दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी शिफा उर रहमान, मीरान हैदर, मोहम्मद सलीम खान और गुलफिशा फातिमा की रिहाई हो गई है. कोर्ट ने उनकी रिहाई के आदेश जारी किए थे, लेकिन मुख्य आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था. तिहाड़ जेल से बाहर आते हुए उनकी तस्वीरें सामने आईं. संशोधित नागरिकता कानून विरोधी प्रदर्शनों औऱ दिल्ली दंगों के मामले में इन पर क्या आरोप हैं, आइए जानते हैं...
गुलफिशा फातिमा
दिल्ली निवासी गुलफिशा फातिमा एमबीए ग्रेजुएट है और वो दंगे से जुड़ी बड़ी साजिश के केस में आरोपी एकमात्र महिला है. जाफराबाद पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ मर्डर, दंगा, राजद्रोह जैसे गंभीर अपराधों में केस दर्ज हैं. उसे कई मामलों में पहले जमानत मिली थी, लेकिन यूएपीए के तहत दर्ज केस में बेल नहीं मिली थी.
Gulshan Fatima
आरोपों के अनुसार, फातिमा मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ जामिया से जुड़ी थी और सीएए से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा था.आरोपों के मुताबिक, 23 फरवरी 2020 को गुलफिशा और अन्य आरोपियों ने सीलमपुर, जाफराबाद में सैकड़ों महिलाओं को जुटाया और फिर जाफराबाद मेट्रो स्टेशन का रास्ता जाम कर दिया.मिर्च स्प्रे, पत्थरबाजी के लिए भीड़ को उकसाया.
मीरान हैदर जामिया से जुड़ा
बिहार के सीवान जिले का रहने वाला मीरान हैदर अप्रैल 2020 में गिरफ्तार हुआ था. जामिया मिलिया इस्लामिया का छात्र मीरान राजद की दिल्ली शाखा से भी जुड़ा था.
शिफा उर रहमान मेरठ का रहने वाला
शिफा उर रहमान यूपी के मेरठ जिले का रहने वाला है. उसने 1999 में बीबीए और 2001 में जामिया मिलिया इस्लामिया से एमकॉम किया. वो 26 अप्रैल 2020 को गिरफ्तारी के वक्त जामिया का पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष था. उसे उत्तर पूर्वी दिल्ली केस में शरजील इमाम और उमर खालिद की साजिश से जुड़ा बताया है.आरोपियों को 1.60 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलने का भी आरोप है.
सलीम खान पर भड़काऊ भाषण का आरोप
50 साल का सलीम खान दिल्ली के चांदबाग इलाके का रहने वाला था. वो बिजनेसमैन के साथ द केयर सोसायटी का प्रमुख है. उसने दिल्ली हाईकोर्ट में 2025 में जमानत की अर्जी दी थी. आरोपों के अनुसार, खान चांद बाग सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भड़काऊ भाषण दिया था.मुस्लिम समुदायों को उकसाया गया.














