- कनाडा के PM मार्क कार्नी की भारत यात्रा आज से 2 मार्च तक चलेगी जिसमें व्यापार और निवेश पर विशेष ध्यान होगा.
- भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित FTA पर बातचीत यात्रा के दौरान प्रारंभ होने की संभावना है.
- कार्नी की यात्रा भारत के वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज से अपनी भारत यात्रा पर रहेंगे. कार्नी की यह यात्रा 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक चलेगी. यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने हाल के महीनों में यूरोपीय संघ, ब्राजील और फ्रांस सहित कई प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ उच्चस्तरीय राजनयिक प्रगति दर्ज की है. कार्नी की यात्रा इन सफलताओं की कड़ी को और मजबूत कर सकती है.
कार्नी की यात्रा से भारत को क्या लाभ
कार्नी की यात्रा को एक कूटनीतिक पुनर्संतुलन और आर्थिक साझेदारी में नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है. इस दौरान भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) को लेकर बातचीत अगले हफ्ते शुरू हो सकती है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई में एक अवार्ड समारोह में पहली बार ये संकेत दिया है. पीयूष गोयल ने कहा, 'हर देश भारत के साथ व्यापार समझौता करना चाहता है. मेरी चिली के साथ बातचीत हुई है, जो इस सप्ताह मुक्त व्यापार समझौता करना चाहता है. हम कनाडा के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता वार्ता शुरू कर रहे हैं, उम्मीद है कि जब प्रधानमंत्री (मार्क कार्नी) सोमवार को यहां आएंगे तब यह वार्ता शुरू हो जाएगी.'
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश जल्दी ही मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की शर्तों को अंतिम रूप देकर बातचीत शुरू कर सकते हैं. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 27 फरवरी को भारत की पहली आधिकारिक यात्रा पर मुंबई पहुंच रहे हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, 27 फरवरी को मुंबई पहुँचने पर अगले दो दिनों के दौरान वे कई व्यावसायिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे और भारत और कनाडा के CEOs, उद्योग और वित्तीय विशेषज्ञों के साथ-साथ भारत में स्थित कनाडा के पेंशन फंड प्रमुखों के साथ मुलाकात करेंगे.
1. व्यापार एवं निवेश में नया दौर
भारत-कनाडा ने पिछले एक वर्ष में रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है और अब व्यापार पर नए सिरे से बातचीत संभव है.
• यूरेनियम, भारी कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों में समझौते की उम्मीद है.
• AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और शिक्षा में नए सहयोगी करार संभव हैं.
• दोनो देशों के उद्योगपतियों की CEO फोरम में साझा बैठक व्यापार को नई दिशा दे सकती है.
2. द्विपक्षीय संबंधों की बहाली
कनाडा ने हाल ही में कहा कि भारत अब उसके यहां होने वाले हिंसक अपराधों से संबंधित नहीं माना जाता, जिससे तनाव कम हुआ है और रिश्तों में 'रीसेट' की संभावनाएं बढ़ी हैं. दरअसल कनाडा भारत के साथ द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है. इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और टैरिफ नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है, जिससे कनाडा पिछले कई महीनों से जूझ रहा है.
3. महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग
दोनों पीएम हैदराबाद हाउस में 2 मार्च को उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे, जिनमें विषय होंगे ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, कृषि, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार. क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा.
मुख्य एजेंडा: व्यापार, CEPA, ऊर्जा, टेक और रक्षा
भारत-कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA- Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर बातचीत पिछले दशक से चल रही है लेकिन 2023 में यह ठंडे पड़ गए रिश्तों के बीच पूरी तरह रुकी हुई थी. अब इस दौरे के दौरान मुक्त-व्यापार समझौते की आधिकारिक शुरुआत करने की उम्मीद है और इसके अधिकार क्षेत्र को अंतिम रूप देने की कोशिश होगी. दोनों देशों की नजरें इस समझौते पर हैं ताकि वर्तमान करीब 30 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर से ऊपर ले जाया जा सके. इसकी बात खुद प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल नवंबर में पीएम कार्नी से मुलाकात के बाद कही थी.
