- अमित शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग को बीजेपी के पक्ष में मतदान बताया.
- अमित शाह ने कहा कि ममता बनर्जी प्रधानमंत्री मोदी से डरती हैं और उनके हर कदम को राजनीतिक रूप से देखती हैं.
- अमित शाह ने ममता बनर्जी की मानसिकता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे विरोधियों के प्रयासों को समझ नहीं पातीं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग के बाद शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉफ्रेंस की. इस प्रेस कॉफ्रेंस में उन्होंने बंगाल की बंपर वोटिंग को बीजेपी के लिए मतदान बताया. अमित शाह ने कहा- दीदी जा रही हैं, बीजेपी आ रही है. प्रेस कॉफ्रेंस में अमित शाह ने NDTV के सवालों का भी जवाब दिया. NDTV की मनोज्ञा लोईवाल ने अमित शाह से PM मोदी के झालमुढ़ी खाने और नदी में नाव की सवारी करने से जुड़ा सवाल पूछा. जिस पर उन्होंने कहा कि ममता जी पीएम मोदी से डर रही है.
NDTV का सवालः
बंगाल चुनाव में अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झालमुढ़ी खाई हैं, नाव में आज सैर की है और उसके बाद गंगा नदी और अन्य चीजों की बात शुरू हुई है. जो भी होता है, उसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहती हैं या तो यह सब पब्लिसिटी स्टंट है या फिर बंगाल में जगह बनाने की कोशिश है.
अमित शाह का जवाबः
ममता जी की मानसिकता ऐसा है, मोदी जी बोलेंगे नहीं कभी, मगर गलती से वो ऐसा बोल दें कि टीएमसी को वोट देना है... तो ममता बनर्जी कहेंगी नो, नो. मोदी कहता है टीएमसी को वोट मत देना. अब ममता जी को कौन समझ सकता है. भला कोई गंगा में नाव से सैर करें और अपने आप को गंगा के किनारे रहने वालों से जोड़ कर गंगा के शुद्धिकरण का वादा याद दिलाए तो इससे किसी को क्या आपत्ति हो सकती है. अमित शाह ने यह भी कहा कि झालमुढ़ी से किसी को क्या आपत्ति हो सकती है. मैंने सुना है कि ममता बनर्जी भी खाती हैं.
NDTV का सवालः
आपने कहा कि भायको (भतीजा) टैक्स यहां चल रहा है कि उसपर कड़ी कार्रवाई करेंगे. लेकिन हमने पिछले कई चुनावों में देखा... अशोक गहलोत की लाल डायरी का मसला आया, कोई कार्रवाई नहीं हुई. भूपेश बघेल के खिलाफ भी घोटालों के बात आए, कोई कार्रवाई नहीं हुई. अरविंद केजरीवाल तो बरी तक हो गए. बयानबाजी केवल चुनावी जुमलो तक रह जाती है, बाद में कोई कार्रवाई नहीं होती.
अमित शाह का जवाबः
जांच होता है, जांच में सहयोग नहीं करते. शनै-शनै सभी जिन्होंने भी भ्रष्टाचार किया है उन सभी पर कार्रवाई होगी. आप भरोसा कीजिए. जब आता है तब तो आप जीत वाले बयान देते हो. इसकी बकायदा जांच होती है. एजेंसी स्वतंत्र रूप से करती है. एजेंसी को कोर्ट में उलझाकर समय बहुत जाया किया जा रहा है, इसलिए देरी हो रही है. लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि बंद होना है. बंद होने के बाद आगे ना हो इसके लिए उदाहरण सेट करना है.
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