- इस गिरोह के छह आरोपी अलग-अलग राज्यों में सक्रिय थे और नेटवर्क का संचालन विदेशों से किया जा रहा था
- रियल एस्टेट कारोबारी कृष्ण कुमार की शिकायत पर 3 करोड़ 76 लाख रुपये की ठगी का मामला उजागर हुआ था
- पुलिस ने 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं और पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड व अन्य साथियों की तलाश जारी है
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की IFSO यूनिट ने स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अलग-अलग राज्यों में रहकर काम कर रहे थे. जबकि पूरे नेटवर्क को दूसरे देशों से ऑपरेट किया जा रहा था. पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है. साथ ही पुलिस भारत में इस गिरोह के अन्य सदस्यों की भी तलाश कर रही है.
3.76 करोड़ रुपये की ठगी से खुला मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले का खुलासा तब हुआ जब रियल एस्टेट कारोबारी कृष्ण कुमार ने शिकायत दी कि उनसे ऑनलाइन स्टॉक मार्केट में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर करीब 3 करोड़ 76 लाख रुपये की ठगी की गई. शुरुआत में अच्छे रिटर्न का भरोसा दिलाया गया, लेकिन बाद में न तो पैसा वापस मिला और न ही कोई लाभ. इसके बाद पीड़ित ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया.
ई-एफआईआर दर्ज, जांच IFSO यूनिट को सौंपी गई
शिकायत के आधार पर स्पेशल सेल थाने में ई-एफआईआर नंबर दर्ज की गई. केस दर्ज होते ही जांच की जिम्मेदारी IFSO यूनिट को सौंपी गई, जिसने बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और मोबाइल डेटा की तकनीकी जांच शुरू की.
मुंबई से कोटा तक पीछा, पहला आरोपी गिरफ्तार
जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम में से 10 लाख रुपये एक म्यूल बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे. यह खाता आरोपी सब्लू कुमार के नाम पर था. पुलिस ने पहले मुंबई में तलाश की, लेकिन तकनीकी सर्विलांस से उसकी लोकेशन कोटा, राजस्थान में मिली, जहां से उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
दिल्ली में छापेमारी,चार और आरोपी दबोचे गए
सब्लू कुमार से पूछताछ के बाद वसीम अहमद का नाम सामने आया. उसकी लोकेशन दिल्ली के जंगपुरा इलाके में मिली. इसके बाद पुलिस ने छापा मारकर वसीम अहमद के साथ उसके तीन साथियों राजेश खान, साहिद अली और मन्नू इस्सर को भी गिरफ्तार कर लिया.
मनीष कुमार की गिरफ्तारी, कई राज्यों से जुड़े तार
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने मनीष कुमार को भी गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक उसके व्हाट्सएप चैट्स और डिजिटल रिकॉर्ड से देश के कई राज्यों में दर्ज 52 साइबर शिकायतों से उसके लिंक मिले हैं, जिससे यह साफ होता है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था.
ऐसे दिया जाता था ठगी को अंजाम
आरोपी फर्जी स्टॉक मार्केट ऐप, नकली निवेश प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप ग्रुप और म्यूल बैंक खातों के जरिए लोगों को फंसाते थे. ठगी की रकम अलग-अलग खातों में घुमा कर पैसे का ट्रेल छिपाया जाता था. जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह को विदेश में बैठे साइबर अपराधी निर्देश दे रहे थे.पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं. फॉरेंसिक जांच में कई फर्जी बैंक खातों, चैट्स और लेन-देन से जुड़े अहम सबूत मिले हैं, जो पूरे नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं.दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामला गंभीर, संगठित और कई राज्यों में फैला हुआ है. फिलहाल पैसे के पूरे लेन-देन, अन्य साथियों और विदेश में बैठे मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच जारी है.
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