तमिलनाडु में नया आंदोलन शुरू करेंगे BJP नेता अन्नामलाई, बनाएंगे मजबूत वालंटियर बेस

अन्नामलाई 2021 से 2025 तक BJP के अध्यक्ष रहे थे. उससे पहले वो ब्यूरोक्रेसी में थे. अन्नामलाई की आक्रामकता ने कम ही समय में उन्हें तमिलनाडु में बीजेपी का बड़ा नेता बना दिया था. लेकिन बाद में सहयोगी पार्टी की नाराजगी के कारण उन्हें साइडलाइन किया गया था.

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तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई.
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  • तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई राज्य में एक "नया आंदोलन" शुरू करेंगे.
  • उनका मकसद एक जैसी सोच वाले लोगों को अपने साथ जोड़ना और एक मज़बूत वॉलंटियर बेस तैयार करना है.
  • ऐसी चर्चा है कि वह 'मक्कल शक्ति अय्यकम' (जन शक्ति आंदोलन) शुरू कर सकते हैं.
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चेन्नई:

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सालों की द्रविड़ राजनीति की जमीन खिसकने के बाद अब नए युग की शुरुआत हो चुकी है. अभिनेता से राजनेता बने TVK प्रमुख विजय सत्ता संभाल चुके हैं. विजय की ब्लॉकबस्टर पॉलिकटल एंट्री के बाद अब एक बड़ी खबर BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई से जुड़ी सामने आई है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई राज्य में एक "नया आंदोलन" शुरू करेंगे. उनका मकसद एक जैसी सोच वाले लोगों को अपने साथ जोड़ना और एक मज़बूत वॉलंटियर बेस तैयार करना है. 

जन शक्ति आंदोलन शुरू करेंगे अन्नामलाई

ऐसी चर्चा है कि वह 'मक्कल शक्ति अय्यकम' (जन शक्ति आंदोलन) शुरू कर सकते हैं. उनका यह कदम तीन-भाषा नीति को लेकर केंद्र सरकार के साथ उनके मतभेदों के बाद आया है. अन्नामलाई ने 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए CBSE की तीन-भाषा नीति को लागू करने के फैसले को वापस लेने की मांग की थी. 

2021-25 तक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे अन्नामलाई

सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा था कि इससे तमिलनाडु के छात्रों और अभिभावकों को अनावश्यक मानसिक तनाव' हो रहा है. बताते चले कि अन्नामलाई 2021 से 2025 तक BJP के अध्यक्ष रहे थे. उससे पहले वो ब्यूरोक्रेसी में थे. IPS अधिकारी अन्नामलाई 2020 में राजनीति में आए थे. 

तमिलनाडु में बीजेपी संगठन में डाली थी नई जान

अन्नामलाई ने 2021 में एल. मुरुगन की जगह राज्य BJP अध्यक्ष का पद संभाला था. अन्नामलाई को एक साफ-सुथरा और बेबाक चेहरा माना जाता था. तमिलनाडु में बीजेपी संगठन में नई जान डालने का श्रेय उन्हें दिया जाता है. उनकी आक्रामक शैली और मीडिया में मौजूदगी ने उन्हें एक ऐसी आवाज बना दिया था, जिसे केंद्रीय नेता भी ध्यान से सुनते थे.

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बयानबाजी से नाराज हुई AIADMK

लेकिन बाद में उनकी आक्रामक शैली और बयानबाजी भारी पड़ी. CN अन्नादुरई और J जयललिता पर की गई उनकी विवादित टिप्पणियों ने सहयोगी पार्टी AIADMK को उनसे नाराज कर दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि गठबंधन टूट गया. दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की.

बाद में जब बीजेपी और AIADMK के बीच फिर गठबंधन हुआ तो AIADMK प्रमुख ई. पलानीस्वामी की एक शर्त थी BJP की राज्य इकाई के नेतृत्व में बदलाव. इसके बाद, अन्नामलाई की जगह नैनार नागेंद्रन को राज्य अध्यक्ष बनाया गया.

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