मंत्री जी आपने बच्चों को जो पढ़ाया वो सही नहीं था, यहां पढ़िए की सही बात क्या है

बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें वो एक क्लास में पढा रहे हैं. इसमें वो कई तरह की गलत बातें छात्रों को बताते हुए नजर आ रहे हैं. आइए हम आपको बताते हैं कि वो गलत क्या पढ़ा रहे हैं और सही बात क्या है.

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नई दिल्ली:

नीतीश कुमार के कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी राजधानी पटना के एएन कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यपक नियुक्त हुए हैं. वो बुधवार को पहली बार क्लास लेने अपने कॉलेज पहुंचे.कॉलेज ने मंत्री जी की इस क्लास की वीडियो रिकॉर्डिंग भी करवाई. इस क्लास के बाद उन्होंने बताया कि वो पूरी तैयारी के साथ आए थे. मंत्री जी के क्लास के वीडियो का एक हिस्सा देखते ही देखते वायरल हो गया.इसमें उन्होंने छात्रों को संघवाद की अवधारणा समझाई. उनकी क्लास का वीडियो वायरल होने के बाद लोग मंत्री जी की समझ पर ही सवाल उठा रहे हैं. लोगों को कहना है कि मंत्री जी का संघवाद को 'Agreement' बताना और राज्यों को 'Independent' कहना गलत है. लोगों ने इसके अलावा भी कई गलतियां पकड़ी हैं. यहां अलीगढ़ के डीएस कॉलेज के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉक्टर अमर सिंह बता रहे हैं कि मंत्री जी ने छात्रों को क्या गलत पढ़ाया और उसका सही उत्तर क्या है. 

