- डिजिटल फ्रॉड के मामले पिछले पांच वर्षों में 8 गुना बढ़कर रोजाना लगभग 6 हजार तक पहुंच गए हैं.
- बीते पांच वर्षों में साइबर ठगी के जरिए 55 हजार करोड़ से अधिक रुपये लोगों के खाते से उड़ा लिए गए हैं.
- कोऑर्डिनेशन सेंटर के माध्यम से 2024 और 2025 में क्रमशः 2741 और 4320 करोड़ रुपये रिकवर किए गए .
अक्सर जब किसी को बिना मेहनत के धन लाभ होता है, तो कहा जाता है कि उसकी 'लॉटरी' लग गई है. लेकिन आज के डिजिटल युग में, मोबाइल पर आने वाले लॉटरी के संदेश खुशियों की नहीं बल्कि बड़ी मुसीबत की आहट हो सकते हैं. साइबर ठग अब लोगों के लालच और डर का फायदा उठाकर नए-नए जाल बुन रहे हैं, जहां एक तरफ लॉटरी या निवेश को दोगुना-तिगुना करने का झांसा दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे डरावने हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. ठग लोगों को यह कहकर डराते हैं कि उनके पार्सल में कोकीन या गांजा जैसे प्रतिबंधित पदार्थ मिले हैं. ऐसे समय में हड़बड़ी के बजाय ठंडे दिमाग से यह सोचना जरूरी है कि क्या आपने वाकई कोई पार्सल भेजा या मंगवाया था?
पिछले 5 सालों में साइबर अपराध की दुनिया में जो उछाल आया है, वह वाकई चिंताजनक है. साल भर में रिपोर्ट होने वाले मामलों की संख्या 3 लाख से बढ़कर अब आठ गुना ज्यादा हो गई है. आज भारत में हर दिन औसतन 6 हजार साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले दर्ज हो रहे हैं. यह सिर्फ आंकड़ों की बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि उस आम आदमी की मेहनत की कमाई पर डाका है जो तकनीक की बारीकियों से अनजान है. डराने वाली बात यह है कि ठगी गई रकम का ग्राफ मामलों की संख्या से भी कहीं अधिक तेजी से ऊपर भाग रहा है, जो हमारी डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.
हरकत में आई सरकार
साइबर अपराध से निपटने के लिये गृह मंत्रालय की पहल पर इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर का गठन किया गया है. जब आंकड़े कम रिपोर्ट हो रहे थे तब लोगों को चूना लगने वाली रकम भी कम थी. लेकिन जब मामले बढ़े तो चपत लगने वाली रकम भी हजारों करोड़ों में जा पहुंची. बीते पांच सालों में साइबर ठगी के जरिए 55,649 करोड़ से अधिक रुपये लोगों के खाते से उड़ा लिए गए हैं.
हालांकि, ऐसा नहीं है कि जिम्मेदार एजेंसियां कुछ नहीं कर रहीं. अगर आप सतर्क और सजग हैं तो आपके खाते से उड़ाए गए पैसे की रिकवरी भी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानि आई4सी के जरिए की गई है. 2024 में 2741.79 करोड़ और
2025 में 4320.25 करोड़ की रकम लोगों को वापस की गई है.
आई4 सी के एक्शन में आने के बाद से धीरे-धीरे रिकवरी की रकम भी बढ़ने लगी है. 2024 में जहां 19 फीसदी रकम की रिकवरी हुई. वहीं, 2025 में यह बढ़कर 24 फीसदी तक पहुंच गई है. उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी रिकवरी की जा सकेगी. आई4 सी के अधीन ही एक और सेंटर बना है, जिसका नाम साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेन्टर है. इस सेंटर की खासियत है कि यहां करीब-करीब हर राज्य के पुलिसकर्मी, बैंक, मोबाइल ऑपरेटर, पेमेंट गेटवे और दूसरे एजेंसी से जुड़े लोग होते है. जैसे ही कहीं साइबर क्राइम होता है, तो तत्काल उसको लेकर यहां कार्रवाई होती हैं.
