IAS कोचिंग संस्थान पर अधूरी जानकारी का आरोप, CCPA ने 15 लाख का जुर्माना ठोका

संस्थान ने विज्ञापनों में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा 2023 के सफल उम्मीदवारों के उसके संस्थान से पढ़े होने का दावा किया था.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
यह मामला और गंभीर इसलिए है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब संस्थान पर कार्रवाई हुई है
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • IAS कोचिंग संस्थान पर भ्रामक विज्ञापन के कारण 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया
  • संस्थान का 2024 के विज्ञापन में बिना कोर्स विवरण के सिविल सेवा परीक्षा 2023 के 645 से अधिक सफल छात्रों का दावा
  • पूर्व में सिविल सेवा परीक्षा 2022 के भ्रामक विज्ञापन के लिए भी संस्थान 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

अगर आप सिविल सेवा परीक्षा या किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और अखबारों या सोशल मीडिया में आने वाले विज्ञापनों के आधार पर कोई फैसला करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. उपभोक्ताओं के हितों के लिए काम करने वाली सरकारी संस्था केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority) ने आईएएस की कोचिंग से जुड़े जाने-माने संस्थान वाजीराव एंड रेड्डी पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण का कहना है कि इस कोचिंग संस्थान ने 2024 के अपने एक विज्ञापन में आधी-अधूरी जानकारी दी, जो क़ानून का उल्लंघन है.

विज्ञापन में किए गए दावे और कमी

आदेश के मुताबिक, इस IAS कोचिंग संस्थान ने अपनी वेबसाइट पर एक विज्ञापन में दावा किया था कि सिविल सेवा परीक्षा 2023 के परिणाम में संस्थान के 645 से ज्यादा छात्र क्वालीफाई हुए हैं. संस्थान ने यह भी दावा किया था कि टॉप 10 रैंकों में उसके भी छात्र थे. प्राधिकरण के आदेश के मुताबिक, संस्थान ने अपने विज्ञापन में इस बात की जानकारी नहीं दी कि जिन सफल छात्रों का दावा किया जा रहा है, उन्होंने संस्थान के किस पाठ्यक्रम या कोर्स में एडमिशन लिया था.

ये भी पढ़ें : छोटे गांव के दशरथ ने किया बड़ा कमाल, JEE Mains में 99.62 पर्सेंटाइल से जिले में टॉप

बार-बार उल्लंघन का आरोप

प्राधिकरण के मुताबिक, इस संस्थान पर ऐसा जुर्माना पहले भी लगाया जा चुका है. सिविल सेवा परीक्षा 2022 के परिणामों से संबंधित भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए भी संस्थान पर कार्रवाई की गई थी और 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इसके बावजूद संस्थान ने अपने बाद के विज्ञापनों में भी इसी तरह के दावे करना जारी रखा, जो प्राधिकरण के मुताबिक नियमों के पालन में कोताही को दर्शाता है. उपभोक्ता क़ानून के तहत दोबारा उल्लंघन होने पर ज़्यादा जुर्माने का प्रावधान है.

ये भी पढ़ें : अब बिहार में कोचिंग संस्थान, प्राइवेट हॉस्टल पर लगेगी लगाम! सरकार ने बनाई कमेटी, अगले हफ्ते बैठक

संस्थान का जवाब असंतोषजनक

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने कार्यवाही के दौरान, संस्थान की ओर से पेश किए गए सफल उम्मीदवारों के नामांकन प्रपत्रों की जांच की, जो संस्थान में एडमिशन के दौरान दिए गए थे. जांच में पाया गया कि ज्यादातर उम्मीदवारों के नामांकन प्रपत्रों में उस कोर्स या पाठ्यक्रम का उल्लेख नहीं था, जिसका संस्थान ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया.

Advertisement

कोचिंग विज्ञापनों पर सख़्ती 

जब भी सिविल सेवा, JEE या NEET जैसी परीक्षाओं का परिणाम घोषित होता है, कोचिंग संस्थानों की ओर से विज्ञापनों की बाढ़ आ जाती है. इन विज्ञापनों में दावा किया जाता है कि सफल होने वाले, खासकर ऊंचे रैंक लाने वाले विद्यार्थियों ने फलां कोचिंग सेंटर से पढ़ाई की है. हालांकि इससे छात्रों को अपना फैसला लेने में मदद मिलती है, लेकिन भ्रम तब पैदा होता है जब एक साथ कई कोचिंग संस्थान सफल हुए किसी एक छात्र पर अपना दावा ठोंक देते हैं. अब सरकार ऐसे मामलों को रोकने के लिए कठोर कदम उठा रही है.

Featured Video Of The Day
Rahul Gandhi पर अपनों का अविश्वास, INDIA गठबंधन में ‘लीडरशिप मॉडल’ पर टकराव? | NDTV India