BJP अध्यक्ष के चुनाव में पहली बार वोट नहीं करेंगे आडवाणी-जोशी, जान लीजिए क्या है इसकी वजह

अभी तक दिल्ली प्रदेश संगठन के चुनाव संपन्न नहीं हुए हैं. इसलिए दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य निर्वाचित नहीं हो सके हैं. ऐसे हालात में आडवाणी और जोशी दोनों ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हो सके हैं.

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  • BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए देश भर से 5708 मतदाता शामिल हैं
  • पार्टी के संगठन चुनाव बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक होते हैं
  • आडवाणी और जोशी को बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया गया है
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नई दिल्ली:

भारतीय जनता पार्टी  (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है. चुनाव के लिए देश भर से 5708 मतदाता हैं. अगर ज़रूरी हुआ तो 20 जनवरी को मतदान होगा। बीजेपी की परंपरा के अनुसार चुनाव आमराय से होता आया है. ऐसे में नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है. लेकिन इस बार चुनाव में एक ख़ास बात है कि 1980 में बीजेपी की स्थापना के बाद से ही ऐसा पहली बार होगा जब पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से शामिल लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी बीजेपी अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हैं. 

दरअसल, निर्वाचन मंडल के गठन के लिए बीजेपी संविधान के अनुसार सबसे पहले बूथ स्तर, फिर मंडल, जिला और अंत में प्रदेश स्तर के अध्यक्षों का चुनाव होता है. इन चुनावों के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए 'इलेक्टोरल कॉलेज' (निर्वाचक मंडल) तैयार होता है.इस निर्वाचन मंडल में राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं. प्रदेश संगठन के चुनाव में परिषद के सदस्यों का चुनाव कराया जाता है.

बीजेपी के संगठन पर्व में देश भर की प्रदेश इकाइयों में चुनाव हो रहे हैं. पार्टी संविधान के अनुसार कम से कम पचास प्रतिशत राज्यों में संगठन चुनाव होने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाता है. यह पैमाना पूरा हो चुका है लेकिन अब भी कुछ राज्यों में चुनाव होना बाक़ी हैं. इनमें कर्नाटक, हरियाणा, त्रिपुरा और दिल्ली शामिल हैं. 

महत्वपूर्ण बात यह है कि लाल कृष्ण आडवाणी लंबे समय तक गांधीनगर से सांसद होने के नाते गुजरात से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य निर्वाचित होते आए थे. 2021 में वे दिल्ली से परिषद के सदस्य हैं। इसी तरह मुरली मनोहर जोशी भी कानपुर से सांसद होने के नाते उत्तर प्रदेश से परिषद के सदस्य थे. बाद में सांसद न होने पर वे दिल्ली से परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए थे. 

अभी तक दिल्ली प्रदेश संगठन के चुनाव संपन्न नहीं हुए हैं. इसलिए दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य निर्वाचित नहीं हो सके हैं. ऐसे हालात में आडवाणी और जोशी दोनों ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हो सके हैं.गौरतलब है कि इन दोनों ही शीर्ष नेताओं को बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया गया है. 

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