- असम कांग्रेस के पूर्व चीफ भूपेन बोरा ने पार्टी छोड़कर BJP ज्वाइन करने का निर्णय लिया है.
- भूपेन बोरा ने पार्टी में रकीबुल हुसैन के प्रभाव को उनकी पार्टी से इस्तीफा देने का मुख्य कारण बताया है.
- रकीबुल हुसैन असम के धुबरी से सांसद हैं और उन्होंने बड़े अंतर से AIUDF के बदरुद्दीन अजमल को हराया था.
असम में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Borah Resign) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. अब भूपेन बोरा 22 जनवरी को BJP ज्वाइन करने जा रहे हैं. भूपेन बोरा 35 साल से कांग्रेस में थे, उनकी गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी. अब उन्होंने पार्टी छोड़ने की एक बड़ी वजह पार्टी सांसद रकीबुल हुसैन को बताया है. भूपेन बोरा ने आरोप लगाए कि रकीबुल के हाथों में असम कांग्रेस की कमान है. गौरव गोगोई केवल चेहरा भर हैं. जानना जरूरी है कि रकीबुल हुसैन कौन हैं और वो भूपेन बोरा के निशाने पर क्यों हैं?
रकीबुल ने AIUDF चीफ बदरुद्दीन अजमल को 10 लाख के वोटों से हराया
रकीबुल धुबरी से सांसद हैं और पूर्व में तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रह चुके हैं. असम में उनकी पहचान कांग्रेस के सबसे कद्दावर मुस्लिम नेता की है. बीते लोकसभा चुनाव में रकीबुल हुसैन ने धुबरी सीट पर AIUDF के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को दस लाख से ज़्यादा वोटों से हराया. रकीबुल की जीत 2025 के लोकसभा चुनाव की सम्भवतः पूरे देश में सबसे बड़ी जीत है. इससे पहले धुबरी से बदरुद्दीन अजमल लगातार 3 बार से जीत रहे थे.
भूपेन बोरा बोले- रकीबुल ने उनके खिलाफ पार्टी में अभियान चलाया
NDTV के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में भूपेन बोरा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर उनके खिलाफ अभियान चलाया गया. बोरा के मुताबिक, रकीबुल हुसैन ने उनके खिलाफ पार्टी में अभियान चलाया और उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गौरव गोगोई हमेशा रकीबुल हुसैन का समर्थन करते रहे हैं. बोरा ने कहा कि गौरव गोगोई ने हर समिति और हर निर्णय लेने वाली प्रक्रिया में रकीबुल हुसैन को आगे बढ़ाया.
23 साल का विधायक रह चुके हैं रकीबुल
सांसद बनने से पहले रकीबुल हुसैन नौगाँव जिले की समागुड़ी विधानसभा सीट से 2001 से 2024 तक यानी 23 साल तक विधायक रहे. सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे तंजील हुसैन को टिकट दिया लेकिन वो अपने पिता की 5 जीत के सिलसिले को क़ायम नहीं रख पाए.
लोकसभा चुनाव 2025 के बाद रकीबुल का बढ़ा कद
बहरहाल अजमल को बड़े अंतर से हराने से रकीबुल का क़द काफ़ी बड़ा हो गया. आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति का वो अहम हिस्सा हैं. लेकिन पार्टी में उनके बढ़ते दख़ल से असहज होकर भूपेन बोरा ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया.
भूपेन ने ही लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए रकीबुल को मनाया था
रोचक बात यह है बीते लोकसभा चुनाव के दौरान असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने ही रकीबुल को धुबरी से अजमल के सामने लड़ने के लिए मनाया था. लेकिन बाद में सियासी समीकरण ऐसे बदले की रकीबुल भूपेन के निशाने पर आ गए!
तरुण गोगोई के करीबी रहे हैं रकीबुल हुसैन
दरअसल रकीबुल हुसैन पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी थे. इसी वजह से असम प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष गौरव गोगोई उनपर काफ़ी भरोसा करते हैं. असम में मुस्लिम आबादी क़रीब 30 फीसदी है. ऐसे में कांग्रेस को AIUDF जैसी क्षेत्रीय पार्टी को फिर से उभरने से रोकने के लिए रकीबुल जैसे नेता की स्वाभाविक ज़रूरत है.
बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का AIUDF के साथ गठबंधन था. इस बार असम में सरकार बनाने के करीब आने के लिए कांग्रेस को अल्पसंख्यक प्रभाव वाली सीटों पर क्लीनस्वीप करना होगा.
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रकीबुल पर घुसपैठियों को सरंक्षण देने का आरोप
लेकिन असम की सियासत के जानकार बताते हैं कि उपरी असम में रकीबुल हुसैन की छवि अच्छी नहीं है. बीजेपी उन पर प्रदेश सरकार में वन मंत्री रहते घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाती है. उनके नाम पर वोटों के ध्रुवीकरण होने का खतरा रहता है.
कांग्रेस सूत्रों का दावा- रकीबुल नहीं गौरव गोगोई भूपेन के निशाने पर
हालांकि कांग्रेस सूत्र इन बातों को खारिज करते हुए कहते हैं कि भूपेन बोरा के असल निशाने पर रकीबुल नहीं गौरव गोगोई ही हैं. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि असम प्रदेश कांग्रेस की कमान गौरव गोगोई के हाथों में है. वो लोकसभा में पार्टी के उपनेता हैं. उनके पास पर्याप्त सियासी अनुभव है.
रकीबुल उनके सहयोगी की भूमिका में हैं. लेकिन बोरा कांग्रेस को नुक़सान पहुँचाने के लिए रकीबुल हुसैन के बहाने सांप्रदायिक कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बीजेपी में उनकी जगह मजबूत हो सके.
भूपेन के झटके से उबरने की कोशिश में जुटी कांग्रेस
बहरहाल कांग्रेस अब बोरा से मिले झटके से उबरने की कोशिश में जुट गई है. कांग्रेस आने वाले दिनों में यह संदेह देने की कोशिश करेगी कि भूपेन बोरा सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के इशारे पर काम कर रहे थे. पार्टी सूत्र बताते हैं कि भूपेन के घर जा कर उन्हें मनाने की नाकाम कोशिश कर जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई ने यह कोशिश की कि बोरा के लिए “सहानुभूति फैक्टर” को कम कर सकें. प्रियंका गांधी के आगामी गुवाहाटी दौरे पर उनके स्वागत के लिए कांग्रेस एक बड़े शक्ति प्रदर्शन की तैयारी भी कर रही है.
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