Delhi New Semiconductor Policy: दिल्ली सरकार अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है. राजधानी को सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है. चिप डिजाइन, रिसर्च और उससे जुड़े क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार एक नई सेमीकंडक्टर पॉलिसी लाने पर काम कर रही है. इसका साफ मकसद है नौकरियां पैदा करना, निवेश आकर्षित करना और भारत के चिप इकोसिस्टम को मजबूत करना.
सेमीकंडक्टर की दौड़ में दिल्ली की एंट्री
दिल्ली अब देश के सेमीकंडक्टर पुश का हिस्सा बनने जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित “दिल्ली सेमीकंडक्टर पॉलिसी” को केंद्र सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन से जोड़ा जाएगा. भारत आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है और ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में दिल्ली की यह पहल अहम मानी जा रही है.
मुख्यमंत्री का विजन
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सेमीकंडक्टर आज सिर्फ कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिफेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल और कई अहम सेक्टर की रीढ़ हैं. उनका कहना है कि दिल्ली एक ऐसे सुव्यवस्थित और भविष्य को ध्यान में रखकर बने फ्रेमवर्क पर काम कर रही है, जो इनोवेशन, बिज़नेस में आसानी और मजबूत इंडस्ट्री इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा.
यह कदम क्यों है इतना अहम?
सेमीकंडक्टर आज की आधुनिक अर्थव्यवस्था की बुनियाद हैं. मोबाइल फोन, कार, अस्पतालों के उपकरण, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और सैटेलाइट—लगभग हर जगह चिप्स का इस्तेमाल होता है. कोविड-19 महामारी के दौरान आई सप्लाई चेन की दिक्कतों ने यह साफ कर दिया था कि दुनिया किस हद तक कुछ चुनिंदा देशों जैसे ताइवान, साउथ कोरिया, जापान, चीन और अमेरिका पर निर्भर है. इसी अनुभव के बाद भारत ने इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने की रफ्तार तेज की है.
फैब्रिकेशन नहीं, डिजाइन और रिसर्च पर फोकस
जहां कई राज्य बड़े फैब प्लांट लगाने पर जोर दे रहे हैं, वहीं दिल्ली का फोकस थोड़ा अलग है. सरकार चिप फैब्रिकेशन की बजाय डिजाइन, रिसर्च और टैलेंट बेस को मजबूत करना चाहती है. अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली के पास पहले से ही स्किल्ड मैनपावर और रिसर्च से जुड़ा अच्छा इकोसिस्टम मौजूद है, जिसे और बेहतर बनाया जाएगा.
पॉलिसी में क्या-क्या होगा शामिल?
प्रस्तावित पॉलिसी में सेमीकंडक्टर डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, रिसर्च और इनोवेशन, और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सेगमेंट जैसे ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) और OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग) शामिल किए जाएंगे. इसके साथ ही स्टार्टअप्स को भी खास सपोर्ट देने की योजना है. सरकार का लक्ष्य फैबलेस कंपनियों, नए स्टार्टअप्स और भारत में विस्तार करने वाली ग्लोबल फर्मों को दिल्ली की ओर आकर्षित करना है.
इनसेंटिव्स पर भी हो रहा है मंथन
पॉलिसी के तहत फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल दोनों तरह के इंसेंटिव्स पर विचार किया जा रहा है. इसमें कैपिटल सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और ऑपरेशनल कॉस्ट घटाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी योजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ पूरी तरह अलाइन होगी, ताकि किसी तरह का ओवरलैप न हो और निवेशकों का भरोसा बना रहे.
नौकरियों और स्किल डेवलपमेंट पर जोर
सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर रिसर्च और एडवांस्ड पैकेजिंग से जुड़े क्षेत्रों में नए रोजगार पैदा होंगे. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स बनाने पर खास ध्यान दिया जाएगा. इसके लिए स्किलिंग प्रोग्राम, इंडस्ट्री और शिक्षा संस्थानों के बीच साझेदारी और टारगेटेड ट्रेनिंग की योजना बनाई जा रही है.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर आर्थिक मजबूती के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है. भारत का लक्ष्य है कि 2029 तक अपनी कुल सेमीकंडक्टर मांग का 70–75 फीसदी देश में ही पूरा किया जाए. इस दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और अब दिल्ली भी इस वैल्यू चेन में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है.














