योगी का आदेश, उलेमा का समर्थन, यूपी में सड़क पर नहीं, अब 'शिफ्ट' में होगी बकरीद की नमाज

UP में बकरीद की नमाज सड़कों पर नहीं, बल्कि केवल मस्जिदों और ईदगाहों के अंदर ही अदा की जाएगी. सीएम योगी के इस आदेश का मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी समर्थन करते हुए दो शिफ्टों में नमाज कराने का फैसला किया है.

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  • CM योगी ने सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई और इसे केवल मस्जिदों में करने का निर्देश दिया
  • मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बकरीद की नमाज मस्जिदों और ईदगाहों के अंदर ही आयोजित करने की पुष्टि की है
  • ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अनुसार, भीड़ अधिक होने पर कई शिफ्टों में नमाज पढ़ने की व्यवस्था करेंगे
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर दिए गए बयान के बाद एक नई बहस छिड़ गई है. इस बीच, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा है कि आगामी ईद-उल-अजहा यानी बकरीद की नमाज हर साल की तरह इस बार भी मस्जिदों और ईदगाहों के परिसर के भीतर ही अदा की जाएगी. धर्मगुरुओं का कहना है कि भीड़ ज्यादा होने की स्थिति में नमाज के लिए कई शिफ्ट की व्यवस्था की जा सकती है.

हाल ही में लखनऊ के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा था कि नमाज मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जानी चाहिए और सड़कों या खुली सार्वजनिक जगहों पर इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने सुझाव दिया था, 'अगर आपके लिए नमाज़ पढ़ना जरूरी है, तो उसे शिफ्ट में पढ़ें. हम आपको नमाज से नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़कों पर इसकी इजाजत नहीं होगी.'

'मुसलमान हमेशा से कानून-व्यवस्था का पालन करते आए हैं'

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से जुड़े मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने बताया कि बकरीद के लिए मस्जिदों और ईदगाहों में बड़े पैमाने पर तैयारियां जारी हैं. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो अलग-अलग इमामों की अगुवाई में कई शिफ्टों में नमाज का इंतजाम किया जा सकता है.

मौलाना महली ने जोर देकर कहा, 'मुसलमान सालों से परिसरों के अंदर ही नमाज पढ़ते आ रहे हैं. नमाज सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि अनुशासन भी सिखाती है. सड़कों पर नमाज न पढ़कर मुसलमानों ने हमेशा कानून-व्यवस्था का सम्मान किया है और खुद को एक सभ्य समुदाय साबित किया है.' मुख्यमंत्री के बयान पर उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार सभी समुदायों पर एक जैसे नियम लागू करेगी और किसी भी समुदाय को सड़कों पर जुलूस या जमावड़ा करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए.

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शिया समुदाय में शिफ्ट का प्रावधान नहीं

दूसरी ओर, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव, मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि शिया मस्जिदों में ईद की नमाज की तैयारियां सामान्य रूप से चल रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि शिया पंथ की प्रथा के अनुसार सामूहिक नमाज में कई शिफ्ट का कोई प्रावधान नहीं होता है. सीएम के बयान पर उन्होंने कहा कि यह इबादत का मामला है और किसी एक तरीके को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. नियम सब पर समान रूप से लागू हों. कोई भी ऐसी धार्मिक गतिविधि जिससे यातायात बाधित होता हो, उस पर रोक लगनी चाहिए.

बरेलवी उलेमाओं ने किया मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन

इधर बरेलवी संप्रदाय के प्रमुख उलेमाओं ने सड़कों पर नमाज न पढ़ने के मुख्यमंत्री के निर्देश का समर्थन किया है. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने कहा कि इस्लाम के अनुसार नमाज के दौरान बंदे और अल्लाह के बीच कोई बाधा नहीं होनी चाहिए. ऐसी एकाग्रता और शांति सड़कों या चौराहों पर नहीं, बल्कि मस्जिदों या घरों में ही मिल सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि इस्लामी कानून के तहत भीड़ बढ़ने पर एक ही मस्जिद में अलग-अलग इमामों के साथ कई जमातें बनाने की अनुमति है और बरेली में भी ऐसा किया जा सकता है.

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'राजनीतिक रूप से प्रेरित था बयान'

वहीं अमरोहा के मदरसा इस्लामिया अरबिया जामा मस्जिद के प्रिंसिपल, मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने भी माना कि बिना अनुमति सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ना इस्लामी उसूलों के मुताबिक सही नहीं है और मुसलमान अमूमन इसका पालन करते हैं. हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री की टिप्पणी को 'बेबुनियाद' बताते हुए आरोप लगाया कि यह बहुसंख्यक समुदाय को खुश करने के लिए उठाया गया एक राजनीतिक कदम था.

अलीगढ़ में AIMIM ने की सड़क पर नमाज की मांग

इस पूरे मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की अलीगढ़ इकाई का रुख अलग रहा. AIMIM ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि ईदगाह परिसर छोटा होने के कारण मुसलमानों को बाहर की सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए. AIMIM के जिला अध्यक्ष यामीन खान अब्बासी ने कहा कि नमाज की जमात सिर्फ आधे घंटे की होती है और चूंकि ईदगाह अल्पसंख्यक-बहुल इलाके में है, इसलिए इससे मुख्य मार्ग का ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगा. उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और सभी धर्मों के लिए एक ही पैमाना होना चाहिए। अक्सर दूसरे समुदायों को भी धार्मिक आयोजनों के लिए खास रियायतें दी जाती हैं.

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