- पिछले 70 साल में उत्तर भारत में तापमान बढ़ा है और क्षेत्र अधिक शुष्क हो गया है
- राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गर्म और शुष्क क्षेत्र अब पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार तक फैल गए
- भारत का लगभग 7% हिस्सा अपनी पुरानी जलवायु श्रेणी से बदलकर अधिक गर्म और शुष्क श्रेणी में आया
बिन मौसम बारिश, गर्मी और ठंड... अब ये मौसम की एक नई कहानी हो गई है. हाल ही में मॉनसून की विदाई के बाद अचानक भारी बारिश और फिर बढ़ी ठंड पूरे उत्तर भारत ने देखी. वहीं भीषण गर्मी का दौर भी किसी से छिपा नहीं है. पूरे भारत का मौसम अब तेजी से बदल रहा है. मौसम विभाग ने इस बदलते मौसम के ट्रेंड को लेकर नई स्टडी की है. इस स्टडी में सामने आया है कि पिछले 70 सालों में उत्तर भारत पहले के मुकाबले ज्यादा गर्म और शुष्क हो गया है, जबकि दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ी है. इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश, बिहार और गंगा के मैदानी इलाकों पर पड़ सकता है.
70 साल में बदल गया 7% भारत का मौसम
यह स्टडी मौसम जर्नल में पब्लिश हुई है. स्टडी का नाम 'भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में जलवायु में बदलाव' है. आईएमडी पुणे की वैज्ञानिक और स्टडी की प्रमुख लेखिका अनन्या कर्माकर ने कहा कि 1951 से 2020 तक के जलवायु नक्शों की तुलना करने पर उत्तर भारत में सबसे बड़ा बदलाव दिखाई दिया. रिपोर्ट के मुताबिक 1951-1980 और 1991-2020 के बीच मौसम के आंकड़ों की तुलना में पाया गया कि भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का करीब 7 प्रतिशत हिस्सा अपनी पुरानी जलवायु श्रेणी से बदलकर अधिक गर्म और शुष्क श्रेणी में पहुंच गया है.
पहले जो गर्म और शुष्क क्षेत्र मुख्य रूप से राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित थे, वे अब पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर बढ़ रहे हैं.
पूर्वी यूपी और बिहार तक पहुंची शुष्क जलवायु
स्टडी में पाया गया कि 'एरिड स्टेपी-हॉट' जलवायु क्षेत्र का लगातार पूर्व की ओर विस्तार हुआ है. यह क्षेत्र पहले पश्चिमी यूपी तक सीमित था, लेकिन अब पूर्वी यूपी तक पहुंच चुका है. इसका मतलब है कि गंगा के उपजाऊ मैदानों में भविष्य में पानी की उपलब्धता, खेती और भूजल पर दबाव बढ़ सकता है.
गर्म और कम बारिश वाले इलाके बढ़े
1951 से 1980 के दौरान भारत का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा गर्म और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में आता था. 1991 से 2020 के बीच यह बढ़कर करीब 33 प्रतिशत हो गया. वहीं ऐसे क्षेत्र, जहां गर्मियों में गर्मी और सर्दियों में अपेक्षाकृत ठंड रहती थी, उनका दायरा लगातार घटता गया है.
धान की खेती पर सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उत्तर भारत में बदलती जलवायु का सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ सकता है. मॉनसून का पैटर्न बदल रहा है. सिंचाई की मांग बढ़ सकती है. कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करना पड़ सकता है. वहीं किसानों को बुवाई और कटाई का समय बदलना पड़ सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में कृषि कैलेंडर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
दक्षिण भारत में बढ़ी बारिश
जहां उत्तर भारत ज्यादा शुष्क हुआ है, वहीं दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार, प्रायद्वीपीय भारत का करीब 15 प्रतिशत क्षेत्र पहले गर्म और शुष्क श्रेणी में आता था, लेकिन अब वह अधिक वर्षा वाले ट्रॉपिकल सवाना क्षेत्र में बदल रहा है. इससे वहां हरियाली और नमी बढ़ने के संकेत मिले हैं.
क्या है इस बदलाव की वजह?
रिपोर्ट में इस बदलाव को प्रशांत महासागर में होने वाली जलवायु गतिविधियों से भी जोड़ा गया है. रिसर्चर के मुताबिक 'पैसिफिक विक्टोरिया मोड' नामक समुद्री पैटर्न मानसून को प्रभावित करता है. जब इसका सकारात्मक चरण सक्रिय होता है, तो उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में मॉनसूनी बारिश कम हो सकती है, जिससे सूखे की स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है.
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