मौत सामने थी और बेटी को बचाने के लिए तीसरी मंजिल से कूद गया पिता, पालम अग्निकांड की ये कहानी रुला देगी

दिल्ली के पालम में भीषण आग ने एक ही परिवार की 9 जिंदगियां छीनीं. मासूम बेटी को बचाने के लिए पिता ने तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी. वहीं बेबस पड़ोसियों ने परिवार की जान बचाने के लिए हथौड़ों से दीवारें तोड़ीं.

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  • दिल्ली के पालम इलाके में पांच मंजिला इमारत में लगी आग से एक परिवार के 9 सदस्यों की मौत हो गई
  • आग के दौरान एक पिता ने अपनी डेढ़ साल की बेटी को बचाने के लिए तीसरी मंजिल से छलांग लगाई
  • पड़ोसियों ने आग बुझाने के लिए दीवार तोड़ने की कोशिश की, लेकिन जहरीले धुएं के कारण अंदर जाना असंभव था
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राजधानी दिल्ली का पालम इलाका बुधवार को उस वक्त चीख-पुकार और बेबसी से गूंज उठा, जब एक पांच मंजिला इमारत में भीषण आग ने एक ही हंसते-खेलते परिवार के 9 लोगों की जान ले ली. लेकिन इस मौत के तांडव के बीच एक पिता की अपनी बच्ची को बचाने की जद्दोजहद की कहानी सामने आई है. जब पांच मंजिला इमारत में आग की लपटें बढ़ रहीं थीं, तब एक पिता ने अपनी मासूम बेटी को सीने से चिपकाया और सीढ़ी से नीचे उतारने की कोशिश की. लेकिन बेटी हाथ से फिसल गई. इसके बाद पिता ने भी तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी. इसके अलावा मौके पर फायर बिग्रेड की टीम के पहुंचने से पहले पड़ोसी परिवार को बचाने के लिए आगे आए और हथोड़े की मदद से दीवार तोड़ने लगे. अपनों को खोने का गम और सिस्टम की देरी के बीच, इस मंजर ने एक ऐसी तस्वीर छोड़ी है जिसे दिल्ली कभी नहीं भूल पाएगी.

बेटी को बचाने के लिए पिता का 'सुपरहीरो' अवतार

इमारत की तीसरी मंजिल पर आग की लपटें तेजी से फैल रही थीं. इसी मंजिल पर 32 साल के अनिल और उनकी डेढ़ साल की मासूम बेटी मौजूद थे. नीचे रेस्क्यू के लिए लगाई गई सीढ़ी केवल दूसरी मंजिल तक ही पहुंच पा रही थी. जब आग ने विकराल रूप ले लिया और मौत सामने खड़ी दिखी, तो एक पिता ने अपनी बच्ची को मौत के मुंह से निकालने का आखिरी और सबसे खौफनाक फैसला लिया. 

अनिल ने अपनी डेढ़ साल की बेटी को सीने से लगाकर नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन इस अफरा-तफरी में बच्ची उनके हाथ से फिसल गई. अनिल ने इस उम्मीद में बच्ची को नीचे की ओर फेंका था कि कोई उसे लपक लेगा, लेकिन नीचे ना तो कोई कुशन था और ना ही कोई सेफ्टी नेट.बच्ची सीधे जमीन पर जा गिरी, जिससे उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गए. अपनी बेटी को गिरता देख, हताश पिता अनिल ने भी तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी.वह नीचे खड़ी एक गाड़ी से जा टकराए, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं. फिलहाल, पिता और बेटी दोनों सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं.

Delhi Palam Fire

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पड़ोसियों ने लगा दी जान की बाजी, हथौड़ों से तोड़ डाली दीवारें

जब यह परिवार अंदर मौत से जूझ रहा था, तो बाहर पड़ोसी भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे थे. सुबह करीब 6:30 बजे जैसे ही आग का पता चला, पड़ोसियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया. पास ही में कपड़ों की दुकान चलाने वाले रघुनंदन शर्मा और अन्य लोग तुरंत बगल वाली इमारत की छत पर चढ़ गए. अंदर से आ रही परिवार की चीखों को सुनकर पड़ोसियों ने हथौड़े लिए और दोनों इमारतों के बीच की दीवार को तोड़ना शुरू कर दिया. वे किसी भी तरह दीवार तोड़कर अंदर फंसे लोगों को निकालना चाहते थे.

एक चश्मदीद पड़ोसी ने अपनी बेबसी बयां करते हुए बताया, 'हमने मिलकर दीवार का एक हिस्सा तोड़ भी दिया था, लेकिन अंदर से आ रहा धुआं इतना घना और जहरीला था कि अंदर एक कदम रखना भी नामुमकिन हो गया. 

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सिस्टम की नाकामी और एक हंसते-खेलते परिवार का अंत

यह दर्द और भी गहरा हो जाता है जब पता चलता है कि शायद कुछ और जानें बचाई जा सकती थीं. मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि जब दमकल विभाग की गाड़ियां पहुंचीं, तो उनकी हाइड्रोलिक मशीन और प्रेशर सिस्टम ने काम ही नहीं किया. करीब 45-50 मिनट तक लोग सिस्टम की इस नाकामी के कारण अपनों को जलता हुआ देखने को मजबूर रहे.

इमारत के ग्राउंड और पहली मंजिल पर कपड़ों और कॉस्मेटिक्स का शोरूम था, जिसकी वजह से आग बेहद तेजी से फैली. ऊपर की मंजिलों पर शोरूम के मालिक और मार्केट प्रेसिडेंट राजिंदर कश्यप का परिवार रहता था.

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