- राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे पर कथित चूक पर केंद्रीय गृह सचिव ने राज्य की मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है
- राष्ट्रपति के स्वागत में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए गए
- प्रशासन द्वारा चुना गया मार्ग कचरे से भरा होने और शौचालय में पानी न होने के कारण भी जांच की जा रही है
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान कथित चूक पर राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से रिपोर्ट मांगी है. सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह सचिव ने चार बड़े सवाल उठाए हैं. पहला सवाल- राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के लिए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक उपस्थित क्यों नहीं थे? दूसरा सवाल- राष्ट्रपति के लिए बनाए गए शौचालय में पानी क्यों नहीं था? तीसरा सवाल- क्यों प्रशासन द्वारा चुना गया मार्ग कचरे से भरा हुआ था? चौथ सवाल- दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट, सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट इसके लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? केंद्रीय गृह सचिव ने इन सवालों का जवाब शाम 5 बजे तक जवाब मांगा गया है.
बंगाल सरकार पर लग रहे ये आरोप
राष्ट्रपति मुर्मू की पश्चिम बंगाल यात्रा को लेकर ममता बनर्जी सरकार और केंद्र सरकार के बीच चल रहे गतिरोध के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है. बीजेपी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया है. वहीं, ममता बनर्जी ने बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी पर देश के सर्वोच्च पद का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है.
इससे पहले, राष्ट्रपति मुर्मू ने बंगाल में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यवस्थाओं पर असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने यह भी आश्चर्य जताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात क्यों नहीं की!
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, 'आम तौर पर, जब राष्ट्रपति आते हैं, तो मुख्यमंत्री को उनका स्वागत करना चाहिए और अन्य मंत्रियों को भी उपस्थित रहना चाहिए, लेकिन वह नहीं आईं. राज्यपाल बदल गए थे और इसलिए नहीं आ सके. लेकिन चूंकि तारीख तय थी, इसलिए मैं आई हूं.' राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल में बदलाव और कार्यक्रम में कम उपस्थिति का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा, 'आज का कार्यक्रम ऐसी जगह पर हो रहा है कि लोगों का आना मुश्किल है. शायद राज्य सरकार आदिवासियों का कल्याण नहीं चाहती, और इसीलिए उन्हें यहां आने से रोका गया.'
राष्ट्रपति ने कहा, 'ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं. मैं भी बंगाल की बेटी हूं... मुझे नहीं पता कि वह नाराज हैं या इसीलिए कार्यक्रम स्थल बदला गया. खैर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. आप सभी स्वस्थ रहें.' एक सोशल मीडिया पोस्ट में बनर्जी ने कहा कि जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति के कार्यक्रम के लिए चुने गए स्थल पर व्यवस्थाओं की कमी का मुद्दा उठाया था.
CM ममता बनर्जी की सफाई
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है, "एक निजी संगठन, इंटरनेशनल संथाल काउंसिल ने सिलीगुड़ी में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय आदिवासी संथाल सम्मेलन में माननीय राष्ट्रपति को आमंत्रित किया था. सुरक्षा संबंधी अग्रिम समन्वय के बाद, जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति सचिवालय को लिखित रूप में सूचित किया कि आयोजकों की तैयारियां अपर्याप्त प्रतीत हो रही हैं; यह चिंता टेलीफोन पर भी व्यक्त की गई थी. राष्ट्रपति सचिवालय की अग्रिम टीम ने 5 मार्च 2026 को दौरा किया और उन्हें व्यवस्थाओं की कमी से अवगत कराया गया, फिर भी कार्यक्रम निर्धारित समय पर जारी रहा.'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन घटनाक्रमों को "शर्मनाक और अभूतपूर्व" बताया. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, 'लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है. स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति जी द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में अपार दुख पैदा कर दिया है.'
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