- SC ने भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद स्थल पर हिंदुओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा-अर्चना की अनुमति दी है
- मुस्लिमों को बसंत पंचमी के दिन दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई है
- सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से आपसी सम्मान बनाए रखने और प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की है
Bhojshala Case: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार जिले की विवादित भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद स्थल में शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने की जबकि मुसलमानों को उसी दिन दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार का पक्ष भी सुना.इस मामले पर सुनवाई के दौरान मुस्लिम और हिंदू पक्ष की ओर से क्या क्या दलीलें दी गईं, जानिए...
भोजशाला विवाद क्या है
हिंदू लोग भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है. यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है. एएसआई की ओर से सात अप्रैल, 2003 को की गई एक व्यवस्था के तहत, हिंदू मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं और मुसलमान शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं.
सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा था मामला
भोजशाला विवाद सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई. हिंदू और मुस्लिम समूहों ने 23 जनवरी शुक्रवार को भोजशाला परिसर में धार्मिक गतिविधियों के लिए अनुमति मांगी थी. इसी दिन बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा भी की जाएगी.
| हिन्दू पक्ष | मुस्लिम पक्ष |
| वसंत पंचमी का मुहूर्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक है. इसलिए 1 से 3 बजे तक पूजा नहीं रोक सकते. | एएसआई ने कहा है कि सर्वेक्षण जारी रहेगा और दो घंटे नमाज और पूजा होगी. नमाज केवल दोपहर में है. |
| नमाज तो शाम 5 बजे के बाद भी पढ़ी जा सकती है. तब तक हिंदुओं को पूजा की इजाजत दी जाए. | हम दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच परिसर खाली कर देंगे. शाम पांच बजे के बाद नमाज की इजाजत का मतलब नहीं |
| वसंत पंचमी के दिन शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज के आदेश में बदलाव किया जाना जरूरी है | नमाज के लिए दो घंटे के बाद पूजा बाकी समय हो सकती है. प्रशासन ने पहले भी व्यवस्था की थी, हमें शांति से नमाज पढ़ने की इजाजत मिले |
| केवल हिंदू पक्ष को मां सरस्वती की पूजा देने की इजाजत दी जाए. | पहले तीन बार इसी तरह के इंतजाम किए जा चुके हैं, इसलिए यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. |
| भोजशाला में वसंत पंचमी की पूजा के वक्त नमाज की इजाजत न दी जाए. | जब भी वसंत पंचमी और शुक्रवार को जुमे की नमाज का वाकया पहली बार नहीं है. पहले भी ऐसे इंतजाम हो चुके हैं. |
भोजशाला केस: कोर्ट ने और क्या-क्या कहा
- कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को दी जाए.
- प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की बेंच ने दोनों पक्षों से आपसी सम्मान और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य और जिला प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की.
- सुप्रीम कोर्ट ने जिला प्रशासन को उस स्थान पर कानून व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया है.
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