'बीजेपी ने किया था महिला आरक्षण का विरोध', संसद में प्रियंका गांधी ने की आरोपों की बौछार

Women Reservation bill debate: प्रियंका गांधी ने कहा कि देश में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान सबसे पहले राजीव गांधी की सरकार ने पेश किया था, लेकिन उस वक्त यह पारित नहीं हो पाया था.

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  • प्रियंका गांधी ने कहा कि पंचायतों-नगर पालिकाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण का प्रयास राजीव गांधी ने किया था
  • उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय कर रही है और कांग्रेस ऐसा कभी नहीं होने देगी
  • प्रियंका ने सवाल उठाया कि मौजूदा 543 सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता?
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संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण संबंधी विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने अपनी बात रखी. प्रियंका ने महिलाओं के आरक्षण के लिए पिछली कांग्रेस सरकारों द्वारा किए गए प्रयासों का खाका पेश किया. उन्होंने कहा कि देश में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान सबसे पहले राजीव गांधी की सरकार ने पेश किया था, लेकिन उस वक्त यह पारित नहीं हो पाया था. उन्होंने बीजेपी पर इस आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया. 

'प्रधानमंत्री ने आधी बात ही बताई'

प्रियंका ने कहा कि आज प्रधानमंत्री ने उस आरक्षण बिल का जिक्र किया, लेकिन हमेशा की तरह आधी बात ही बताई. उन्होंने ये तो बताया कि विरोध हुआ था, लेकिन ये नहीं बताया कि विरोध करने वाले कौन थे. विरोध तो आप ही (बीजेपी) ने किया था. कुछ साल बाद पीवी नरसिंह राव की कांग्रेस सरकार ने इस बिल को पारित करवाकर लागू किया. इसी कानून की बदौलत 40 लाख पंचायत प्रतिनिधियों में आज 15 लाख महिलाएं लोकतंत्र में भागीदारी कर रही हैं. 

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कांग्रेस नेता ने कहा कि 2010 में मनमोहन सिंह सरकार ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने फिर से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण का प्रयास किया. राज्यसभा में इसे पास भी कराया, लेकिन लोकसभा में आम सहमति नहीं बन पाई. 

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प्रियंका ने कहा कि 2018 में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसमें 2019 तक महिला आरक्षण लागू करने की बात कही थी. प्रियंका ने चुटकी लेते हुए कहा कि यहां प्रधानमंत्री राहुल गांधी का मजाक तो बना लेते हैं, लेकिन घर जाकर उनकी बातों पर गौर करते हैं. उसी का परिणाम है कि आज हम उसी महिला आरक्षण पर गौर कर रहे हैं. 

बहकाने वाले पुरुषों को पहचान लेती हैं महिलाएं

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ने तंज कसते हुए कहा कि आज प्रधानमंत्री जी की बातों से लगा कि भाजपा ही महिला आरक्षण की चैंपियन, प्रस्तावक और सबसे बड़े समर्थक रहे हैं. लेकिन महिलाओं में ये खूबी होती है कि बार बार बहकाने वाले पुरुषों को वह झट से पहचान लेती हैं. थोड़ी सावधानी बरत लीजिए.. पकड़े जाएंगे.

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प्रियंका ने कहा कि संसद में महिला आरक्षण 2029 तक लागू करने की बात है, हम सहमत हैं. इसे लागू करने के लिए लोकसभा सदस्यों की संख्या 50 पर्सेंट बढ़ानी पड़ेगी. इसके लिए एक परिसीमन आयोग बनाया जाएगा जो 2011 की जनगणना को आधार बनाकर काम करेगा. प्रियंका ने कहा कि ऊपर ऊपर से इसमें कोई आपत्तिजनक बात नहीं लगती, लेकिन गहराई से देखने पर इसका असली मकसद सामने आता है. राजनीति की बू इसमें गहराई से घुली हुई है. 

उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में डटकर खड़ी है, लेकिन सच्चाई यह है कि महिला आरक्षण का जो विधेयक सरकार ने पेश किया है, उससे पूरी चर्चा बदल गई है. इसमें पूरी तरह से राजनीति घुली हुई है. इसी सरकार ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक सर्वसम्मति से पारित कराया था. उसमें दो बातें थीं, जो इस विधेयक में नहीं हैं. उसमें कहा गया था कि इसे लागू करने से पहले नई जनगणना और परिसीमन कराया जाएगा. अब अचानक क्या हो गया?

ओबीसी समाज से धोखाधड़ी का आरोप

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण का मुद्दा विषय आधी आबादी से जुड़ा है लेकिन बीजेपी सरकार इन विधेयकों की आड़ में ओबीसी समाज के साथ धोखाधड़ी कर रही है. हम इसका विरोध करते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ना चाहती है, क्योंकि उसमें ओबीसी वर्ग की जनसंख्या का आंकड़ा नहीं है. इसे तकनीकी मुद्दा बताकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता. पीएम मोदी किस बात से घबरा रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय कर रही है और कांग्रेस ऐसा कभी नहीं होने देगी. 

ये बिल पास हुआ तो लोकतंत्र खतरे में

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों के आश्वासन के बावजूद यह तय है कि संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव किया जाएगा. इतने बड़े बदलाव के लिए पूरी प्रक्रिया होती है, लेकिन सरकार की योजना उसे नजरअंदाज करने की है. जिस तरह असम में मनचाही सीटों को तोड़ा गया और राजनीतिक फायदे के लिए नई सीमाएं बनाई गईं, उसी तरह यह पूरे देश में किया जाएगा. परिसीमन आयोग में चुने गए सरकार के तीन लोग राज्यों के वजूद और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी तय करेंगे. अगर यह विधेयक पारित हो गया, तो समझ लीजिए लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा. सरकार जनता की आंखों में धूल झोंककर देश की अखंडता पर बड़ा हमला कर रही है.

एक तरफ महिला आरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं और दूसरी तरफ गुप्त रूप से ओबीसी वर्ग के लोगों का हक छीना जा रहा है. कुछ प्रदेशों की ताकत कम करके लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है और अगले चुनाव के लिए राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश हो रही है. उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि गृह मंत्री हंस रहे हैं और पूरी योजना बना रखी है. चाणक्य अगर आज जिंदा होते, तो वे भी आपकी राजनीतिक कुटिलता पर चौंक जाते.

सत्ता के लिए आरक्षण का इस्तेमाल

उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरी योजना बनाई है कि चुनाव के बीच अचानक सदन की बैठक बुलाओ, सर्वदलीय बैठक मत बुलाओ, विधेयक का प्रारूप एक दिन पहले सार्वजनिक करो ताकि विपक्ष को चर्चा का मौका न मिले, और पहले से ही मीडिया में माहौल बना दो कि बड़ा विधेयक लाया जा रहा है. प्रधानमंत्री कई समस्याओं से घिरे हुए हैं और उन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है. महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक कदम को सत्ता बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. जाति जनगणना को नकारकर ऐसी संसद बनाने की कोशिश हो रही है, जिसमें न केवल अभिव्यक्ति और चर्चा की कमी होगी, बल्कि पिछड़े वर्गों और राज्यों की समानता भी प्रभावित होगी. 

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543 सीटों में 33% महिला आरक्षण क्यों नहीं?

प्रियंका ने सवाल उठाया कि मौजूदा 543 सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता? सभी वर्गों के लिए आरक्षण लागू कर इसे आज ही पारित किया जा सकता है.देश की महिलाएं कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपने हक के लिए लड़ना जानती हैं. प्रधानमंत्री अगर महिलाओं का सम्मान करते, तो उनका राजनीतिक इस्तेमाल न करते. हम इन तीनों विधेयकों का सख्त विरोध करते हैं. मैं प्रधानमंत्री से अपील करती हूं कि वे साहस के साथ सही निर्णय लें, हम सब उनके साथ खड़े रहेंगे.

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