खेल खेलना बंद कीजिए... बांके बिहारी कॉरिडोर मामले में सुप्रीम कोर्ट से गोस्वामी परिवार को तगड़ी फटकार

वृन्दावन के स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में सरकार कॉरिडोर बनाना चाहती है. लेकिन स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं. गोस्वामी परिवार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच अधिकार एवं प्रबंधन को लेकर सालों से विवाद चल रहा है.

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बांके बिहारी कॉरिडोर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई.
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  • योगी सरकार ने मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में कॉरिडोर बनाने के लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराया है.
  • गोस्वामी परिवार ने इस फैसले का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
  • सुप्रीम कोर्ट ने गोस्वामी परिवार के वकीलों को बार-बार एक ही मुद्दा उठाने पर कड़ी फटकार लगाई है.
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नई दिल्ली:

यूपी की योगी सरकार मथुरा के बॉंके बिहारी मंदिर में कॉरिडोर बनाना चाहती है. इसके लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पास हो चुका है. इससे पहले वाराणसी में विश्वनाथ कॉरिडोर, मिर्जापुर में विंध्याचल कॉरिडोर और प्रयागराज में लेते हुए हनुमान मंदिर की कॉरिडोर बन चुका है. योगी सरकार के मथुरा में कॉरिडोर बनाने के फ़ैसले को खिलाफ वहॉं का गोस्वामी परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. पर कोर्ट ने आज उन्हें कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गोस्वामी परिवार की ओर से पेश वकीलों को कोर्ट ने खरी खोटी सुनाई. सख्त लहजे में फटकार लगाते हुए तीन सदस्यीय बेंच ने चेतावनी देते हुए कहा कि बार-बार एक ही मुद्दे को उठाना बर्दाश्त नहीं. तीन सदस्यीय बेंच में चीफ जस्टिस बी.आर.गवई, सतीश चन्द्र शर्मा और विनोद चन्द्रन शामिल हैं.

बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा आगे अगर ऐसा ही रहा तो फिर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी. सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन पहवा और के. नटराजन ने यह स्पष्ट किया कि गोस्वामी पक्ष पहले ही मामले को दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने की कोशिश कर चुका है.

जब गोस्वामी पक्ष की ओर से एक बार फिर उसी मुद्दे को उठाने का प्रयास किया गया, जिसे अदालत पहले ही खारिज कर चुकी थी तो पीठ ने स्पष्ट असहमति जताते हुए कहा कि एक ही विषय को बार-बार उठाना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है. पीठ ने कहा कि इस तरह की पुनरावृत्ति अनुचित है और इसे रोका जाना चाहिए.

कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा- आप खेल खेलना बंद कीजिए

कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा कि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं. आप इस तरह के खेल खेलना व चालें चलना बंद कीजिए. पीठ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न हुई और जानबूझकर मामला किसी अन्य पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो संबंधित वकील के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही पर विचार किया जा सकता है.

चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कपिल सिब्बल के जूनियर वकील के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्देश दिया, पर जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने सदाशयता दिखाते हुए कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया.

बांके बिहारी कॉरिडोर का विरोध कर रहे स्थानीय लोग


बताते चले कि वृन्दावन के स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में सरकार कॉरिडोर बनाना चाहती है. लेकिन स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं. गोस्वामी परिवार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच अधिकार एवं प्रबंधन को लेकर सालों से विवाद चल रहा है. 27 जुलाई को गोस्वामियों ने मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मंदिर प्रबंधन के सरकारी अध्यादेश के खिलाफ याचिका दायर की थी. गौरतलब है कि इस समिति का गठन कुछ दिन पहले ही हुआ था.

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