न्यायाधीश निर्वाचित नहीं होते, लेकिन उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है : CJI चंद्रचूड़

CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कहा, 'मेरा मानना है कि भारत जैसे बहुलवादी समाज के संदर्भ में अपनी सभ्यताओं, अपनी संस्कृतियों की समग्र स्थिरता में हमें एक भूमिका का निर्वहन करना है.’’

विज्ञापन
Read Time: 16 mins
CJI ने कहा कि अदालतें समाज और सामाजिक परिवर्तन के लिए सम्मिलन का केंद्र बिंदु बन गई हैं. (फाइल)
नई दिल्‍ली:

भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) ने कहा कि न्यायाधीश यद्यपि निर्वाचित नहीं होते हैं, लेकिन उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि न्यायपालिका के पास प्रौद्योगिकी के साथ तेजी से बदल रहे समाज के विकास में 'प्रभाव को स्थिर' करने की क्षमता होती है. वह सामान्य तौर पर की जाने वाली उस आलोचना का जवाब दे रहे थे कि निर्वाचित नहीं होने वाले न्यायाधीशों को कार्यपालिका के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. 

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह बात जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर, वाशिंगटन और सोसाइटी फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (एसडीआर), नयी दिल्ली द्वारा आयोजित तीसरी तुलनात्मक संवैधानिक कानूनी चर्चा में कही. चर्चा का विषय 'भारत और अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालयों के परिप्रेक्ष्य से' था. 

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि न्यायाधीशों की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, भले ही हम निर्वाचित नहीं होते हैं. हम हर पांच साल में लोगों के पास वोट मांगने नहीं जाते हैं, लेकिन इसका एक कारण है...मेरा मानना है कि इस अर्थ में न्यायपालिका हमारे समाज के विकास में प्रभाव को स्थिर करने वाली है, विशेषतौर तब, जबकि हमारे इस दौर में जिसमें यह प्रौद्योगिकी के साथ बहुत तेजी से बदल रहा है.''

न्यायाधीश ऐसी आवाज होते हैं, जो 'समय के उतार चढ़ाव' से परे होती है और अदालतों के पास समाज में प्रभाव को स्थिर करने की क्षमता होती है. 

उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि भारत जैसे बहुलवादी समाज के संदर्भ में अपनी सभ्यताओं, अपनी संस्कृतियों की समग्र स्थिरता में हमें एक भूमिका का निर्वहन करना है.''

सीजेआई ने कहा कि अदालतें नागरिक समाज और सामाजिक परिवर्तन के लिए सम्मिलन का केंद्र बिंदु बन गई हैं. 

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, लोग केवल नतीजों के लिए अदालतों का रुख नहीं करते। साफ तौर पर कहें तो, संवैधानिक परिवर्तन की प्रक्रिया में आवाज उठाने के लिए भी लोग अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं....''

Advertisement

उन्होंने कहा कि यह एक कठिन सवाल है और इसके कई कारण हैं कि लोग अदालतों में क्यों आते हैं. 

सीजेआई ने कहा, ‘‘अदालतों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है... क्योंकि हम शासन की कई संस्थाएं हैं... निस्संदेह, शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत मौजूद है. हम विधायिका की भूमिका अपने हाथ में नहीं लेते या हम कार्यपालिका की भूमिका खुद ही निभाते हैं.''

उन्होंने कहा, अदालतें ऐसी जगह बन रही हैं, जहां लोग समाज के लिए अभिव्यक्ति को व्यक्त करने के वास्ते आते हैं, जिसे वे हासिल करना चाहते हैं. 

Advertisement

ये भी पढ़ें :

* "आपकी याचिका लोकप्रियता पाने..." धार्मिक संस्थानों की संपत्ति के रख रखाव को लेकर दायर याचिका पर SC
* "क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की जाए", NCLAT के अधिकारियों पर SC सख्त
* "कानून यह नहीं मान सकता कि सिर्फ होमोसेक्सुअल जोड़े ही अच्छे माता-पिता हो सकते हैं": CJI

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Delimitation पर Rajasthan के Tonk पर आक्रोश में क्यों आए गांव वाले, देखिए रिपोर्ट | Rajasthan News