- दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित होटल फ्लोरिश इन में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई.
- होटल में फंसे लोगों का रेस्क्यू किस तरह जान जोखिम में डालकर किया गया अब उसकी कहानी सामने आ रही है.
- इस अग्निकांड में 5 लोगों को बचाने वाले दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल दिनेश यादव ने NDTV को उस दिन की कहानी बताई.
Delhi Hotel Fire: धू-धू कर जलता होटल, अंदर फंसे लोगों की चीख-पुकार और मदद के लिए पहुंचे लोगों की परेशानी... दिल्ली के मालवीय नगर होटल में लगी आग से जुड़ी एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने रोंगटे खड़े कर दिए. जिस समय होटल फ्लोरिश इन जल रहा था, उसके अंदर अफ्रीकी मूल के कई लोग फंसे थे. उसमें एक महिला भी थी, जो बेटी और अपने एक परिचित के साथ इलाज कराने आई थी. आग की सूचना पर जब वहां मालवीय नगर थाना के हेड कांस्टेबल दिनेश यादव पहुंचे तो उस महिला ने कहा- मुझे छोड़ो, मेरी बेटी को बचा लो. मैं शायद बच नहीं पाऊंगी.
मालवीय नगर थाने के कांस्टेबल दिनेश यादव ने बताई रेस्क्यू की कहानी
शुक्रवार को मालवीय नगर थाना के हेड कांस्टेबल दिनेश यादव ने NDTV से बताया कि जब मुझे आग की सूचना मिली, तब मैं सिविल ड्रेस में था. आग की सूचना मिलते ही मैं तुरंत मौके पर पहुंचा. मेरे पास इतना समय भी नहीं था कि वर्दी पहन सकूं. जब मैं वहां पहुंचा तो देखा कि होटल का फ्रंट साइड पूरी तरह से आग की जद में आ चुका था. ऊंची लपटें उठ रही थी.
दिल्ली अग्निकांड में 5 लोगों की जान बचाने वाले हेड कांस्टेबल दिनेश यादव ने रेस्क्यू की कहानी बताई है.
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अफ्रीकी मूल की महिला कह रही थी- मुझे छोड़ो मेरी बेटी को बचा लो
अंदर से लोगों की चीख सुनाई दे रही थी. आस-पास के लोग अपने-अपने तरीके से मदद की कोशिश में जुटे थे. कांस्टेबल दिनेश भी मदद में जुट गए. होटल में फंसे लोगों ने अपने आप को बचाने के लिए बाथरूम में बंद कर रखा था. महिलाएं चिल्ला रही थी, बचा लो, बचा लो. कांस्टेबल के अनुसार किसी स्थानीय ने एक पथ्तर से खिड़की का कांच तोड़ा. होटल का कांच भी मजबूत था. किसी भारी चीज से चोट करने पर थोड़ा-बहुत टूट रहा था.
सीढ़ी के जरिए ऊपर पहुंचे, कांच तोड़कर अंदर गए दिनेश
कांस्टेबल ने कहा कि सीढ़ी के जरिए मैं ऊपर पहुंचा. फिर कई बार मुक्के मार कांच तोड़े और अंदर गया. अंदर का नजारा देखकर मैं हिल गया. वहां अफ्रीकी मूल की एक महिला अपनी बेटी और परिचित के साथ बंद थी. महिला हेल्थी थी, उनका वजन ज्यादा था. वो अपनी भाषा में कह रही थी कि आप मुझे नहीं ले जा पाओगे, मेरी बेटी को ले जाओ, इसे बचा लो.
कांस्टेबल दिनेश के कपड़े, जो रेस्क्यू के दौरान गंदे हो गए, अब भी मालवीय नगर थाने में पड़े दिखे.
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बच्ची तो बच गई तो लेकिन महिला की हो गई मौत
दिनेश ने बताया कि उस वक्त होटल के अंदर काफी धुंआ हो गया था और आग एकदम सामने तक आ गई थी. उन्होंने जैसे-तैसे करके कांच तोड़ा और फिर कंधे पर उठाकर महिला की बच्ची को बाहर निकाला. बाहर सीढ़ी पर खड़े युवक बच्ची को सुरक्षित लेकर नीचे उतरे. दिनेश ने बताया कि बच्ची के बाहर निकलने के बाद महिला को बाहर निकालने की कोशिश की. उनके साथ रहे एक परिचित की मदद से महिला को कंधे तक उठाया, फिर उन्हें टूटी खिड़की से बाहर निकाला, लेकिन सीढ़ी से उतरने के क्रम में वो दूसरी मंजिल से गिर गई, और वहीं उनकी मौत हो गई.
दिनेश ने 5 लोगों को बचाया, कई जगह खाए जख्म
दिनेश के मुताबिक इन्होंने पांच लोगों को बाहर निकाला. दिनेश ने बताया कि उस वक्त उन्होंने जो कपड़े पहने थे वो धुंए और खून की वजह से लाल और काले रंग के हो गए. केबल की तार जल रही थी. जिससे गिरने वाला प्लास्टिक उनके सिर और हाथ पर जख्म कर रहा था. लेकिन वो मदद में जुटे रहे. दिनेश के हाथ-पैर मे चोट लगे.
21 लोगों की मौत, दिनेश, रियाजुद्दीन सहित कई मसीहा ने बचाई कई लोगों की जान
मालूम हो कि बुधवार को दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित होटल फ्लोरिश इन में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई. जिस समय यह होटल जल रहा था, तब वहां फंसे लोगों की मदद के लिए पहुंचे लोगों ने किस तरह जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाया अब उसकी कहानी सामने आ रही है. होटल के सामने गद्दे की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन की कहानी भी सामने आई. जिन्होंने अपने लाखों रुपए के गद्दे सड़क पर बिछाकर कई लोगों की जान बचाई.
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