1930, पुलिस या फिर बैंक में शिकायत करनी होती है
अमूनन किसी के साथ साइबर अपराध होने पर उसे नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, 1930, पुलिस या फिर बैंक में शिकायत करनी होती है. एसएफएमसी सेंटर में एक बड़ा सा डैश बोर्ड बना हुआ है. देश में जहां कही भी ऐसी घटना की शिकायत मिलती है तो वह तुरंत अलर्ट दिखाता है. इसके साथ ही एक ही हॉल में सारे एजेंसी के लोग बैठे होते है तो तुरंत एक्शन शुरु हो जाता है.
सीएफएमसी के निदेशक बादल कौशिक एनडीटीवी से कहते है कि यह एक यूनिक संस्था है जहां बैंक, वित्तीय संस्थान पुलिस अधिकारी , टेलीकॉम ऑपरेटर एक समन्वय के साथ काम कर रहे हैं. जो मामले आ रहे हैं, और जिन पर पैसा रोका जा सकता है, उस पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सबसे जरुरी चीज है मामले को रिपोर्ट करना. ताकि जिम्मेदार एजेंसी और पुलिस आदि एक्शन ले सकें. अगर किसी के साथ ऐसा मामला हुआ है तो उसे तुरंत रिपोर्ट करे. देश में हुए फ्रॉड का पैसा अधिकतर साउथ एशिया देशों और गेमिंग सेक्टर में जा रहा है.
वहीं, डिप्टी डायरेक्टरअखिलेश गौड़ ने बताया कि साइबर फ्रॉड से बचने का सीधा उपाय ये कि किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक मत करें. किसी अनजान नंबर से विडियो कॉल आए तो उसे मत उठाएं. कोई भी वाट्सएप मैसेज आए, और उसमें कोई कंटेंट हो तो उसे डॉउनलोड ना करें. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर मिलने वाली इंवेस्टमेंट से जुड़ी कोई सलाह न लें. कानूनी तौर पर डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता.यह सिर्फ एक ठगी का जरिया है.
हालांकि, अब डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 86 फीसदी की कमी आई है. साथ ही वित्तीय नुकसान में भी 66.4 प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है. ये गिरावट 2023 से 2024 के बीच हुई 465% की भारी बढ़ोतरी के बाद दर्ज हुई है. आई4सी देश भर में ऐसे बैंक अकाउंट्स पर भी नजर रखता है जिनका इस्तेमाल अपराधी करते हैं.
देश भर में 336 साइबर कमांडो तैनात
आई4सी ने अब साइबर खतरे से निपटने के लिये देश भर में 336 साइबर कमांडो तैनात किए हैं. ये किसी भी तरह साइबर अटैक से निपटने के तैयार होते हैं. ये अस्पताल में साइबर अटैक से लेकर स्कूल के हॉक्स कॉल (फर्जी धमकी) की काट आसानी से ढूंढ लेते हैं. अगर अंडमान या मुंबई में कोई साइबर हमला होता है तो वहां पर मौजूद साइबर कमांडो उसे फेल करने के लिये मौजूद रहेंगे. सरकार की कोशिश है कि अगले पांच साल में 5000 हजार कमांडो तैनात किए जाएं.
इस मामले पर एनडीटीवी से बात करते हुए आई4 सी के डायरेक्टर निशांत कुमार ने कहा कि हमारा काम सारे स्टेकहोल्डर्स के साथ कोऑर्डिनेशन बना के रखना है. ये लोग क्राइम को रोकने में मददगार साबित होते है, क्योंकि यह अपराध सीमाओं में बंधा नहीं है. इसमें कई सिस्टम जुड़े होते हैं. इन सबके बीच समन्वय स्थापित करके त्वरित कार्रवाई करनी होती है. इसी का नतीजा है कि अब पीड़ित को अपनी 50 हजार तक की रकम सीधे पुलिस की मदद से मिल जाती है.
उन्होंने कहा कि इसके लिये पीड़ित को सालों कोर्ट के चक्कर काटने की जरूरत नही है. यह एक ऐसा क्राइम है जिसमें क्रिमिनल कहीं और होते हैं, जबकि पीड़ित कही और. इससे बचने का सबसे बड़ा उपाय है लोगों में जागरुकता फैलाना. जैसे ही ऐसी कोई घटना हो तो बिना देरी किए रिपोर्ट करना चाहिए. इससे खोई हुई रकम वापस मिलने की उम्मीद ज्यादा होती है.
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