- बागेश्वर के राजकीय इंटर कॉलेज कौसानी में स्कूल परिसर में भूत मंदिर का निर्माण 25 हजार रुपये में कराया गया.
- मंदिर निर्माण के लिए छात्रों से सौ रुपये प्रति छात्र की दर से लगभग इक्कीस हजार आठ सौ रुपये वसूले गए.
- अभिभावकों ने आरोप लगाया कि छात्रों से नियमों के खिलाफ प्रति माह पचास रुपये सफाई शुल्क भी लिया जा रहा है.
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से सामने आया एक मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि अंधविश्वास के नाम पर लोगों से किस हद तक काम करवाए जा सकते हैं. यह मामला इसलिए और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि यह शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले एक सरकारी स्कूल से जुड़ा है. आमतौर पर अंधविश्वास को दूर करने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया जाता है. लेकिन जब स्कूल परिसर में ही अंधविश्वास के नाम पर बच्चों से पैसे वसूले जाएं, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है.
25 हजार रुपये की लागत से 'भूत मंदिर' का निर्माण
दरअसल, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के राजकीय इंटर कॉलेज, कौसानी में ‘भूत मंदिर' बनाए जाने की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर में लगभग 25 हजार रुपये की लागत से इस कथित ‘भूत मंदिर' का निर्माण कराया गया. जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर यह मंदिर बनाया गया, वहां पहले किसी व्यक्ति की असमय मृत्यु हुई थी. धीरे‑धीरे इस जगह को लेकर अंधविश्वास फैल गया कि यहां एक महिला की आत्मा भटकती है और लोगों को डराती है.
बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में स्कूल की कई छात्राएं रहस्यमय ढंग से बेहोश भी हुई थीं. इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छात्राओं की काउंसलिंग कराई थी, लेकिन आरोप है कि यह प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई. इसके बाद कथित तौर पर अंधविश्वास के चलते स्कूल परिसर में ‘भूत का मंदिर' बनाने का फैसला किया गया और इसके लिए छात्र‑छात्राओं से ही पैसे वसूले गए.
218 छात्रों से लगभग 21,800 रुपये एकत्र किए गए
जब यह मामला सामने आया और तूल पकड़ने लगा, तो शिक्षा विभाग भी हरकत में आया और जांच के आदेश जारी कर दिए गए. आरोप है कि मंदिर निर्माण के लिए प्रत्येक छात्र से 100 रुपये वसूले गए. कुल 218 छात्रों से लगभग 21,800 रुपये एकत्र किए गए, जबकि शिक्षकों के योगदान को मिलाकर कुल राशि करीब 25 हजार रुपये बताई जा रही है. इसके बावजूद आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य बहुत छोटा और नाममात्र का किया गया.
प्रति माह 50 रुपये की दर से ‘सफाई शुल्क' वसूला जा रहा
अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया है कि दिसंबर 2025 से छात्रों से प्रति माह 50 रुपये की दर से ‘सफाई शुल्क' वसूला जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है.
'तथ्यों को तोड़‑मरोड़ कर पेश किया जा रहा है'
वहीं, अभिभावक संघ के अध्यक्ष चंदन सिंह भंडारी ने इन आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि तथ्यों को तोड़‑मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और सरकारी संस्थान को बदनाम किया जा रहा है. चंदन सिंह भंडारी के अनुसार, करीब 30 साल पहले इस स्थान पर नेपाली मूल के एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी, लेकिन बाद में यह अफवाह फैलाई जाने लगी कि किसी महिला की फिसलकर मौत हुई थी और उसकी आत्मा यहां भटकती है.
उन्होंने बताया कि इस स्थान पर कुछ लोग बलि प्रथा भी कर रहे थे. मुर्गियों की बलि चढ़ाई जाती थी. शराब पी जाती थी, जिससे गंदगी फैल रही थी. इन गतिविधियों को रोकने के लिए अभिभावक संघ की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि उस स्थान पर एक मंदिर बनाया जाए, ताकि बलि प्रथा बंद हो और लोगों के बीच यह संदेश जाए कि यहां अब इस तरह की गतिविधियां नहीं होंगी.
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अभिभावक संघ ने क्या बताया?
अभिभावक संघ के अध्यक्ष ने बताया कि सर्वसम्मति से तय किया गया था कि मंदिर निर्माण के लिए छात्रों से 100 रुपये का सहयोग लिया जाएगा और इसके बाद शांति पाठ कराया जाएगा, जिससे बच्चों के मन से भय का वातावरण खत्म हो सके. उन्होंने कहा कि यह सब एक सकारात्मक पहल थी, लेकिन इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए बागेश्वर के मुख्य शिक्षा अधिकारी विनय कुमार ने जांच के आदेश दे दिए हैं. मुख्य शिक्षा अधिकारी ने गरुड़ खंड शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
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