जहर का इंजेक्शन या शूटिंग, क्या बदलेगा भारत में मृत्युदंड का तरीका? SC ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा

फांसी की जगह कम तकलीफदेह तरीके अपनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • SC ने मौत की सजा में फांसी की जगह कम तकलीफदेह विकल्प अपनाने की याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा है
  • वकील ऋषि मल्होत्रा ने फांसी को क्रूर और अमानवीय बताया है तथा जहर का इंजेक्शन देने का सुझाव दिया है
  • याचिका में मृत्युदंड की प्रक्रिया बदलने के लिए फांसी के बजाय अन्य विकल्प पर विचार करने की मांग की गयी है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

मौत की सजा के लिए फांसी की जगह कम तकलीफदेह तरीके अपनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है. यह याचिका वकील ऋषि मल्होत्रा ने दाखिल की है, जिसमें उन्होंने फांसी को मौत की सजा देने का एक क्रूर और अमानवीय तरीका बताया है. याचिकाकर्ता ने फांसी के बजाय जहर का इंजेक्शन देने का सुझाव दिया है. केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर विचार के लिए सरकार ने एक कमेटी गठित की है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार को तीन हफ्ते में अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया है.

याचिका में मृत्युदंड की प्रक्रिया को बदलने की अपील की गई

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में मृत्युदंड की प्रक्रिया को बदलने की अपील की गई है. 15 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताई थी कि केंद्र सरकार इसे बदलने के लिए तैयार नहीं है. सुनवाई के दौरान यह सुझाव भी सामने आया था कि दोषी को फांसी या जहर के इंजेक्शन में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जा सकता है, लेकिन केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा था कि ऐसा करना “व्यावहारिक रूप से संभव नहीं” है. इस पर अदालत ने नाराज़गी जताई थी और कहा कि केंद्र समय के साथ विकसित होने को तैयार नहीं दिख रहा.

केंद्र की ओर से वरिष्ठ वकील सोनिया माथुर ने दलील दी थी कि यह मामला नीतिगत निर्णय से जुड़ा है. बुधवार की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने मौखिक रूप से कहा, “समस्या यह है कि सरकार बदलने को तैयार नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत पुरानी प्रक्रिया है और समय के साथ चीज़ें बदल गई हैं.

याचिका में क्या कहा गया है?

याचिका में फांसी की जगह जहर का इंजेक्शन, शूटिंग, इलेक्ट्रोक्यूशन या गैस चैंबर जैसे विकल्प सुझाए गए हैं, जिनसे सजायाफ्ता की मौत कुछ ही मिनटों में हो सकती है. वकील ऋषि मल्होत्रा की इस जनहित याचिका में फांसी को अत्यधिक पीड़ादायक, अमानवीय और क्रूर बताया गया है.

याचिकाकर्ता ने CrPC की धारा 354(5) के तहत फांसी देकर मृत्युदंड देने को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है, साथ ही सम्मानजनक मृत्यु के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना जाए. याचिका में यह भी कहा गया है कि फांसी में मृत्यु घोषित करने में लगभग 40 मिनट लगते हैं, जबकि शूटिंग या जहर के इंजेक्शन से यह प्रक्रिया करीब 5 मिनट में पूरी हो जाती है. मल्होत्रा ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया है जिसमें कहा गया है कि जहां मृत्युदंड दिया जाता है, वहां इसे कम से कम पीड़ा देने वाले तरीके से लागू किया जाना चाहिए.

Featured Video Of The Day
Driving License Suspension Rules 2026: 5 ई-चालान कटे तो सस्पेंड होगा ड्राइविंग लाइसेंस | Breaking
Topics mentioned in this article