मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में शनिवार को कथित तौर पर कुछ प्रदर्शनकारियों के गुरुद्वारा बंगला साहिब में शरण लेने को लेकर विवाद खड़ा हो गया. इस दौरान एक और भी वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिसकर्मी सिख धर्मस्थल के रास्ते पर जूते पहने हुए नजर आए. इससे अनादर के आरोप लगे और राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई. घटना को लेकर डीसीपी ने स्पष्टीकरण भी जारी किया.
वीडियो क्लिप में वर्दी पहने कई अधिकारी गुरुद्वारा परिसर के रास्ते से गुजरते हुए दिख रहे हैं, जिनमें से कुछ ने जूते पहने हुए हैं. विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस ने सिख धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किए बिना धर्मस्थल में प्रवेश किया? रीति-रिवाजों के अनुसार, प्रार्थना क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले आगंतुकों को अपने जूते उतारने और सिर ढकने होते हैं.
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने 'X' पर लिखा, "क्या पुलिस आज गुरुद्वारा बंगला साहिब में दाखिल हुई? क्या बीजेपी सरकार होश खो बैठी है? वे जूते पहने हुए हैं और उन्होंने सिर नहीं ढका है."
दिल्ली पुलिस ने इस पर अपना स्पष्टीकरण दिया. नई दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस ने कहा कि वीडियो में पुलिसकर्मी उस आम रास्ते से गुज़रते हुए दिख रहे हैं, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु गुरुद्वारे में घुसने से पहले जूते उतारने वाली जगह तक पहुंचने के लिए करते हैं. पुलिस ने रास्ता दिखाने को लेकर एक और वीडियो जारी करते हुए कहा कि यही नियम हर आने-जाने वाले पर लागू होता है.
पुलिस का आरोप है कि यह फ़ुटेज 'जानबूझकर और बुरी नीयत से' फैलाया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता है. बयान में कहा गया कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है. इस स्पष्टीकरण में यह तो बताया गया कि पुलिसकर्मी रास्ते में जूते क्यों पहने हुए थे, लेकिन इस आरोप का कोई खास जवाब नहीं दिया गया कि कुछ अधिकारियों ने अपने सिर नहीं ढके थे.
इस वीडियो की दूसरे विपक्षी नेताओं ने भी आलोचना की. AAP के पंजाब नेता अमन अरोड़ा ने आरोप लगाया कि पुलिस 'जूते पहने और हाथों में लाठियां लिए' गुरुद्वारे में घुसी थी. उन्होंने दावा किया कि युवा प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारे के धार्मिक नियमों का सम्मान करते हुए वहां शरण ली थी.
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी पुलिस पर निशाना साधा. उन्होंने X पर लिखा, "भारत में कोई भी सरकार गुरुद्वारे में पुलिस भेजने के बाद टिकी नहीं रह पाई है." उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को शरण लेने से रोकने की कोशिश की थी.
वहीं पंजाब कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि निशान साहिब (गुरुद्वारों में फहराया जाने वाला सिख झंडा) शरण का प्रतीक है. उन्होंने इसे बीजेपी सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों को शरण लेने से रोकने की कोशिश बताया.
इधर दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) के प्रेसिडेंट हरमीत सिंह कालका ने एक अलग सवाल उठाया- प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे के अंदर क्या कर रहे थे? उन्होंने एक अलग वीडियो का ज़िक्र किया, जिसमें उनके आरोप के मुताबिक, प्रदर्शनकारी परिसर में प्लेकार्ड लिए हुए और नारे लगाते हुए दिख रहे थे. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने हॉल में जबरदस्ती घुसने की कोशिश भी की थी.
हरमीत सिंह कालका ने कहा, "आम आदमी पार्टी के नेता आज दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर गंदी राजनीति कर रहे हैं. वे अब गुरुद्वारों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे सभी के लिए खुले हैं, चाहे उनका बैकग्राउंड कुछ भी हो, लेकिन उनके परिसर को विरोध प्रदर्शन की जगह नहीं बनाया जा सकता.
उन्होंने कहा, "गुरुद्वारा समाज के हर वर्ग के लोगों के लिए खुला है और सभी की समान रूप से सेवा की जाती है. लेकिन प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे के परिसर में घुस आए और हॉल में ज़बरदस्ती घुसने की कोशिश की. यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है." हरमीत सिंह कालका ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस के परिसर में घुसने पर हो रही आलोचना पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा, "अगर प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे में घुस जाते हैं और उन्हें हटाने के लिए पुलिस को आना पड़ता है, तो और क्या विकल्प है?"
उन्होंने कहा कि खाना या आश्रय चाहने वाले लोगों का हमेशा स्वागत है, लेकिन गुरुद्वारे के अंदर राजनीतिक प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी.
सिरसा ने केजरीवाल पर निशाना साधा, पुलिस की तारीफ की
वहीं दिल्ली के मंत्री और बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा भी इस बहस में शामिल हुए और अरविंद केजरीवाल से जुड़े लोगों पर धार्मिक स्थल पर राजनीतिक नारे लगाने का आरोप लगाया. एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रार्थना, सेवा और सिख धार्मिक परंपराओं के लिए एक पवित्र स्थान है, न कि राजनीतिक लड़ाई का मैदान. उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और इस कथित व्यवहार का समर्थन करने वाले अन्य नेताओं से बिना शर्त माफ़ी की मांग की.
एक अन्य पोस्ट में, सिरसा ने कांग्रेस, AAP और वामपंथी समूहों पर व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया. उन्होंने संयम बरतने के लिए पुलिस की तारीफ की और दावा किया कि उनकी कार्रवाई से हिंसा टल गई.
विरोध प्रदर्शन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने बुलाया है. इसमें मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहा है. पुलिस ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित सभा की अनुमति नहीं दी और पूरी दिल्ली में सुरक्षा अभियान चलाया. 2,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. वहीं चुनाव आयोग और बीजेपी ने वोटर-लिस्ट की प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया है.
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