यह समझौता सिर्फ टैक्स या शुल्क में कमी तक सीमित नहीं होगा बल्कि सर्विस सेक्टर, निवेश, इंटेलिजेंस साझा करने, लॉजिस्टिक्स, और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक को कवर करेगा. अगर CEPA कामयाब होता है, तो यह दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को दशकों तक मजबूती देगा.
EU लीडर्स के भारत दौरे से हुए कई समझौते
जनवरी 2026 में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व (यूरोपीय परिषद एवं आयोग अध्यक्ष) की भारत यात्रा में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हुईं.
इनमें भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के वार्ता-समापन की घोषणा हुई. यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा FTA माना जा रहा है. इसले अलावा ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स का गठन. स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी में एक निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं.
इन उपलब्धियों ने भारत को व्यापार, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी साझेदारी में एक मजबूत आधार दिया, जो अब कनाडा के साथ भी वार्ताओं को प्रेरित करता है.
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने भी की भारत यात्रा
फरवरी 2026 में राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा की यात्रा में भारत–ब्राज़ील संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचे. इस दौरान 10 प्रमुख समझौते, जिनमें रेयर अर्थ एवं क्रिटिकल मिनरल्स, MSME सहयोग, डिजिटल पार्टनरशिप, हेल्थ रेगुलेशन, पारंपरिक ज्ञान (TKDL) एक्सेस शामिल है. इस दौरे में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, AI और उच्च तकनीक में गहरे सहयोग पर भी जोर दिया गया. दोनों देशों के बीच अगले पांच वर्षों में $20 अरब व्यापार का लक्ष्य निर्धारित है.
इस यात्रा ने भारत की भूमिका को वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में मजबूत किया और तकनीक व खनिज सहयोग में नई संभावनाएं खोलीं.
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की यात्रा
फरवरी 2026 में मैक्रों की यात्रा भारत-फ्रांस संबंधों के इतिहास का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हुई.
इस दौरान दोनों देशों के रिश्ते को 'Special Global Strategic Partnership' का दर्जा दिया गया. सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक नीति में करीबी तालमेल बैठाए गए.
21 प्रमुख समझौते हुए, जिनमें- H125 हेलिकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन. BEL–Safran संयुक्त उपक्रम से HAMMER मिसाइल उत्पादन. क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग. स्टार्टअप एवं इनोवेशन नेटवर्क. AI, डिजिटल साइंस और मेटाबॉलिक हेल्थ में नए केन्द्र बनाने पर सहमति बनी.
रक्षा, न्यूक्लियर ऊर्जा और स्पेस में भी अभूतपूर्व सहयोग देखने को मिला. इन उपलब्धियों ने भारत को रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत वैश्विक सहयोगी दिया.
कार्नी की यात्रा क्यों अहम?
यूरोपीय संघ, ब्राजील और फ्रांस की सफल यात्राओं के बाद भारत ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक शक्ति के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को मज़बूत किया है. अब कार्नी की यात्रा भारत के लिए 5 बड़े अवसर लाती है.
द्विपक्षीय व्यापार का नया अध्याय, जहां कनाडा ऊर्जा-मिनरल्स-AI जैसे क्षेत्रों में प्रमुख भागीदार बन सकता है. तनावपूर्ण रिश्तों की पूर्ण बहाली, जिससे निवेश और आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा. भारत की उत्तरी-अमेरिका नीति में विस्तार, ताकि अमेरिकी संरक्षणवाद (टैरिफ) के बीच नए विकल्प खुलें. वैश्विक दक्षिण + पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों में भारत की पुल-भूमिका को और बल मिलेगा. इसके अलावा हाई-टेक, ऊर्जा और शिक्षा में दीर्घकालीन साझेदारी को संस्थागत रूप मिलेगा.
इस प्रकार, कार्नी की यात्रा भारत की हालिया कूटनीतिक सफलताओं की श्रृंखला में एक और मील का पत्थर साबित हो सकती है.













