भारतीय जनता पार्टी का आज 47वां स्थापना दिवस है. इस अवसर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि पार्टी के अगले दो सबसे बड़े टारगेट क्या हैं? पीएम मोदी ने बताया कि बीजेपी अभी तक तीन तलाक कानून, CAA और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण जैसे बड़े लक्ष्य हासिल कर कर चुकी है. अगर अगला नंबर यूनिफॉर्म सिविल कोड, वन नेशन वन इलेक्शन का है. उन्होंने कहा कि अब ऐसे विषयों पर देश में गंभीरता से उठाया जा रहा है.
हमारा मिशन अभी भी जारी
बीजेपी सरकार में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "देश जानता है, हर चुनौती का सामना करने के लिए भाजपा ईमानदारी से कोशिश कर रही है, आगे भी करेगी. पहले भी सकारात्मक नतीजे मिले हैं और आगे भी मिलेंगे. अंग्रेजों के दौर के सैकड़ों काले कानूनों का अंत, लोकतंत्र के लिए नए संसद भवन का निर्माण, सामान्य समाज के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, कानून बनाकर तीन तलाक पर रोक, सीएए, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण... ऐसे कितने ही काम हैं, जो भाजपा के ईमानदार प्रयासों का नतीजा है. और हमारा मिशन अभी भी जारी है. यूनिफॉर्म सिविल कोड, वन नेशन वन इलेक्शन ऐसे सभी विषयों पर आज देश में एक गंभीर चर्चा हो रही है."
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से क्या फायदा?
- सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, मतदान सामग्री आदि में काफी पैसा खर्च होता है. जब एक साथ चुनाव होंगे, तो चुनावी खर्च में उल्लेखनीय कमी आ सकती है.
- बार-बार चुनावों के कारण प्रशासनिक मशीनरी (पुलिस, शिक्षक, अधिकारी) लंबे समय तक चुनाव ड्यूटी में रहती है, जिससे नियमित काम प्रभावित होता है. एक साथ चुनाव से शासन अधिक सुचारु ढंग से चल सकता है.
- अलग-अलग समय पर चुनाव होने से MCC लंबे समय तक लागू रहता है, जिससे नई नीतियों और विकास कार्यों पर रोक लगती है. एक साथ चुनाव से यह बाधा कम होगी.
- सरकारें चुनावी मोड में कम और नीति-निर्माण पर अधिक ध्यान दे सकेंगी. इससे मध्यम व दीर्घकालिक सुधारों को लागू करने में मदद मिल सकती है.
- बार-बार चुनावों से परियोजनाएँ रुकती हैं। एक साथ चुनाव होने पर विकास योजनाएं बिना व्यवधान आगे बढ़ सकती हैं.
- कई बार चुनाव होने से मतदाताओं में थकान (voter fatigue) आती है. एक साथ चुनाव से मतदान प्रतिशत बेहतर होने की संभावना रहती है.
- निरंतर चुनावी वातावरण से समाज में तनाव बढ़ सकता है। एक साथ चुनाव से चुनावी बयानबाज़ी और ध्रुवीकरण का समय सीमित हो सकता है.
- सुरक्षा बलों की तैनाती बार-बार करनी पड़ती है। एक साथ चुनाव से उनकी कार्य-योजना बेहतर ढंग से बनाई जा सकती है.
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का उद्देश्य पूरे देश में विवाह, गोद लेने आदि के संबंध में सभी के लिए एक समान कानून बनाना है.
- कानून के सामने समानता: सभी नागरिकों पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में एक‑सा कानून लागू होने से अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) की भावना मजबूत होती है.
- अलग‑अलग निजी कानूनों में मौजूद लैंगिक असमानताओं को दूर करने में मदद मिल सकती है, जिससे महिलाओं के अधिकार अधिक स्पष्ट और सुरक्षित हों.
- अनेक व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक स्पष्ट ढांचे से कानूनी भ्रम, मुकदमों और विरोधाभासी निर्णयों में कमी आ सकती है.
- समान नागरिक नियमों से नागरिक पहचान मजबूत होने और समुदायों के बीच समान आधार बनने की बात कही जाती है.
- नीति‑निदेशक तत्वों (विशेषकर अनुच्छेद 44) की दिशा में प्रगति के रूप में देखा जाता है, जो राज्य को समान नागरिक कानून की ओर प्रयास करने की बात करता है.
- समय के साथ समाज में आए बदलावों (शिक्षा, रोजगार, परिवार संरचना) के अनुरूप कानूनों को समकालीन और व्यावहारिक बनाने का अवसर मिलता है.
- बच्चों और महिलाओं जैसे समूहों के लिए एक‑समान न्यूनतम अधिकार मानक तय किए जा सकते हैं.
हमने कार्यकर्ताओं का विशाल कैडर खड़ा किया
पीएम मोदी ने बीजेपी की यात्रा जिक्र करते हुए कहा, "राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विशाल और पवित्र वट वृक्ष के नीचे हमें साफ नीयत के साथ सुचिता के साथ राजनीति में कदम रखने की प्रेरणा मिली. फिर शुरुआत के कुछ दशकों में हमने संगठन के लिए नीतियां निर्धारित करने में अपनी ऊर्जा लगाई. उसके बाद जो समय आया जब भाजपा ने पूरी निष्ठा के साथ खुद को एक सशक्त कैडर आधारित पार्टी बनाने में झोंक दिया. हमने कार्यकर्ताओं का ऐसा विशाल कैडर खड़ा किया, जिनमें सेवा भावना से काम करने का समर्पण था, जिन्होंने पार्टी के सिद्धांतों को अपने जीवन का आदर्श बनाया और जिन्होंने किसी भी परिस्थिति में अपने मूल्यों से समझौता स्वीकार नहीं किया."
ये भी पढ़े:- शाही परिवार की हार की सेंचुरी लगेगी... असम में पीएम मोदी का कांग्रेस पर वार














