- दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने फांसी घर मामले में अरविंद केजरीवाल समेत चार नेताओं को नोटिस भेजा है
- केजरीवाल ने 6 मार्च को शाम तीन बजे समिति के समक्ष पेश होने और कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने का अनुरोध किया
- मामला अगस्त 2022 में दिल्ली विधानसभा परिसर में बनाए गए फांसी घर के उद्घाटन और उसकी वैधता से जुड़ा है
Arvind Kejriwal News: दिल्ली की अदालत से शराब नीति मामले में बरी होने के बाद अब आख़िरकार विधानसभा समिति के सामने पेश हो रहे है. अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में समिति को पत्र लिखकर कहा है कि वह 6 मार्च को शाम 3 बजे पेश होंगे. दिल्ली विधानसभा विशेषाधिकार ने फांसी घर मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा स्पीकर राम निवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिरला को नोटिस भेजा है.
केजरीवाल ने एक मांग भी कर दी
अरविंद केजरीवाल ने लिखा, “जब दिल्ली प्रदूषण से जूझ रही है, सड़कें टूटी पड़ी हैं, हर तरफ कूड़े के ढेर हैं और अस्पतालों में दवाइयां नहीं हैं. इस बीच दिल्ली विधानसभा ने “फांसी घर” पर प्रश्न पूछने के लिए मुझे बुलाया है. मैंने विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि उनके समन के अनुसार मैं 6 मार्च को उपस्थित रहूंगा. पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए समिति से मेरी विनती है कि कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाए.”
इससे पहले विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने 2 से 6 मार्च के बीच किसी भी दिन उपस्थित होने की इच्छा जताई थी. इसी तरह अन्य तीनों नेताओं ने भी कुछ दिनों की मोहलत मांगी थी. इन अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए समिति ने जांच में अनावश्यक देरी से बचने के लिए 6 मार्च 2026 की अंतिम तारीख तय कर दी गई.
2022 का है पूरा मामला
गौरतलब है कि यह मामला दिल्ली विधानसभा परिसर में 9 अगस्त 2022 को बनाए गए तथाकथित ‘फांसी घर' से जुड़ा है. इस ‘फांसी घर' के उद्घाटन और उसकी वैधता को लेकर सवाल खड़े हुए थे. बाद में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए विशेषाधिकार समिति को जांच का जिम्मा सौंपा था. समिति को यह देखने का निर्देश दिया गया था कि क्या इस निर्माण और उद्घाटन के दौरान विधानसभा की गरिमा, नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है या नहीं.
पहले भी दिया था नोटिस
विशेषाधिकार समिति ने इससे पहले भी कई बार संबंधित नेताओं को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था, लेकिन किसी न किसी कारण से वे समिति के सामने उपस्थित नहीं हुए.इस समिति में अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत के अलावा सूर्य प्रकाश खत्री, अभय कुमार वर्मा, अजय कुमार महावर, सतीश उपाध्याय, नीरज बसोया, रवि कांत, राम सिंह नेताजी और सुरेंद्र कुमार सदस्य के रूप में शामिल हैं. समिति ने कहा था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा बनाए रखने, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है.














