दिल्ली में मॉनसून आया पर क्यों रूठे हैं बदरा, नहीं हो रही भारी बारिश, IMD ने बताईं 3 बड़ी वजहें

Delhi Weather: दिल्ली एनसीआर में मॉनसून तो पहुंच चुका है, लेकिन झमाझम बारिश का इंतजार बाकी है. मौसम वैज्ञानिकों ने इसकी वजहें भी गिनाई हैं और बताया है कि कब राहत मिल सकती है.

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Delhi Weather
NDTV
नई दिल्ली:

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत समूचे उत्तर भारत में मॉनसून पहुंच चुका है, लेकिन अभी भी एक बार भी जोरदार बारिश एनसीआर रीजन में देखने को नहीं मिली है. मॉनसून के बादलों ने आसमान घेरा है, लेकिन बारिश न होने से मायूसी है. सैटेलाइट की तस्वीरों में भी दिल्ली-NCR पर छाए मॉनसून के बादलों को साफ देखा जा सकता है. दिल्ली में एक सप्ताह तक गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का ही अलर्ट है. शनिवार को भी नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी ही देखने को मिली. दिल्ली में अनुमान से अभी तक 50 फीसदी कम बारिश हुई है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिल्ली एनसीआर में मॉनसून की दस्तक के बावजूद भारी या तेज बारिश न होने और उमस भरी गर्मी बढ़ने के पीछे तीन बड़े कारण हैं. जबकि गुजरात में सूरत जैसे शहरों में और महाराष्ट्र में मुंबई, ठाणे जैसे इलाकों में भारी बारिश हो रही है.

1. मॉनसून ट्रफ की स्थिति

मॉनसून की तेज बारिश पूरी तरह से 'मॉनसून ट्रफ' यानी कम दबाव वाले क्षेत्र की रेखा की स्थिति पर निर्भर करती है. जब यह ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर (जैसे मध्य भारत या राजस्थान-मध्य प्रदेश की सीमा की तरफ) खिसक जाती है तो दिल्ली-एनसीआर में बारिश की गतिविधियां थम जाती हैं. दिल्ली में भारी बारिश तभी होती है जब यह ट्रफ लाइन ठीक दिल्ली-एनसीआर के ऊपर से गुजरती है या इसके उत्तर में हिमालय की तलहटी की ओर बढ़ती है.

2. मजबूत कम दबाव वाले क्षेत्र का अभाव

बंगाल की खाड़ी में उठने वाले चक्रवातीय सिस्टम या कम दबाव के क्षेत्र ही मॉनसून की हवाओं को मैदानी इलाकों तक धकेलते हैं. हाल के दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले ऐसे सिस्टम या तो कमजोर रहे हैं या उनकी दिशा मध्य भारत (ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश) की तरफ मुड़ गई है. जब तक कोई मजबूत सिस्टम दिल्ली की तरफ नहीं बढ़ता, तब तक हवाओं में नमी होने के बावजूद वे केवल उमस बढ़ाती हैं, भारी बारिश में तब्दील नहीं हो पातीं.

3. ब्रेक मॉनसून या कमजोर मॉनसून

कई बार मॉनसून के दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद वह एक कमजोर चरण (Weak Phase) में चला जाता है. इसे वेदर साइकल में ब्रेक मॉनसून जैसी स्थिति भी कहा जाता है. इसमें हवाओं में आर्द्रता तो 70-80 फीसदी से ऊपर बनी रहती है, जिससे भारी उमस होती है. बादलों को बरसने के लिए जो स्थानीय थर्मल सपोर्ट (हवा का ऊपर उठना) चाहिए होता है, वह नहीं मिल पाता है.

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दिल्ली में मॉनसून ने 2 जुलाई को दस्तक दी

दिल्ली में मॉनसून ने 2 जुलाई को दस्तक दी थी तो सबके चेहरे खिल उठे थे कि अब तेज बारिश होगी, लेकिन पिछले तीन दिनों में ऐसा एक बार भी नहीं हुआ. दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में हल्की बारिश के साथ आंधी और तेज हवाएं मॉनसून आने के पहले दिन चली थीं. मौसम विभाग ने मॉनसून के पहले दिन दिल्ली-NCR के कुछ हिस्सों में रेड अलर्ट तक जारी किया था, हल्की तेज हवाओं के बीच हल्की बारिश ही हुई. उस दिन 60 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं.

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 दिल्ली एनसीआर में मॉनसून से उम्मीद कायम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं. अगले 5 दिनों तक मॉनसून की सक्रियता देखने को मिलेगी. अगर मॉनसून मजबूत होता है तो आंधी, बिजली चमकने के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. इससे अधिकतम तापमान 30-32 डिग्री तक आ सकता है, जो जून में 45 डिग्री के साथ लू के थपेड़ों के बाद राहत वाली खबर होगी. दिल्ली में 5 से 9 जुलाई तक बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है.

दिल्ली में 33 दिनों में 38 मिमी बारिश

इस साल पूरे उत्तर-पश्चिम भारत समेत देश के अधिकतर हिस्सों में मॉनसून की बारिश में कमी रिकॉर्ड की गई है. भारत मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 03 जुलाई के बीच दिल्ली में औसत से 49 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 3 जुलाई के बीच दिल्ली में औसतन 75.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की जाती है, लेकिन इस साल इन 33 दिनों के दौरान दिल्ली में सिर्फ 38.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है. 

पूरे देश में मॉनसून में कम बारिश

मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 3 जुलाई के बीच देश में औसत से 31% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. आमतौर पर 1 जून से 3 जुलाई के बीच देश में औसतन 189 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की जाती है, लेकिन इस साल अब तक इस समय अवधि में सिर्फ 131 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है. सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और उत्तर पूर्वी भारत में देखी गई है, जहां 1 जून से 03 जुलाई के बीच औसत से 41% कम बारिश दर्ज की गई है.

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दूसरी सबसे ज्यादा बारिश की कमी सेंट्रल इंडिया क्षेत्र में दर्ज की गई है.  इस क्षेत्र में 1 जून से 03 जुलाई के बीच औसत से 30% कम बारिश दर्ज की गई है.  इस दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय और उत्तर-पश्चिम भारत में भारत में बारिश की कमी 21% तक रही है. हालांकि दो दिन बाद दिल्ली और आसपास के राज्यों में मॉनसून की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है.

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पंजाब, हरियाणा में कल का मौसम

भारत मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 6-8 जुलाई के दौरान काफी ज़्यादा से लेकर व्यापक बारिश होने की संभावना है. उम्मीद है कि इससे दिल्ली में मॉनसून की बारिश में कमी की कुछ भरपाई हो सकेगी. उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का एक स्पष्ट क्षेत्र बना हुआ है. इसके असर से अगले 4-5 दिनों तक देश के मध्य हिस्सों में मॉनसून के सक्रिय रहने की संभावना है. 4 से 7 जुलाई के दौरान कोंकण और गुजरात क्षेत्र में, 4 से 6 जुलाई के दौरान मध्य महाराष्ट्र में, 5 जुलाई तक सौराष्ट्र और ओडिशा और पश्चिम मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.
 

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