन प्लेटफॉर्म्स पर आतंकी विचारधारा, जिहाद और हथियारों से जुड़ी चर्चाएं होती थीं. इन्हीं ग्रुप्स के जरिए नए लोगों को जोड़ने और उन्हें भड़काने का काम किया जा रहा था.
IED बनाने की साजिश का खुलासा
पुलिस के मुताबिक, दो आरोपी मिलकर रिमोट कंट्रोल IED (बम) बनाने की तैयारी कर रहे थे. इसके लिए बॉल बेयरिंग, कील और खिलौना कार जैसे सामान जुटा लिए गए थे. छापेमारी में ये सभी सामग्री और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं.
दिल्ली के अहम ठिकानों की रेकी
जांच में यह भी सामने आया कि एक आरोपी ने दिसंबर 2025 में दिल्ली आकर लाल किला और इंडिया गेट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी की थी. उसने सोशल मीडिया पर इन स्थानों की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक पोस्ट भी शेयर किए थे. गिरफ्तार आरोपियों में से एक सोशल मीडिया के जरिए क्राउड फंडिंग कर रहा था, जबकि दूसरा लोगों को हथियार चलाने और ट्रेनिंग दिलाने का झांसा देकर पैसे जुटा रहा था.
साधारण परिवार, लेकिन खतरनाक रास्ता
चारों आरोपी साधारण परिवारों से आते हैं और ज्यादातर 10वीं तक शिक्षित हैं. कोई मैकेनिक, कोई सिक्योरिटी गार्ड और कोई प्लंबर का काम करता था. हालांकि, सोशल मीडिया और कट्टरपंथी भाषणों के प्रभाव में आकर ये गलत दिशा में चले गए. पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच जारी है.
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