भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने कहा है कि वो 12 फरवरी को प्रस्तावित आम हड़ताल का समर्थन नहीं करता है. BMS ने कहा कि संघ इस हड़ताल में भाग भी नहीं लेगा. गौरतलब है कि यह हड़ताल कुछ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा बुलाई गई है, वह राजनीति से प्रेरित है.
BMS ने कहा कि उसका यह पक्ष है कि वह चारों श्रम संहिताओं का स्वागत करता है लेकिन उनमें से दो संहिताओं से संबंधित कुछ मुद्दों पर अपनी आपत्तियां और चिंताएं भी व्यक्त करता रहा है. BMS ने स्पष्ट किया है कि वेतन संहिता तथा सामाजिक सुरक्षा संहिता ऐतिहासिक और क्रांतिकारी हैं, जबकि शेष दो संहिताओं की कुछ धाराओं को लेकर चिंताएं हैं. इन मुद्दों को 13 और 21 नवंबर को भारतीय मजदूर संघ एवं श्रम मंत्री के साथ हुई बातचीत में विस्तार से चर्चा के बाद श्रम मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार भारतीय मजदूर संघ द्वारा उठाए गए आपत्तियों पर उचित समाधान निकालेगी.
इसके अतिरिक्त, BMS ने श्रम से संबंधित विभिन्न विषयों पर सरकार के समक्ष कई अन्य मांगें भी रखी हैं. श्रम मंत्री ने यह भी आश्वस्त किया है कि इन मुद्दों पर भी समुचित रूप से विचार कर समाधान किया जाएगा. इन आश्वासनों के आधार पर, BMS ने चारों श्रम संहिताओं को लागू करने से संबंधित अधिसूचनाओं का स्वागत किया है.
BMS ने कहा कि वह सरकार की सकारात्मक एवं श्रमिक-हितैषी पहलों का निरंतर समर्थन करता है तथा श्रमिकों के हितों के प्रतिकूल नीतियों का दृढ़तापूर्वक विरोध करते हुए उन पर अपनी आपत्तियां उठाता रहा है. BMS राजनीतिक रूप से प्रेरित आंदोलनों में भाग नहीं लेता, क्योंकि श्रम क्षेत्र को राजनीतिक हितों से दूर रखा जाना चाहिए. इसलिए BMS 12 फरवरी 2026 को होने वाली किसी भी हड़ताल का न तो समर्थन करेगा और न ही उसमें भाग लेगा.














