ग्राउंड रिपोर्ट : किसानों के लिए सोना बना 70 हजारी जीरा, जानें- क्यों बढ़ रहे इसके दाम

खारी बावली दिल्ली में मसालों के लिए मशहूर बाजार है. यहां जीरे के दाम ने ऐसा मंहगाई का तड़का लगाया है, जिससे ग्राहक ही नहीं सालों से जीरे का कारोबार करने वाले व्यापारी भी हैरान है.

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इस बार अत्यधिक गर्मी के चलते जीरा 50 लाख बोरी के आसपास हुआ है.
नई दिल्ली:

बीते तीन महीने में जीरे के दाम बढ़ने से जहां आम लोग परेशान हैं. इसकी खेती करने वाले किसानों के लिए जीरा अब सोना साबित हो रहा है. बाजार में सोना 60 हजार रुपये ग्राम है. जीरे का दाम करीब 70 हजार रुपये कुंतल है. NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए जीरे के दाम बढ़ने से किसान खुश क्यों हैं? इसके दाम बढ़ने के पीछे चीन और बांग्लादेश का क्या कनेक्शन है? 

खारी बावली दिल्ली में मसालों के लिए मशहूर बाजार है. यहां जीरे के दाम ने ऐसा मंहगाई का तड़का लगाया है, जिससे ग्राहक ही नहीं सालों से जीरे का कारोबार करने वाले व्यापारी भी हैरान है. बीते तीन महीनों के दौरान जीरे के दाम पर नजर डालें, तो मार्च में जीरा 280 प्रति किलो, अप्रैल में 350 रुपये किलो, मई में 500 रुपये किलो, जून में 700 रुपये किलो रहा.

खारी बावली में जीरा के कारोबारी 40 साल के रवि कुमार बताते हैं कि उनकी जानकारी में जीरे का दाम इससे पहले इतना कभी नहीं बढ़ा. उन्होंने कहा, "इस बार 40 लाख बोरी जीरे का उत्पादन है. अब तक 25 लाख बोरी बिक चुका है. मांग ज्यादा है, जबकि सप्लाई कम है. यही वजह है कि ये दीपावली तक जीरा 800 रुपये किलो तक पहुंच जाएगा.

क्या किसानों के लिए सोना साबित हो रहा जीरा?
क्या सही में जीरा किसानों के लिए सोना साबित हो रहा है? ये जानने हम जीरे की सबसे ज्यादा पैदावार करने वाले राजस्थान के जोधपुर मंडी पहुंचे. यहां हमें भोपाल गढ़ के किसान मोहनराम मिले. पिछले साल दस बीघे में 20 बोरी जीरे की पैदावार हुई थी. लेकिन इस साल ज्यादा गर्मी के चलते जीरे के कम पैदावार पर भी खुश हैं.  

NDTV से बात करते हुए मोहन राम कहते हैं, "पिछले साल दस बीघे में 20 से 22 बोरी जीरे का उत्पादन था. इस साल सात से आठ बोरी ही जीरा हुआ. पिछले साल एक बोरी के 20 से 25 हजार मिले थे, लेकिन इस साल हमें 50 से 60 हजार मिल रहे हैं." 

राजस्थान और गुजरात का जीरा सबसे बेहतर
पूरी दुनिया में राजस्थान और गुजरात का जीरा सबसे बेहतर माना जाता है. इसके चलते चीन और बांग्लादेश इसके बड़े खरीददार हैं, लेकिन इस साल बदलते मौसम के चलते जीरे का उत्पादन कम रहा है. जानकार मानते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग का असर सिर्फ जीरे पर ही नहीं, बल्कि कई फसलों पर पड़ रहा है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
कृषि विशेषज्ञ देवेंदर शर्मा कहते हैं, "जीरे पर ही नहीं कई फसलों पर ग्लोबल वॉर्मिंग का असर पड़ा है. आपको याद होगा कि गेहूं की पैदावार ज्यादा गर्मी की वजह से कम हुई थी. सरकार को एक्सपोर्ट रोकना पड़ा था."

क्या कहते हैं जीरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष?
जीरा व्यापार मंडल जोधपुर के अध्यक्ष पुरुषोत्तम मुंदड़ा बताते हैं, "पिछले साल 80-90 लाख बोरी का उत्पादन हुआ था. तब जीरा 20 से 25 हजार कुंतल था. इस बार अत्यधिक गर्मी के चलते जीरा 50 लाख बोरी के आसपास हुआ है."

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ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत तो आपने सुनी होगी. यानी खपत ज्यादा डिमांड कम. इस बार जीरे के बढ़ते दाम के चलते हमारे और आपके मुंह में बहुत कम जीरा आने वाला है.  

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