- राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में चंपत राय की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है
- राम मंदिर के दान में करोड़ों रुपये और चांदी की शिलाएं भी चोरी होने का आरोप लग रहा है
- चंपत राय बंसल मूल रूप से बिजनौर के निवासी हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं
Ayodhya Ram Mandir News: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर चुकी है. मंदिर में रोजाना करोड़ों रुपये के दान में कितनी हेराफेरी हुई और इसमें मंदिर ट्रस्ट के कौन से शख्स शामिल थे, इसका खुलासा जल्द हो सकता है. दान चोरी के इस चर्चित केस में श्री राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव और विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय भी सवालों के घेरे में हैं. कभी उनका ड्राइवर रहा टिन्नू यादव इस केस के मुख्य आरोपियों में से एक है. चंपत राय करीब 35-40 वर्षों से राम जन्मभूमि आंदोलन और फिर राम मंदिर के निर्माण जुड़े रहे हैं. अयोध्या के चप्पे-चप्पे की गहरी समझ रखने वाले चंपत राय तो अयोध्या का पटवारी तक कहा जाता है. चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष हैं.
बिजनौर के चंपत राय केमिस्ट्री प्रोफेसर बने
चंपत राय बंसल का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना इलाके के एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता रामेश्वर प्रसाद बंसल और मां सावित्री देवी की 10 संतानों (6 भाई और 4 बहनें) में वो दूसरे नंबर पर हैं.पढ़ाई में अव्वल चंपत राय ने फिजिक्स-केमिस्ट्री में बीएससी-एमएससी के बाद धामपुर के डिग्री कॉलेज में ही प्रोफेसर बन गए. संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने जीवन भर अविवाहित रहने का संकल्प लिया.
अविवाहित चंपत राय RSS के पूर्णकालिक प्रचारक
चंपत राय के पिता रामेश्वर प्रसाद भी संघ से जुड़े थे, लिहाजा चंपत राय भी कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाने लगे और उनके विचारों से गहराई से प्रभावित थे. बीबीसी रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 1975 में जब इंदिरा गांधी सरकार ने इमरजेंसी लगा दी तो RSS से जुड़े चंपत राय को भी गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने यूपी की जेलों में करीब 18 महीने गुजारे. जेल से रिहाई के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए. वो राम मंदिर आंदोलन में पूरी सक्रियता से जुट गए. चंपत राय 1980 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) से भी जुड़े और कुशल संगठन क्षमता के कारण उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली.
राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े
1989-1990 के दौर में जब राम मंदिर के लिए राम जन्मभूमि आंदोलन गति पकड़ने लगा तब आरएसएस नेता रज्जू भैया के निर्देश पर चंपत राय को अवध क्षेत्र (अयोध्या समेत) का क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर भेजा गया.उन्होंने अवध के गांव-गांव जाकर युवाओं को राम मंदिर आंदोलन से जोड़ा.चंपत राय का सबसे बड़ा योगदान कोर्ट कचहरी की लड़ाई के लिए साक्ष्य जुटाने थे.
अयोध्या के रिकॉर्ड मुंह जुबानी याद
उन्होंने अयोध्या की जमीन, इतिहास, भू राजस्व रिकॉर्ड और विवादित स्थल से जुड़े हजारों पन्नों के ऐतिहासिक और कानूनी दस्तावेजों को संकलित किया. अयोध्या के जमीन के रिकॉर्ड उन्हें मुंह जुबानी याद हो गए. मंदिर पक्ष के वकील के परासरन और अन्य अधिवक्ताओं को अदालत में अकाट्य तथ्य पेश करने में बड़ी मदद मिली. वो पूरी तरह अयोध्यावासी हो गए. राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास से जुड़ी कोई भी जानकारी के लिए हर कोई उनसे संपर्क साधता था.
विवादित ढांचा विध्वंस के आरोपियों में रहे
विहिप ने जब अयोध्या में कारसेवा शुरू की थी तो वो भी उसमें शामिल थे. 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के वक्त भी उनकी मौजूदगी बताई गई. सीबीआई अदालत में चले मुकदमे में वो भी आरोपी थे. लेकिन साल 2020 में कोर्ट ने उन्हें साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया.
चंपत राय के परिवार में कौन-कौन?
लाजपत राय बंसल चंपत राय के सबसे बड़े भाई थे. वो उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से चीफ इंजीनियर के पद से रिटायर हुए थे. चंपत राय के छोटे भाई सुनील बंसल उत्तर प्रदेश के नगीना में उनके पैतृक घर पर रहते हैं और वहां बर्तनों का व्यापार संभालते हैं. चंपत राय के एक छोटे भाई सुखदेव बंसल भी आजीवन अविवाहित रहे. ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन आश्रम से जुड़कर परम पूज्य चिदानंद सरस्वती जी के साथ सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपना जीवन समर्पित कर दिया.
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय
सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया. अदालती आदेश पर केंद्र सरकार ने मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra) का गठन किया. राम मंदिर ट्रस्ट की फरवरी 2020 में पहली बैठक में चंपत राय को सर्वसम्मति से ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त किया गया.
राम मंदिर निर्माण की निगरानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में हिस्सा लिया.चंपत राय को राम मंदिर निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी संभाली. पत्थरों की नक्काशी, देश भर से आने वाली सामग्री और मजदूरों की देखरेख में उनकी भूमिका थी. हजारों मजदूर मंदिर निर्माण में लगे थे. मंदिर के लिए चांदी की शिलाएं, लाखों करोड़ों रुपये का दान और अन्य बहुमूल्य चीजों के रखरखाव की जिम्मेदारी थी.
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रामलला की प्राण प्रतिष्ठा
राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा जनवरी 2024 हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ देश भर से हजारों हस्तियां इस आयोजन का गवाह बनीं. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में चंपत राय की केंद्रीय भूमिका रही. वो अभी भी मंदिर परिसर के प्रबंधन, निर्माण कार्य और रोजाना की व्यवस्था को संभाल रहे थे.लेकिन मंदिर के दान में गड़बड़ी के आरोपों के बाद से उन्हें इन जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया है.
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