गेट मत खोलना और दरवाजे पर आई मौत की खबर, डिलीवरी बॉय को खोने वाली मां बोली- कमाने लगा तो भगवान ने छीन लिया

25 साल का हेम शंकर एक क्विक‑कॉमर्स कंपनी में डिलीवरी एग्जिक्यूटिव के रूप में काम करता था और घटना के समय इलेक्ट्रिक स्कूटी चला रहा था. मां ने एनडीटीवी से खास बातचीत में अपना सारा दुख बयां कर दिया.

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  • दिल्ली के नजफगढ़ में तेज रफ्तार कार की टक्कर से 25 वर्षीय डिलीवरी बॉय हेम शंकर की दर्दनाक मौत
  • हेम शंकर घर का इकलौता कमाने वाला था जो क्विक-कॉमर्स कंपनी में डिलीवरी एग्जिक्यूटिव के रूप में काम करता था
  • मां रुक्मिणी ने बताया कि बेटे ने अपनी कमाई से परिवार की आर्थिक मदद की और मां का काम छुड़वाया था
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नई दिल्ली:

घरों में झाड़ू पोछा करती थी...बर्तन मांजकर बच्चों को बड़ा किया... जब बैठकर खाने की बारी आई तो कमाने वाला ही चला गया... ये दुखभरे शब्द उस मां के हैं जिसने बीते दिन एक एक्सीडेंट में अपन बेटा खो दिया. दिल्ली के नजफगढ़ में एक तेज रफ्तार कार ने डिलीवरी बॉय को अपना शिकार बना लिया औ उसकी मौत हो गई. 25 साल के नौजवान की ऐसी मौत घरवालों को भी परेशान कर रही है. मां करे तो आंसू नहीं रुक रहे हैं. आरोपी हिरासत में है पर हादसे में जान गंवाने वाले नौजवान के परिवार के लिए तो घर का चिराग ही बुझ गया. 

घर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं 

हेम शंकर घर का इकलौता कमाने वाला था. मौत से उनकी मां रुक्मिणी बेहद सदमे में हैं. उनके पति की 12 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी. 25 साल का  हेम शंकर एक क्विक‑कॉमर्स कंपनी में डिलीवरी एग्जिक्यूटिव के रूप में काम करता था और घटना के समय इलेक्ट्रिक स्कूटी चला रहा था. मां ने एनडीटीवी से खास बातचीत में अपना सारा दुख बयां कर दिया.मां ने कहा कि जब तीनों बेटे उनके छोटे-छोटे थे तो घरों में बर्तन मांजकर, झाड़ू पोछा लगाकर उन सबको पाल पोसकर बड़ा किया.अब वह कमाने लगा तो भगवान ने उसे मुझसे छीन लिया.अब तो हमारा परिवार भूखे मारेगा, क्यूंकि बड़े के पास काम नहीं है, छोटा अभी स्कूल में ही पढ़ाई कर रहा है. हेम शंकर ही था जो शाम 6:00 से सुबह 5:00 की ड्यूटी करता था और पूरा परिवार वही चला रहा था.

बोल गया था- दरवाजा मत खोलना 

मां ने आगे बताया कि वह शुक्रवार शाम को बताकर गया था, कि मेरे बाद कोई भी आए तो दरवाजा मत खोलना, क्योंकि समय खराब चल रहा है.शनिवार सुबह जब दो-तीन लड़के दरवाजा खुलवाने के लिए आए तो मैंने मना कर दिया, लेकिन जब उन्होंने बोला कि हेम का एक्सीडेंट हो गया है, चोट लगी है.तब मैंने दरवाजा खोला.अस्पताल पहुंची तो पता चला मेरा बेटा अब मेरे बीच नहीं है.  मां ने दुखभरे स्वर में कहा कि जब हेमशंकर कमाने लगा तो उसने सबसे पहले मेरा काम छुड़वाया.बोला अब तू काम मत कर. मां को ठीक से दिखता नहीं था, उसने हाल में अपनी मां की आंख भी ठीक करवाई थी. उस बच्चे में कोई ऐब नहीं था, अब उसकी मां आराम से घर बैठती तो भगवान ने उसे छीन लिया.

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बड़ा भाई था शादी फंक्शन में, तब आई छोटे भाई के एक्सीडेंट की कॉल

शनिवार तड़के जिस समय हेम शंकर की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हुई. उस समय उनका बड़ा भाई देवेंद्र शादी के एक फंक्शन को अटेंड कर रहे थे. उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि सुबह 3:20 बजे पर मेरे भाई के फोन से ही किसी और लड़के ने फोन कर बताया कि तुम्हारा भाई ज्यादा सीरियस है, जल्दी से डीडीयू हॉस्पिटल आ जाओ, जब हम लोग अस्पताल पहुंचे तो वह प्राण त्याग चुका था. उन्होंने बताया कि कई साल से वह डिलीवरी कंपनी में काम कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जैसे ही हादसे के बारे में सबको जानकारी मिली, हमारे जानकार, दोस्त, पड़ोसी सभी रात से ही अस्पतालल में मौजूद थे. इससे यह पता चलता है कि हेम शंकर की सबसे कितनी अच्छी दोस्ती थी. किसी से कोई झगड़ा दुश्मनी नहीं थी.
 

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