20 हजार ई सिम, पाकिस्तान समेत 5 देशों में नेटवर्क, दिल्ली में 100 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी के जाल का भंडाफोड़

दिल्‍ली पुलिस ने एक इंटरनेशनल साइबर क्राइम गिरोह का भंडाफोड़ किया है. करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके इस गिरोह के तार चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान तक फैले हुए थे.

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  • दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम गिरोह का पर्दाफाश किया, जिसके तार चीन, नेपाल, पाकिस्तान तक फैले थे
  • गिरोह ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट घोटालों में लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की
  • आरोपी लोगों को धमकाकर आतंकवाद से जुड़े होने का झूठा आरोप लगाकर उनसे वसूली करते थे
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नई दिल्‍ली:

दिल्ली पुलिस की IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस) यूनिट ने शुक्रवार को 'अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क' के जरिए एक्टिव एक इंटरनेशनल साइबर क्राइम गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस गिरोह के तार चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान तक फैले हुए थे. ये गिरोह बड़े लेवल पर ऑनलाइन धोखाधड़ी और तथाकथित 'डिजिटल अरेस्‍ट' घोटालों में कथित तौर पर शामिल था. अधिकारियों का अनुमान है कि इस गिरोह ने अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये ठगे हैं. अब तक 20,000 ई-सिम और 120 फिजिकल सिम कार्ड जब्त किए गए हैं. 

IFSO के डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि ये गिरोह लोगों को फंसाने के लिए डराने-धमकाने की रणनीति अपनाता था और झूठा दावा करता था कि उनके फोन नंबर आतंकी फंडिंग या आतंकी हमलों से जुड़े हैं. जांचकर्ताओं ने खुलासा किया कि गिरोह ने दिल्ली विस्फोट और पहलगाम हमले जैसी घटनाओं के बाद लोगों के डर का फायदा उठाया और इन घटनाओं का इस्तेमाल पीड़ितों को धमकाने और उनसे जबरन वसूली करने के लिए किया.

दिल्ली, मोहाली और मुंबई से सिम बॉक्स बरामद

गिरोह के अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवानी नागरिक भी शामिल है. दिल्ली, मोहाली और मुंबई से सिम बॉक्स बरामद किए गए हैं. सिम बॉक्स एक ऐसा डिवाइज है, जो कई फिजिकल सिम या ई-सिम को दूर से इस्‍तेमाल करने की सुविधा देता है और साइबर धोखाधड़ी में कॉल के सोर्स को छिपाने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है. पुलिस के अनुसार, लगभग 25 अधिकारियों की एक टीम ने भारतीय एजेंसियों, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और दूरसंचार विभाग (DoT) की सहायता से ज्‍वॉइंट ऑपरेशन चलाया. इसके बाद गिरोह को पकड़ा गया. 

कैसे हुआ गिरोह का भंडाफोड़? 
 

साइबर अपराधियों के गिरोह का भंडाफोड़ शशि प्रसाद की गिरफ्तारी से शुरू हुई, जिसने डिवाइज रखने के लिए एक कमरा किराए पर लिया था. उससे पूछताछ के बाद पुलिस परमिंदर सिंह तक पहुंची. दोनों ड्राइवर के रूप में काम करते थे और कथित तौर पर दोनों की कमाई 1 लाख रुपये से अधिक थी. आगे की जांच में ताइवान के नागरिक त्सुंग चेन का पता चला, जिसने कथित तौर पर दिल्ली और मोहाली में सिम बॉक्स का इस्‍तेमाल किया था.

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गिरोह का मास्‍टरमाइंड पाकिस्‍तानी

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि इस गिरोह का मास्‍टरमाइंड एक पाकिस्तानी हैंडलर है. मोहाली से बरामद एक सिम कार्ड का आईएमईआई पाकिस्तानी सिम कंपनी फेमा से जुड़ा हुआ था. कोयंबटूर में भी अतिरिक्त गिरफ्तारियां की गईं, जहां एक और सिम बॉक्स लगा हुआ पाया गया. इससे पहले, तमिलनाडु पुलिस ने दिल्ली के निहाल विहार और नरेला से भी इसी तरह के उपकरण बरामद किए थे, जिससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि गिरोह के तार देश में कहां-कहां जुड़े हुए थे.

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100 करोड़ की ठगी, 20,000 ई-सिम जब्‍त 

गिरफ्तार किए गए लोगों में शशि प्रसाद (33), परमिंदर सिंह (38), त्सुंग चेन (ताइवानी नागरिक), सरबजीत सिंह, जसप्रीत कौर (28, मोहाली), दिनेश (कोयंबटूर) और अब्दुल सलाह शामिल हैं, जिनके पास सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा है. पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों को तकनीकी जानकारी थी. अधिकारियों का अनुमान है कि इस गिरोह ने अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये ठगे हैं. अब तक 20,000 ई-सिम और 120 फिजिकल सिम कार्ड जब्त किए गए हैं. 

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