Rangoli Bihu 2026: असम में उमंग के बीच छाई उदासी, बिहू मंचों पर जुबीन की आवाज को ढूंढ रही हैं आंखें

Assam News: असम में रंगाली बिहू की धूम के बीच सांस्कृतिक आइकन जुबीन गर्ग की कमी उनके प्रशंसकों को खल रही है. 2026 बिहू उत्सव में लोग अपने प्रिय गायक को याद कर भावुक हो हए हैं. पढ़िए ज्योतिष्मान शर्मा की ये रिपोर्ट.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Assam Tribute Zubeen Garg
NDTV

Assam Tribute Zubeen Garg: असम का सबसे बड़ा त्योहार रंगोली बिहू आज पूरे प्रदेश में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. राज्य में चारों तरफ ढोल की थाप और पेपा (भैंस के सींग से बना वाद्ययंत्र) की गूंज के बीच इस बार असम की हवाओं में एक गहरी उदासी भी घुली हुई है. राज्य के चहेते लोक सांस्कृतिक गायक जुबीन गर्ग को उनके फैंस याद कर रहे है. यह उनके निधन के बाद पहला बिहू है, जिसमें उनकी सुरमयी आवाज सुनने के लिए उनके प्रशंसकों और साथी कलाकारों बेचैन और आंखें नम हैं. 

सिंगापुर में  19 सितंबर को हुई थी मौत

 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में उनकी मौत के बाद असमिया म्यूजिक इंडस्ट्रीज़ में एक ऐसा खालीपन आ गया है जो अब तक भरा नहीं जा सका है. हर साल रोंगाली बिहू के दौरान जुबीन गर्ग के स्टेज शो का लोग बेसब्री से इंतजार करते थे. इस बार उनके बिना बिहू के मंच अधूरे नजर आ रहे हैं.  गुवाहाटी की गणेशगुड़ी बिहू समिति के सदस्यों ने भारी मन से कहा कि जुबीन इस साल भी हमारे मुख्य कलाकार होने वाले थे. यह हमारा दुर्भाग्य है कि वह हमें आंसुओं के बीच छोड़ गए. जब उनके नाम की घोषणा होती थी, तो पहाड़ों, इमारतों और पेड़ों तक पर प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ती थी.

जुबीन गर्ग
Photo Credit: NDTV

 सभी पीढ़ियों के माने जाते थे बेजोड़ गायक

जुबीन की लोकप्रियता का आलम यह है कि उनके प्रशंसक हर उम्र के हैं. गुवाहाटी के एक और युवा प्रशंसक प्रणब ने बताया कि ज़ुबीन सभी पीढ़ियों के लिए एक विद्रोही कलाकार थे. मेरे पिता उनके शुरुआती गीत सुनते थे, मैं उनके बाद के कामों के साथ बड़ा हुआ, और मेरा छोटा भाई उनके नए योगदानों से जुड़े हुए है. मुझे यकीन है कि असम में उनके जैसा दूसरा कलाकार कभी नहीं होगा.

मंचों पर गूंज रही हैं जुबीन की यादें

इस साल असम में बिहू केवल नव वर्ष का स्वागत नहीं है, बल्कि यह अपने महान कलाकार को दी जाने वाली एक सामूहिक श्रद्धांजलि भी है. गांवों से लेकर शहरों तक, बिहू की मंडलियां उत्सव मनाने के साथ-साथ जुबीन गर्ग के गीतों के माध्यम से उन्हें याद कर रही हैं। भले ही वह शारीरिक रूप से मंच पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ असम के हर दिल और हर धड़कन में गूंज रही है.

बिहू
Photo Credit: NDTV

40 हजार गानों की विरासत 

जुबीन गर्ग केवल एक गायक नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्व की असमिया संगीत और सांस्कृतिक पहचान थे. उन्होंने कई भाषाओं में लगभग 38,000 से 40,000 गाने गाए. उन्होंने अपने संगीत के माध्यम से समुदायों को जोड़ा और पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया था. बॉलीवुड फिल्म 'गैंगस्टर' के गाने 'या अली' ने उन्हें देश-दुनिया में प्रसिद्धि दिलाई, लेकिन असम के लिए वह हमेशा एक 'विद्रोही कलाकार' और जन-नायक रहे.

Advertisement

यह भी पढ़ें: Bihar: महिला दरोगा और चौकीदार निलंबित, एसपी ने दिये विभागीय कार्रवाई के आदेश

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Bihar New CM | बिहार से 'सुशासन बाबू' की विदाई, BJP के 'सम्राट' होंगे नए CM | Politics
Topics mentioned in this article