ममता बनर्जी ने क्यों कहा- राज्यपाल आनंद बोस के साथ हुआ है अन्याय

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात कर कहा कि कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें हटाना अन्याय और राजनीतिक रूप से प्रेरित है.

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  • बंगाल की CM ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल CV आनंद बोस से उनकी अचानक हटाने को अन्याय और राजनीतिक प्रेरित बताया
  • बोस ने राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया और ममता बनर्जी ने उनसे भविष्य में बंगाल लौटने का अनुरोध किया
  • मुख्यमंत्री ने बोस से राज्य अतिथि गृह में ठहरने को कहा क्योंकि यह राजकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उचित स्थान है
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कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को यहां एक राजकीय अतिथि गृह में पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात की और कहा कि अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले उन्हें लोक भवन से हटाना ‘‘अन्याय'' एवं ‘‘राजनीतिक रूप से प्रेरित'' है. बोस के पांच मार्च को अचानक राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद बनर्जी के साथ यह उनकी पहली मुलाकात है. बोस के बुधवार को राज्य से जाने की उम्मीद है. उनके त्यागपत्र का घटनाक्रम राज्य में संभवत: अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुआ.

धरना ख़त्म कर अतिथि गृह पहुंचीं; “व्यक्तिगत रिश्ते अच्छे”

ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘चूंकि वह कल जा रहे हैं और मैंने उनके साथ काफी समय तक काम किया है, इसलिए हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध रहे हैं, मैं उनसे मिलने आई हूं. मैं उनके परिवार को जानती हूं. मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हूं.'' मुख्यमंत्री मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ अपना पांच दिवसीय धरना समाप्त करने के तुरंत बाद शहर के अलीपुर क्षेत्र के दक्षिणी भाग में स्थित राजकीय अतिथि गृह पहुंचीं.

“कार्यकाल से पहले हटाना अन्याय, राजनीतिक निर्णय”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि राज्यपाल के रूप में उनका (बोस) पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें पद से हटाना उनके साथ अन्याय है और यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है. उन्हें चुनाव से ठीक पहले हटाया गया, जबकि उनके कार्यकाल में अभी भी 1.5 वर्ष शेष था.” मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बोस से भविष्य में राज्य में लौटने का अनुरोध किया. बनर्जी ने कहा, ‘‘मैंने उनसे बंगाल वापस आने का अनुरोध किया है, क्योंकि वे राज्य को बेहतर ढंग से समझते हैं.''

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दार्जिलिंग कार्यक्रम टला; “हटाए जाने से दौरा संभव नहीं”

जब बोस की सात और आठ मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की दार्जिलिंग यात्रा के दौरान वहां जाने संबंधी योजना के बारे में पूछा गया, तो बनर्जी ने कहा कि वह नहीं जा सके, क्योंकि उन्हें राज्यपाल के पद से हटा दिया गया था. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति के दौरे के दौरान उन्हें (बोस) दार्जिलिंग जाना था। हमने उनके लिए उड़ान की व्यवस्था की थी। राज्यपाल पद से हटाए जाने के कारण वह नहीं जा सके.'' बनर्जी ने दावा किया कि बोस को दार्जिलिंग न जाने और इसके बजाय नयी दिल्ली पहुंचने का संदेश भेजा गया था.

अतिथि गृह में ठहरने का आग्रह; “राजकीय प्रोटोकॉल”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने बोस से होटल के बजाय राज्य अतिथि गृह में रहने के लिए कहा था. उन्होंने कहा, ‘‘वह होटल में रुकना चाहते थे, और मैंने उनसे अतिथि गृह आने को कहा. यह वह जगह है, जहां राजनयिक और अन्य महत्वपूर्ण लोग ठहरते हैं. मैंने उनसे राजकीय अतिथि के रूप में यहाँ आने और ठहरने का अनुरोध किया.'' बाद में, ‘एक्स' पर एक पोस्ट में बनर्जी ने कहा, ‘‘डॉ. बोस एक विद्वान और विशिष्ट व्यक्ति हैं, और उनके कार्यकाल के दौरान मुझे हमारे राज्य तथा यहां के लोगों के कल्याण और प्रगति से संबंधित मामलों पर उनसे बातचीत करने का अवसर मिला. मैंने हमेशा इन मुलाकातों को महत्व दिया है.''

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तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने राज्य के पूर्व राज्यपाल को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. बनर्जी ने पोस्ट में कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि अपनी बुद्धिमत्ता और अनुभव के बल पर वह आने वाले दिनों में मिलने वाली किसी भी जिम्मेदारी का सम्मान करना जारी रखेंगे.''

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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