मणिपुर हिंसा के 3 साल पूरा होने पर बम धमाके से दहला इंफाल, एयरपोर्ट के पास हुआ विस्फोट

मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा 3 मई, 2023 को उस समय शुरू हुई थी, जब पहाड़ी जिलों में मैतेई समुदाय को 'अनुसूचित जनजाति' (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था.

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मणिपुर हिंसा के 3 साल पूरा होने पर बम धमाके से दहला इंफाल (File Photo)
IANS

Bomb Blast Near Imphal Airport: मणिपुर के इंफाल हवाई अड्डे के पास रविवार को बम धमाका हुआ है. जानकारी के अनुसार, यह धमाका इंफाल पश्चिम जिले में उग्रवादियों के द्वारा किया गया है. ध्यान देने वाली बात है कि यह धमाका मणिपुर में मैतई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष के तीन वर्ष पूरे होने पर हुआ है. अधिकारियों ने बताया कि यह बम विस्फोट इंफाल हवाई अड्डे से एक किलोमीटर से भी कम दूर सिंगजामेई थानाक्षेत्र के मालोम में एक श्मशान घाट के पास हुआ. हालांकि, गनीमत रही कि इस धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ. 

धमाके वाली जगह के करीब है आर्मी कैंप

पुलिस के अनुसार, सिंगजामेई पुलिस थाने के अंतर्गत मालोम में एक श्मशान घाट के पास हुए इस धमाके में किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं है. यह जगह इंफाल हवाई अड्डे से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर है. घटनास्थल टेरिटोरियल आर्मी के एक कैंप के भी करीब है. अधिकारियों ने बताया कि धमाके के बाद इलाके को सुरक्षित कर लिया गया है और स्थिति पर कड़ी नज़र रखी जा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि मामले की जांच चल रही है. 

प्रतिबंधित संगठन ने ली धमाके की जिम्मेदारी

सुबह 11:50 बजे हुए इस धमाके की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन, कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (KCP) ने ली है. एक बयान में, KCP ने कहा कि उसने राज्य में बार-बार होने वाले बंद, नाकेबंदी और शटडाउन के विरोध में यह धमाका किया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है. बता दें कि 2023 से अब तक जातीय संघर्षों में कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.

मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा 3 मई, 2023 को तब शुरू हुई थी, जब पहाड़ी जिलों में मैतेई समुदाय की 'अनुसूचित जनजाति' (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था. मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी (जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं) 40 प्रतिशत हैं और मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं. 

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