- दिल्ली आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के आरोपों में केजरीवाल समेत 23 लोगों को निचली अदालत ने बरी कर दिया है.
- इस मामले में सबसे पहले दिल्ली कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था और सीबीआई जांच की मांग की थी.
- केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय कांग्रेस ने विरोध जताया था लेकिन बाद में चुनाव में दोनों दलों का गठबंधन टूट गया.
2021 में दिल्ली की तत्कालीन सरकार के दौरान लाई गई आबकारी नीति में कथित भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों को निचली अदालत ने बरी कर दिया गया है. केजरीवाल को राहत मिलने के फौरन बाद एक तरफ़ कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने इस फैसले पर सवाल उठा दिए तो वहीं स्टालिन और अखिलेश यादव जैसे बड़े नेताओं और तृणमूल कांग्रेस ने फ़ैसले का स्वागत किया. कांग्रेस साफ़ तौर पर इस अहम मुद्दे पर अलग–थलग पड़ गई. कांग्रेस के अंदर भी दो राय उभरी है. आख़िर केजरीवाल को मिली राहत से कांग्रेस को तकलीफ़ क्यों हुई?
दिल्ली कांग्रेस ने ही लगाया था करप्शन का आरोप
दरअसल जिस मामले (2021 आबकारी नीति) में केजरीवाल को बरी किया गया है, उसे सबसे पहले दिल्ली कांग्रेस ने उठाया था. 2022 के मध्य में तब के दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी ने केजरीवाल सरकार की शराब नीति में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगा इसकी सीबीआई जाँच की मांग को लेकर उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखी थी. ज़ाहिर है अपनी ही शिकायत से "यू टर्न" लेने से कांग्रेस की किरकिरी होती.
केजरीवाल की गिरफ्तारी का कांग्रेस ने किया था विरोध
हालांकि जब बीते लोकसभा चुनाव से पहले केजरीवाल कांग्रेस की अगुवाई में इंडिया गठबंधन में शामिल हो गए और उसी दौरान उन्हें गिरफ़्तार किया गया तो कांग्रेस ने गिरफ़्तारी का विरोध किया था. केजरीवाल और हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ रामलीला मैदान में हुई रैली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल हुए थे. तब कांग्रेस ने बीच का रास्ता लिया और कहा कि वो "शराब घोटाले" की जांच के पक्ष में हैं लेकिन जाँच एजेंसियों के "दुरुपयोग" के ख़िलाफ़ हैं.
विधानसभा चुनाव में आप और कांग्रेस का बिखर गया गठबंधन
लेकिन कुछ महीनों बाद ही जब दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन बिखर गया तो राहुल गांधी ने खुल कर केजरीवाल पर शराब घोटाले और आलीशान सीएम आवास बनवाने के आरोप लगाए. विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की दिल्ली से विदाई हो गई. तब से कांग्रेस को लग रहा था कि वो दिल्ली में अपनी खोई जमीन वापस हासिल कर लेगी. लेकिन अदालत के फैसले से अब हालात बदल गए हैं.
पवन खेड़ा ने AAP को BJP का सुविधाजनक सहयोगी बताया
अब जब कथित शराब घोटाले के मामले में केजरीवाल को बरी कर दिया गया है तो कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने आम आदमी पार्टी को बीजेपी का "सुविधाजनक सहयोगी" बता कर आरोप लगाए कि पंजाब और गुजरात चुनाव के मद्देनजर ठंडी पड़ जाएँगी. खेड़ा ने कहा कि पंजाब और गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को कमजोर करने के लिए अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को नहला–धुला कर पेश किया जा रहा है!
अगले साल पंजाब और गुजरात में विधानसभा चुनाव
अगले साल की शुरुआत में पंजाब और अंत में गुजरात विधानसभा के चुनाव होने हैं. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है. वहीं, गुजरात में भी कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है लेकिन वहाँ आम आदमी पार्टी तेज़ी से बढ़ रही है.
गोवा में भी आम आदमी पार्टी एक ताक़त बन चुकी है. हर जगह आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की ज़मीन में ही पैर पसारा है. माना जा रहा है कि अदालत के फैसले को आधार बनाकर केजरीवाल दिल्ली से लेकर पंजाब और गुजरात से गोवा तक लोगों के बीच सहानुभूति बटोरने की कोशिश करेंगे.
अगर इससे आम आदमी पार्टी को मजबूती मिली तो नुक़सान कांग्रेस का होगा. इसीलिए केजरीवाल को अदालत से मिली राहत को कांग्रेस "बीजेपी से साँठगाँठ" का नतीजा बताने की कोशिश कर रही है.
कांग्रेस को डर- केजरीवाल का ग्राफ बढ़ा तो राहुल की बढ़ेगी चुनौती
कांग्रेस को एक डर यह भी है कि केजरीवाल का ग्राफ दुबारा बढ़ा तो राहुल गांधी के लिए चुनौती बढ़ेगी जो फ़िलहाल पीएम मोदी के सामने विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे बने हुए हैं. हाल में ही राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने इंडिया गठबंधन की कमान ममता बनर्जी या स्टालिन को सौंपने की मांग की थी.
केजरीवाल की दूसरी पारी जम गई तो उनके आसपास तीसरे मोर्चे की बनेगी संभावना
एआई समिट में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को लेकर इंडिया गठबंधन के शामिल दलों ने भी सवाल उठाए थे. ऐसे में सियासी पिच पर केजरीवाल अपनी "दूसरी पारी" में जम गए तो उनके इर्दगिर्द तीसरे मोर्चे की संभावना बनने लगेगी क्यूंकि उनकी राष्ट्रीय पहचान हासिल है और आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है. ऐसे में कांग्रेस का चिंतित और असहज होना स्वाभाविक है.
पार्टी में दो राय, कई वरिष्ठ नेताओं ने केजरीवाल को दी बधाई
हालांकि केजरीवाल को राहत मिलने को लेकर कांग्रेस में दो राय उभर कर सामने आई है. पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग जाते हुए चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री मार्गरेट अल्वा ने केजरीवाल को बधाई दी है. अल्वा ने केस को झूठा और तिवारी से इसे बदले की राजनीति को बताया है.
वैसे भी राजनीति में संभावनाएं कभी खत्म नहीं होती. जो कांग्रेस गुजरात और पंजाब विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए केजरीवाल को मिली राहत पर सवाल उठा रही है वही पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद विपक्षी एकजुटता के नाम पर केजरीवाल के सामने दोस्ती का हाथ भी बढ़ा सकती है.
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