चंडीगढ़ मेयर चुनाव में खिला कमल, BJP के सौरभ जोशी ने त्रिकोणीय मुकाबले में AAP और कांग्रेस को हराया

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सौरभ जोशी ने 18 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि AAP को 11 वोट और कांग्रेस को 7 वोट मिले. पहली बार मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव हाथ खड़ा करके हुआ. नगर निगम में भाजपा पहले ही संख्या बल में आगे थी, और AAP-कांग्रेस के अलग‑अलग लड़ने से बीजेपी की जीत तय मानी जा रही थी.

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भाजपा के सौरभ जोशी ने जीता चंडीगढ़ मेयर चुनाव.
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  • चंडीगढ़ में मेयर चुनाव में भाजपा के सौरभ जोशी को 18 वोट मिले और उन्होंने बड़ी जीत हासिल की.
  • आम आदमी पार्टी के योगेश ढींगरा को 11 वोट मिले जबकि कांग्रेस के गुरप्रीत गाबी को केवल 7 वोट मिले.
  • इस बार मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए त्रिकोणीय मुकाबला था.
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चंडीगढ़ में आज हुए मेयर चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की. भाजपा उम्मीदवार सौरभ जोशी को कुल 18 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार योगेश ढींगरा को 11 वोट ही मिले. कांग्रेस के उम्मीदवार गुरप्रीत गाबी को सिर्फ 7 वोट मिले, जिसमें कांग्रेस के 6 पार्षद और चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी का वोट शामिल था. 

क्यों खास था यह चुनाव?

इस बार मेयर चुनाव कई वजहों से चर्चा में था. मुकाबला त्रिकोणीय था. AAP, BJP और कांग्रेस तीनों मैदान में थीं. पहली बार मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर- तीनों पदों का चुनाव हाथ खड़ा करके किया गया. तीनों पदों के लिए तीनों पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिससे मुकाबला दिलचस्प बन गया.

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कौन-कौन थे उम्मीदवार?

मेयर पद

भाजपा: सौरभ जोशी
AAP: योगेश ढींगरा
कांग्रेस: गुरप्रीत गाबी

सीनियर डिप्टी मेयर पद

भाजपा: जसमनप्रीत
AAP: मुनव्वर
कांग्रेस: सचिन गालव

डिप्टी मेयर पद

भाजपा: सुमन
AAP: जसविंदर
कांग्रेस: निर्मला देवी
निर्दलीय: रामचंद्र यादव

चुनाव कैसे हुआ?

वोटिंग सुबह 11 बजे हाथ उठाकर शुरू हुई. एक उम्मीदवार का नाम लेकर पार्षदों से पक्ष में हाथ उठाने को कहा गया. हाथों की गिनती के आधार पर विजेता तय किया गया. किसी भी भ्रम की स्थिति में प्रिसाइडिंग ऑफिसर पार्षद से पूछकर वोट सुनिश्चित करते थे.

किसके पास कितनी संख्या थी?

चंडीगढ़ नगर निगम कुल 35 पार्षद और 1 सांसद (मनीष तिवारी- कांग्रेस) मिलकर 36 वोटों वाला हाउस बनता है.

भाजपा: 18 पार्षद
AAP: 11 पार्षद
कांग्रेस: 6 पार्षद + 1 सांसद = 7 वोट

अगर कांग्रेस-AAP साफ लड़तीं तो बदल सकती थी तस्वीर

आपको बता दें कि अंकगणित के हिसाब से भाजपा पहले ही आगे थी. AAP और कांग्रेस अलग-अलग लड़ रही थीं, इसलिए भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी. अगर AAP–कांग्रेस एकजुट होतीं तो तस्वीर बदल सकती थी. विश्लेषकों का कहना है कि अगर AAP और कांग्रेस साथ लड़तीं तो दोनों के पास 18-18 वोट हो सकते थे और मुकाबला बराबरी का हो जाता. 2024 में जब दोनों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, तब उन्होंने भाजपा को हराया भी था.

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