क्या है भारत का संघवाद

  1. उन्होंने कहा कि Federalism is like an agreement : संघवाद एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच संविधान द्वारा किया जाता है. केसी व्हेयर के मुताबिक, संघवाद वह प्रणाली है जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा होता है. यह मात्र एक 'एग्रीमेंट' यानी साधारण समझौता नहीं हैं . 
  2. उन्होंने कहा कि भारत को Federal State कहना Technically गलत है क्योंकि 'Union of States' लिखा है:   भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1(1) के अनुसार: ''भारत, अर्थात इंडिया,  राज्यों का एक संघ (Union of States) होगा.'' भारतीय संविधान के अंग्रेजी संस्करण में 'Federation' के स्थान पर 'Union' शब्द का प्रयोग किया गया है, जबकि हिंदी में दोनों के लिए 'संघ' शब्द ही प्रयुक्त होता है. इसका अर्थ यह है कि भारत को तकनीकी रूप से 'यूनियन' कहा गया है, न कि शुद्ध संघीय राज्य, हालांकि इसे अधिक उपयुक्त रूप से सहकारी (Cooperative) और अर्ध-संघीय (Quasi-federal) प्रणाली के रूप में समझा जाता है.  
  3. 'फेडरेशन' और 'यूनियन' के बीच महत्वपूर्ण अंतर निहित है. 'फेडरेशन'  में राज्य आपसी समझौते (Agreement) के आधार पर एक संघ का निर्माण करते हैं. इसमें राज्य अधिक स्वायत्त होते हैं और केंद्र व राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होता है (जैसे USA). इसके विपरीत, 'यूनियन' में राज्य किसी समझौते से नहीं बनते, बल्कि एक संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत संगठित होते हैं और उन्हें पृथक होने का अधिकार प्राप्त नहीं होता.इसके साथ ही राज्यों की सीमाओं, नामों या संरचना में परिवर्तन भी संभव है, जो केंद्र द्वारा संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत किया जा सकता है. भारत के मामले में, राज्यों ने मिलकर देश नहीं बनाया है, बल्कि देश (केंद्र) ने प्रशासनिक सुविधा के लिए राज्यों का गठन किया है. डॉक्टर आंबेडकर ने भी संविधान सभा में स्पष्ट किया था कि भारत का संघ राज्यों के समझौते पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा संघ है जिसे तोड़ा नहीं जा सकता. इसलिए 'Union' शब्द का प्रयोग भारत की अखंडता, अविभाज्यता और केंद्र की सशक्त भूमिका को दर्शाने के लिए किया गया है.
  4. उन्होंने कहा कि केंद्र Control करता है:  संघवाद का उद्देश्य विविधताओं को 'नियंत्रित' करना नहीं, बल्कि उन्हें समायोजित करना और सत्ता का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है. यह व्यवस्था केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे पर आधारित होती है, जिससे दोनों अपने-अपने क्षेत्र में स्वायत्त रूप से कार्य कर सकें. भारतीय संविधान में भी यही भावना निहित है कि विभिन्न भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधताओं को दबाया नहीं जाए, बल्कि उन्हें संवैधानिक संरक्षण दिया जाए. यदि संघवाद को नियंत्रण का माध्यम मान लिया जाए, तो लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर पड़ जाएगी. अतः संघवाद 'कंट्रोल' नहीं, बल्कि 'पावर शेयरिंग' और 'सहयोग' की व्यवस्था है, जो राज्यों की स्वायत्त  और भागीदारी सुनिश्चित करती है.
  5. 'States Independent हैं': भारतीय संघवाद के संदर्भ में  स्वतंत्रता शब्द का प्रयोग अत्यंत सावधानी से किया गया है. संघीय व्यवस्था में राज्यों को पूर्ण स्वतंत्र (Independent) नहीं माना जाता, बल्कि वे स्वायत्त (Autonomous) होते हैं. भारत में राज्यों को अपनी सीमित विधायी और प्रशासनिक शक्तियां प्राप्त हैं, परंतु वे पूर्णतः स्वतंत्र नहीं हैं. अंतिम संप्रभुता राष्ट्र के पास ही निहित रहती है. भारतीय संविधान के तहत केंद्र को व्यापक शक्तियां प्रदान की गई हैं, जो यह दर्शाती हैं कि भारत एक सशक्त केंद्र वाला संघ है, जहां राज्यों की स्वायत्तता संवैधानिक सीमा के भीतर ही संचालित होती है.
  6. '7th Schedule का मतलब Independent Governments': उन्होंने कहा कि राज्यों की अपनी Independent Government होती है. भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के सुव्यवस्थित विभाजन को निर्धारित करती है. इसके अंतर्गत संघ सूची (Union List), राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) के माध्यम से विषयों का वर्गीकरण किया गया है. इसका उद्देश्य पृथक्करण नहीं, बल्कि समन्वित शासन स्थापित करना है, जिससे दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में प्रभावी रूप से काम कर सकें.
  7. उन्होंने राज्य सभा और लोक सभा Representation को Oversimplify किया: भारतीय संघवाद में प्रतिनिधित्व की व्यवस्था द्विसदनीय संसद के माध्यम से स्पष्ट होती है. लोकसभा में प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर होता है, जिससे यह जनता की इच्छा को प्रतिबिंबित करता है. इसके सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने जाते हैं. वहीं राज्य सभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व होता है, परंतु यहां सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है, बल्कि उनकी जनसंख्या के अनुसार सीटें निर्धारित होती हैं. इसके सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव द्वारा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा, आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Single Transferable Vote) से चुने जाते हैं. इस प्रकार भारत में संघीय और एकात्मक दोनों प्रवृत्तियों का समन्वय दिखाई देता है.

जटिल संवैधानिक विषयों के अध्यापन में सटीकता और स्पष्टता दोनों अत्यंत आवश्यक हैं. यदि अवधारणाओं को बिना पर्याप्त शुद्धता के सरल बनाने का प्रयास किया जाए, तो इससे विद्यार्थियों में गलत धारणाएं विकसित हो सकती हैं. भारतीय संविधान जैसे विषयों में प्रत्येक शब्द का विशेष महत्व होता है, अतः उनकी व्याख्या करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है. स्पष्ट, सटीक और संतुलित प्रस्तुति ही विद्यार्थियों में सही समझ विकसित करती है और उन्हें संवैधानिक विषयों के प्रति गहन एवं यथार्थ दृष्टिकोण प्रदान करती है.

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