- कनाडा के प्रधानमंत्री के रूप में मार्क कार्नी अपनी पहली भारत यात्रा पर शुक्रवार को मुंबई पहुंच गए
- 4 दिनी दौरे में कार्नी मुंबई में बिजनेस लीडर्स से मिलेंगे. मंडे को पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी
- भारत-कनाडा के संबंध हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद खराब हो गए थे, लेकिन अब सुधार की कोशिशें हो रही हैं
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपनी 4 दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को मुंबई पहुंच गए. पीएम बनने के बाद पहली भारत यात्रा पर आए कार्नी के साथ उनकी पत्नी डायना फॉक्स भी आई हैं. उनकी यात्रा का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच पिछली जस्टिन ट्रूडो सरकार के दौरान बढ़े तनाव को खत्म करना और व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई तक ले जाना है. कार्नी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका के साथ कनाडा के संबंध उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं.
मुंबई से शुरुआत, मंडे को PM मोदी से मुलाकात
प्रधानमंत्री कार्नी अपने दौरे की शुरुआत आर्थिक राजधानी मुंबई से कर रहे हैं. यहां वह बिजनेस लीडर्स से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी की मजबूत पर चर्चा करेंगे. इसके बाद 1 मार्च को वह दिल्ली रवाना होंगे, जहां सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात करेंगे. इस दौरान द्विपक्षीय बैठक भी होगी. कनाडाई पीएम भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मिलेंगे और भारत-कनाडा सीईओ फोरम को भी संबोधित करेंगे.
ट्रूडो के दौर में बिगड़ गए थे रिश्ते
साल 2023 में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के कूटनीतिक संबंधों में भारी खटास आ गई थी. उस समय की जस्टिस ट्रूडो सरकार ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे. भारत हालांकि लगातार सिरे से आरोपों को खारिज करता रहा, लेकिन बात इतनी बढ़ गई कि दोनों देशों ने अपने यहां से एक-दूसरे के राजनयिकों तक को निष्कासित कर दिया.
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संबंधों में सुधार के अलावा ये भी मकसद
हालांकि पिछले साल मार्च में मार्क कार्नी के सत्ता संभालने के बाद से रिश्तों में सुधार देखा गया है. अब दोनों देश पिछली कड़वाहट को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. कनाडाई पीएम कार्नी का मकसद भारत से राजनयिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूती प्रदान करना है. पीएम मार्क कार्नी 2030 तक भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 51 अरब डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं. उनकी भारत यात्रा के दौरान व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिफेंस जैसे अहम क्षेत्रों में नई साझेदारी पर भी बातचीत होगी. भारत की विशाल आबादी और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए कनाडा परमाणु ऊर्जा का क्षमता विस्तार करने में सहयोग का प्रस्ताव भी कर सकता है.
ट्रंप के तेवरों से कनाडा के तेवर नरम!
भारत को लेकर कनाडा की यह रणनीति अमेरिका पर अपनी इकोनॉमी की अत्यधिक निर्भरता से बचाने का एक हिस्सा मानी जा रही है. फिलहाल कनाडा का 75 प्रतिशत से अधिक निर्यात अमेरिका को होता है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और टैरिफ के खौफ से कनाडा अब यूरोप और एशिया के बाजारों में अपनी पैठ बनाना चाहता है. इसी मकसद से पीएम कार्नी भारत के बाद ऑस्ट्रेलिया और जापान का भी दौरा करेंगे.
भारत को सकारात्मक रुख की उम्मीद
भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा था कि पीएम मोदी और कनाडा के पीएम कार्नी के बीच आगामी मुलाकात दोनों देशों के सकारात्मक उत्साह और साझा दृष्टिकोण को और मजबूती प्रदान करने का सुनहरा अवसर साबित होगी. मंत्रालय के मुताबिक, इस द्विपक्षीय वार्ता का फोकस व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाने पर होगा. इसके अलावा ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और अत्याधुनिक तकनीक जैसे भविष्य के लिए अहम क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी पर भी चर्चा की जाएगी.














