- भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बाहरी नेताओं को भी बड़े पदों पर नियुक्त कर अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव किया
- असम के हिमंता और अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू जैसे पूर्व कांग्रेसी नेता बीजेपी में शामिल होकर मुख्यमंत्री बने
- मणिपुर के एन बीरेन सिंह और त्रिपुरा के माणिक साहा ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर राज्य के सीएम पद संभाला
भारतीय जनता पार्टी को आमतौर पर एक ऐसी पार्टी के तौर पर देखा जाता है, जो संगठन में सालों तक काम करने वाले कैडर को ही बड़े पदों पर पहुंचाती है. मगर वक्त के साथ बीजेपी की रणनीति भी आकार ले रही है. बीजेपी की राजनीति की व्यावहारिक ज़रूरतों को समझते हुए उन नेताओं को भी आगे बढ़ाया, जो कभी दूसरी पार्टियों से जुड़े रहे. इन नेताओं ने पार्टी बदलने के बाद न सिर्फ बीजेपी में अपनी जगह बनाई, बल्कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जैसे बड़े पदों तक पहुंचे.
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री बने ‘आउटसाइडर'
- हिमंता बिस्वा सरमा (असम)- उत्तर‑पूर्व से लेकर उत्तर भारत तक बीजेपी ने कई पूर्व कांग्रेसी और अन्य दलों से आए नेताओं को शीर्ष पद सौंपे. हिमंता बिस्वा सरमा करीब 20 साल तक कांग्रेस में रहे और 2015 में बीजेपी में शामिल हुए, आज वे असम के मुख्यमंत्री हैं और सिर्फ पूर्वोत्तर के ही नहीं बल्कि बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं.
- पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश)-पेमा खांडू ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और वे कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री भी रहे. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. बीजेपी में आने के बाद वे अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और पार्टी की सरकार की अगुवाई कर रहे हैं.
- एन. बीरेन सिंह (मणिपुर)-एन. बीरेन सिंह पहले कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते थे. बाद में वे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए. बीजेपी में आने के बाद उन्हें मणिपुर का मुख्यमंत्री बनाया गया और वे पार्टी सरकार का चेहरा बने. अब वो मणिपुर के सीएम नहीं है.
- माणिक साहा (त्रिपुरा)- माणिक साहा ने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी. बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की और संगठन में आगे बढ़े. बीजेपी ने उन्हें त्रिपुरा का मुख्यमंत्री बनाकर राज्य की कमान सौंपी.
- ब्रजेश पाठक (उत्तर प्रदेश)-ब्रजेश पाठक बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे और पार्टी में अहम भूमिका निभाते रहे. इसके बाद उन्होंने बीएसपी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी जॉइन की. बीजेपी में आने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जिससे उनका राजनीतिक कद और बढ़ा.
केंद्रीय राजनीति में बदला भाग्य
बीजेपी में आने के बाद कई नेताओं को केंद्र की राजनीति में भी अहम जिम्मेदारियां मिलीं.
- ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो कांग्रेस के बड़े नेता और राहुल गांधी के करीबी माने जाते थे, आज बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं.
- नारायण राणे, जो शिवसेना और कांग्रेस दोनों में अहम भूमिका निभा चुके थे, बीजेपी में आने के बाद केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बने.
- कांग्रेस की ‘युवा ब्रिगेड' का हिस्सा रहे आर.पी.एन. सिंह और जितिन प्रसाद भी बीजेपी में शामिल होने के बाद सरकार और संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर हैं.
विपक्ष से सत्ता तक का सफर
पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे. जबकि आज वे बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे हैं और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं.
झारखंड में अर्जुन मुंडा, जो मूल रूप से झारखंड मुक्ति मोर्चा से थे, बीजेपी में आकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बने. उत्तराखंड के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अब बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं.
पार्टी बदलने वालों पर बीजेपी का भरोसा
इन उदाहरणों से साफ है कि बीजेपी ने सिर्फ विचारधारा ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और ज़मीनी पकड़ को भी महत्व देने का काम कर रही है. पार्टी बदलने वाले इन नेताओं के लिए बीजेपी में आने के बाद उनका राजनीतिक कद और जिम्मेदारियां दोनों बढ़ीं, जिससे ‘आउटसाइडर' नेताओं के लिए भी सत्ता तक पहुंचने के दरवाज़े खुले.














